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मायाराज में बिजली को लगा 16 हजार करोड़ का झटका

Tue, 17 Sep 2013 10:44 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Tue, 17 Sep 2013 10:44 AM IST
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cag report on mayawati government

मायावती सरकार में बिजली खरीद, वितरण से लेकर प्रोजेक्ट्स के आधुनिकीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली हुई।

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हर स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं। धांधली उजागर करने वाली कैग की यह रिपोर्ट सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली क्षेत्र में ही कुल 16,632 करोड़ रुपये की चपत लगने का अंदाजा है।

केवल बिजली खरीद में ही पावर कॉरपोरेशन को 10 हजार 832 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगने का अनुमान है।

कैग ने आगरा में बिजली वितरण का काम गलत तरीके से टोरंट पावर लि. को सौंपे जाने पर आपत्ति जताते हुए 5022.24 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हद तो तब हो गई जब एक ही दिन में तकनीकी बिड, वित्तीय बिड फाइनल कर कंपनियों को काम का आदेश भी थमा दिया गया।

कैग ने सवाल उठाए हैं कि एक दिन में इतना बड़ा मूल्यांकन कैसे कर लिया गया? यही नहीं यूपी पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन की कारगुजारियों के चलते भी 372 करोड़ रुपये की चपत लगी है।

बिजली क्षेत्र में धांधली उजागर करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट सोमवार को विधानमंडल के पटल पर रखी गई।

रिपोर्ट में चौंकाने वाला पहला मामला, इलाहाबाद के बारा में थर्मल पावर स्टेशन को निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने का है। करार केमुताबिक, उसी कम्पनी से अगले 25 साल तक बिजली खरीदी जानी थी।
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सरकार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लि. (जेएएल) को बेजा फायदा देने के लिए नियम कानून ताक पर रख दिए। सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनी की बजाय ऐसी कंपनी चुनी गई जो बिजली महंगी दे रही थी।
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इसमें भी दो साल की देरी की गई। इसके चलते दोबारा ऊंची दरों पर निविदाएं हुईं। निविदा मूल्यांकन समिति के आकलन का इनर्जी टास्क फोर्स (ईटीएफ) की सिफारिशों के आधार पर फैसला किया जाना था।

कैग रिपोर्ट बताती है कि निविदा मूल्यांकन समिति के नौ सदस्यों में से पांच ईटीएफ के भी सदस्य थे, लिहाजा स्वतंत्र मूल्यांकन मुमकिन ही नहीं था।

यही कारण था कि मार्च, 2009 में जयप्रकाश एसोसिएट्स लि. को प्रोजेक्ट सौंप दिया गया। 25 साल तक वह ऊंची दरों पर उससे बिजली खरीदी जाएगी, इससे 10 हजार 832 करोड़ रुपये की चपत लगेगी।

प्रक्रिया पर सवाल
आगरा में बिजली वितरण का काम टोरंट पावर लि. को सौंपे जाने के लिए अपनाई प्रक्रिया, बिड मूल्यांकन और अनुपूरक अनुबंध पर कैग ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

रिपोर्ट कहती है कि इन गड़बड़ियों के चलते दक्षिणांचल बिजली वितरण निगम को मार्च, 2012 तक 421.21 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अगले 18 सालों में यह चपत 4601.12 करोड़ रुपये तक पहुंचेगी।

यूपी पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन द्वारा परियोजनाओं को समय से पूरा न कराने की वजह से लागत में 105.02 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई।

नए उपकेंद्रों के निर्माण में भार का सही आकलन न किए जाने से बाद में क्षमता वृद्धि पर 13.75 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। उपकरणों व सामग्री खरीद में लगभग 22 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा।

यही नहीं टर्नकी (ट्रांसफार्मर समेत उपकेंद्र का का पूरा कार्य) के आधार पर ऊंची दरों पर एग्रीमेंट करके काम कराने तथा टेंडर को दो हिस्सों में बांटने से 158.78 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करना पड़ा।


दो मामलों में कार्पोरेशन ने 63.66 करोड़ रुपये सुपरविजन चार्ज नहीं वसूला। ग्रिड अनुशासन का पालन न करने पर कार्पोरेशन को 9.10 करोड़ रुपये जुर्माना भी भरना पड़ा।

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