यूपी में पुलिस व फॉरेंसिक विश्वविद्यालय बनाने को कैबिनेट की मंजूरी, बुंदेलखंड व विंध्य को सौगात
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में पुलिस व फॉरेंसिक विश्वविद्यालय बनाने को मंजूरी दी गई साथ ही बुंदेलखंड व विंध्य क्षेत्र को वाटर पाइप लाइन से पानी पहुंचाने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
बता दें कि 18 फरवरी को पेश किए गए प्रदेश सरकार के बजट में विश्वविद्यालय के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। जल्द ही यह विधेयक विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। इस विश्वविद्यालय के लिए डीजीपी मुख्यालय ने पिछले महीने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। प्रस्ताव में कहा गया है यूपी के 75 जिले 8 जोन और 18 रेंज में बंटे हुए हैं। जीआरपी, प्रशिक्षण जोन, पुलिस प्रशिक्षण संस्थान, 5 फारेंसिक साइंस प्रयोगशालाएं स्थापित हैं और 6 की प्रक्रिया चल रही है। मौजूदा समय में एफएसएल में उपलब्ध जनशक्ति के मुकाबले के परीक्षण के लिए अधिक केस आते हैं, जिससे लंबित मामलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
विश्वविद्यालय खुलने से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों में समन्वय के साथ-साथ फॉरेंसिक साइंस में डिग्री देना संभव हो सकेगा। विश्वविद्यालय में पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, मालद्वीप और श्रीलंका के छात्र फॉरेंसिक साइंस के विभिन्न विषयों में ज्ञान अर्जित कर सकेंगे। इन सभी विषयों के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार, न्याय पालिका, पुलिस, वैज्ञानिक, समाजशास्त्र क्षेत्र के व्यक्ति भी प्रशिक्षण व विशेष अधिनियमों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।
बुंदेलखंड व विंध्यांचल क्षेत्र में 15,722 करोड़ से पहुंचेगा शुद्ध पेयजल
इसके अलावा, कैबिनेट बैठक ने बुंदेलखंड व विंध्य क्षेत्र तथा गुणवत्ता प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 545 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कराई हैं। प्रदेश कैबिनेट ने इनमें से 200 करोड़ से अधिक लागत वाली 13 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की समस्त आबादी तथा आर्सेनिक, फ्लोराइड व जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई)/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से ग्रस्त आबादी को पहले चरण में शुद्ध पाइप पेयजल परियोजना का लाभ देने का फैसला किया है। इसके लिए बुंदेलखंड के सात व विंध्य क्षेत्र के दो समेत कुल नौ जिलों के लिए 545 डीपीआर तैयार कराई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 15,722.89 करोड़ रुपये है। इन सभी डीपीआर को कैबिनेट के समक्ष पेश किया गया था। कैबिनेट ने इनमें से 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 37 परियोजनाओं में से व्यय वित्त समिति से अनुमोदित 13 परियोजनाओं की मूल्यांकित लागत को मंजूरी दे दी है।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी-फारसी विवि भाषा विवि बनेगा
राजधानी स्थित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय भाषा विश्वविद्यालय बनेगा। विवि के नाम में आंशिक परिवर्तन कर ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि करने का निर्णय किया गया है। इसके लिए उप्र. राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 में संशोधन किया जाएगा।
प्रदेश में उर्दू, अरबी एवं फारसी भाषाओं के अलावा हिन्दी, संस्कृत, पाली, प्राकृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं का प्रचलन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन-अध्यापन एवं शोध में शामिल है। सरकार का मानना है कि भारतीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओं में प्रमुख अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाओं का भी अध्ययन, अध्यापन, रोजगार एवं ज्ञान-विज्ञान के विकास में जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विवि लखनऊ का नाम परिवर्तित कर ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ करते हुए इसे भाषा विवि के रूप में एक वैश्विक पहचान प्रदान देने के लिहाज से यह निर्णय किया गया है।
व्यापारियों को मिलेगी बड़ी राहत, बकाया कर के ब्याज पर मिलेगी छूट
वैट, केंद्रीय बिक्री कर, मनोरंजन कर, प्रवेश कर के बकायेदार व्यापारियों को सरकार ने बड़ी राहत देने का फैसला किया है। बकाया कर पर लगाए गए ब्याज में राहत देने के लिए वाणिज्य कर विभाग ‘ब्याज माफी योजना-2020’ लागू करेगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई। इसका आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा। आदेश जारी होने से अगले तीन महीने तक के लिए लागू होने वाली इस योजना के तहत व्यापारियों के बकाया कर पर लगे ब्याज में 10 से लेकर 75 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। योजना के लागू होने से सरकार को जहां 234.57 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है, वहीं सवा तीन लाख से अधिक व्यापारियों को लाभ मिलेगा।
जीएसटी लागू होने के पहले राज्य स्तर पर वैट, केंद्रीय बिक्री कर, मनोरंजन कर, प्रवेश कर लिए जाने की व्यवस्था लागू थी। उसी समय में तमाम व्यापारियों पर कर बकाया रह गया था। जिस पर करोड़ों रुपये का ब्याज और अर्थदंड लगाया गया था। तमाम कोशिशों के बाद भी बकाया कर की वसूली नहीं हो पाने के मद्देनजर सरकार ब्याज माफी योजना लागू करने जा रही है। कैबिनेट के फैसले के बाद शासन के स्तर से आदेश जारी होते ही इस योजना को लागू कर दिया जाएगा। योजना को तीन महीने के लिए लागू किया जाएगा।
