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CAG Report : बिजली कंपनियों ने नियम ताक पर रखकर खरीदे ट्रांसफार्मर, कार्रवाई की सिफारिश

Thu, 22 Sep 2022 12:59 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 22 Sep 2022 12:59 AM IST
सार

कैग रिपोर्ट में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा आगरा में बिजली आपूर्ति संभाल रही निजी कंपनी टोरेंट पावर लि. को अनुचित लाभ पहुंचाने का भी खुलासा हुआ है। निगम ने टोरेंट पावर से रेगुलेटरी सरचार्ज 79.90 करोड़ रुपये की कम वसूली की और कम वसूल की गई धनराशि पर 29.97 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान भी वहन किया।

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CAG Report: Electricity companies bought transformers by following rules, action recommended
ट्रांसफार्मर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजली कंपनियों ने ट्रांसफार्मरों की खरीद में जमकर मनमानी की। नियमों को ताक पर रखकर ट्रांसफार्मर खरीदे गए। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) में पंजीकरण की अनिवार्यता की शर्त की अनदेखी करते हुए ऐसी फर्मों के साथ ट्रांसफार्मर खरीदने की अनुबंध किया गया, जिन्होंने सिर्फ इसके लिए आवेदन भर कर रखा था। इसका खुलासा विधानमंडल के दोनों सदनों में रखी गई भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने की सिफारिश भी की गई है। 

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कैग ने मध्यांचल, पूर्वांचल, दक्षिणांचल व पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में वर्ष 2016-17 से 2018-19 के दौरान वितरण ट्रांसफार्मरों की खरीद, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली और मरम्मत का आकलन किया। इस दौरान बिजली कंपनियों ने 2,489.71 करोड़ रुपये के 3,01,336 वितरण ट्रांसफार्मरों की खरीद के लिए 146 निविदाओं तथा मरम्मत के लिए 290.23 करोड़ रुपये की निविदाओं को अंतिम रूप दिया। कैग ने इनमें से 1,67,379 ट्रांसफार्मरों की खरीद की 33 प्रतिशत निविदाओं और 147.73 करोड़ रुपये के मरम्मत की 45 प्रतिशत निविदाओं की समीक्षा की। 
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कैग की रिपोर्ट के मुताबिक निविदाओं की समीक्षा में तमाम अनियमितताएं सामने आईं। जिनमें पूर्व अर्हता शर्तों को पूरा नकरने और टाइप टेस्ट रिपोर्ट न कराने वाली फर्मों से अनुबंध करना प्रमुख है। खासतौर पर बीआईएस प्रमाणपत्र न होते हुए भी फर्मों के साथ ट्रांसफार्मर आपूर्ति का अनुबंध किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। अधिकारियों ने चहेती अपात्र फर्मों को भी करोड़ों रुपये के ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति का ठेका दे दिया। कुछ मामलों में तो यह भी सामने आया कि टेंडर पहले खोल दिए गए और बीआईएस प्रमाणपत्र बाद में दिया गया। यही नहीं प्राइस फॉल बैक क्लॉज लागू करने में विफलता के कारण बिजली कंपनियों को 1.37 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करना पड़ा।
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रिपोर्ट के अनुसार 802.92 करोड़ रुपये के 1,26,205 ट्रांसफार्मरों का आवश्यक गुणवत्ता परीक्षण नहीं कराया गया। लेखा परीक्षा में यह भी सामने आया कि गुणवत्ता परीक्षण में नमूना विफल होने के बावजूद ट्रांसफार्मर खरीद में मेरठ की एक फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। कैग ने ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में भी तमाम अनियमितताओं का खुलासा किया है। मसलन क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों की संख्या मानक से काफी ज्यादा थी और जले हुए ट्रांसफार्मर ऑयल और एल्युमिनियम व कॉपर की वापसी भी निर्धारित मानकों से कम हुई।

दक्षिणांचल विद्युत निगम ने टोरेंट पावर को पहुंचाया अनुचित लाभ
कैग रिपोर्ट में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा आगरा में बिजली आपूर्ति संभाल रही निजी कंपनी टोरेंट पावर लि. को अनुचित लाभ पहुंचाने का भी खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि दक्षिणांचल निगम ने टोरेंट पावर से रेगुलेटरी सरचार्ज 79.90 करोड़ रुपये की कम वसूली की और कम वसूल की गई धनराशि पर 29.97 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान भी वहन किया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दक्षिणांचल में वितरण ट्रांसफार्मरों के  विस्तारित आपूर्ति अवधि के लिए सही मूल्य अंतर का निर्धारण करने में विफलता के कारण आपूर्तिकर्ताओं को 2.03 करोड़ रुपये का ज्यादा भुगतान कर दिया गया। कैग ने आवश्यकता से अधिक शीट मोल्डिंग कंपाउंडिंग (एसएमसी) बाक्सों की खरीद पर भी दक्षिणांचल वितरण निगम को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि 7.86 करोड़ रुपये की औचित्यहीन खरीद की गई। साथ ही 2.12 करोड़ रुपये के ब्याज की हानि उठानी पड़ी।


मध्यांचल में सामानों की औचित्यहीन खरीद
कैग रपोर्ट के अनुसार मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने 7.25 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर प्रोटेक्शन बाक्सों की आौचित्यहीन खरीद की, जो चार वर्षों से अधिक समय के लिए अनुपयोगी रहा। कैग ने राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा कर योग्य लाभ के गलत अनुमान के कारण 6.41 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान की हानि पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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