योजना के तहत ब्याज माफी के लिए चार स्तरीय छूट देने की व्यवस्था की गई है। इसमें 10 लाख तक के बकाया टैक्स के ब्याज में 75 प्रतिशत की छूट दी जाएगी और 25 प्रतिशत धन जमा करना होगा। इसी तरह 10 लाख से एक करोड़ तक के बकाया कर पर लगे ब्याज में 50 प्रतिशत, एक करोड़ से 5 करोड़ तक के बकायेदारों को ब्याज में 20 प्रतिशत की छूट और पांच करोड़ से अधिक के बकायेदारों को ब्याज राशि में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। साथ ही बकाया राशि पर लगाये गए अर्थदंड में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
ज्वाइंट कमिश्नर (वसूली) देवमणि शर्मा ने बताया कि योजना के तहत गणना के बाद निकली बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान करने पर 5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। योजना को पारदर्शी तरीके से संचालित करने के लिए आवेदन ऑनलाइन ही लिए जाने की व्यवस्था की जाएगी। सभी क्षेत्रीय दफ्तरों में व्यापारियों की मदद के लिए हेल्प डेस्क भी स्थापित की जाएगी।
यूपी फंडामेंटल रूल संशोधन विधेयक लाएगी सरकार
प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मियों के सेवा लाभों से संबंधित खत्म किए गए प्रावधान को नियमावली से हटाने संबंधी यूपी फंडामेंटल रूल-56 ई संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक को विधानमंडल से पारित कराने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यूपी फंडामेंटल रूल्स के मूल नियम-56 संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से वित्तीय हस्तपुस्तिका खंड-2, भाग-2 से 4 के मूल नियम-56 ई में अतिरिक्त प्रावधान जोड़ते हुए यह व्यवस्था की है कि ‘ऐसे सरकारी सेवक जो स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त होते हैं या जिन्हें स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त होने के लिए अनुमति दी जाती है, उन्हें पेंशन व अन्य लाभ के लिए पांच वर्ष अथवा उनकी रिटायरमेंट आयु तक अवशेष सेवा अवधि (दोनों में से जो कम हो) के बराबर ‘अतिरिक्त सेवा’ का लाभ नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया जा सकता है।’
वेतन समिति, 2008 की संस्तुतियों को स्वीकार किए जाने से वित्त विभाग ने आठ दिसंबर 2008 के शासनादेश से पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा की गणना व्यवस्था में ‘अतिरिक्त सेवा’ को खत्म कर दिया। शासनादेश में ही यह प्राविधान किया गया कि संबंधित नियम इसी के मुताबिक संशोधित समझा जाएगा।
सरकार ने आठ दिसंबर, 2008 के प्रावधानों को मूल नियम-56 में संशोधन कर हटाने का फैसला किया है। चूंकि मूल नियम 56 (ई) का अतिरिक्त प्रावधान यूपी फंडामेंटल रूल्स, 56 (संशोधन) अधिनियम 1976 से जोड़ा गया है। ऐसे में मूल नियम 56 (ई) के अतिरिक्त प्रावधान को हटाने के लिए यूपी फंडामेंटल रूल 56 (संशोधन और विधिमान्यकरण), विधेयक 2020 को विधान मंडल से फिर से पारित करवाकर अधिनियमित कराने का निर्णय लिया है।
नई दिल्ली के एक कार्यालय भवन के आंतरिक कार्य को मंजूरी
कैबिनेट ने नई दिल्ली स्थित किदवई नगर पूर्व में लीज पर लिए गए प्रदेश सरकार के कार्यालय भवन की आंतरिक साज-सज्जा का कार्य कराने के लिए स्थानित आयुक्त नई दिल्ली को अधिकृत कर दिया है। काम के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। संबंधित निर्माण कार्य पर 6 करोड़ 36 लाख रुपये व जीएसटी खर्च का अनुमान है। यह काम 2020-21 तक पूरा करने का प्रस्ताव है। इस काम के पूरा होने से नई दिल्ली स्थित प्रदेश सरकार के सभी कार्यालय एक ही स्थान पर स्थापित हो जाएंगे। इससे वर्तमान में प्रतिमाह किराये पर भुगतान किए जा रहे 31,59,263 रुपये की बचत होगी।
बांदा के बबेरू में बस स्टेशन के लिए निशुल्क भूमि देने को मंजूरी
प्रदेश कैबिनेट ने बांदा के बबेरू में बस स्टेशन के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। इसके लिए तहसील मुख्यालय बबेरू पर पुरानी तहसील व परिसर में चिह्नित भूमि परिवहन विभाग को निशुल्क देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
विधान परिषद में लगेंगे ऑटोमेटिक दरवाजे
विधान परिषद के सभा मंडप के बाहर गैलरी, पोर्टिको और तीनों तलों की गैलरी के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण के लिए 3.77 करोड़ रुपये की लागत से काम कराए जाने संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस राशि से फाल्स सीलिंग, टफेंड ग्लास, ऑटोमेटिक डोर यूनिट, मार्बल स्टोर फ्लोरिंग आदि काम होंगे।
विधानमंडल के चालू सत्र में ही राज्य आयुष विश्वविद्यालय, विधेयक लाएगी सरकार
आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथ महाविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम व शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने, पारदर्शिता बनाने, उच्च कोटि की चिकित्सा शिक्षा व शोध कार्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसके लिए सरकार ने राज्य आयुष विश्वविद्यालय, विधेयक 2020 को राज्य विधान मंडल के वर्तमान सत्र में पारित कराकर कानून बनाने का निर्णय लिया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
प्रदेश में आयुष विभाग के अंतर्गत आयुर्वेद निदेशालय में आठ राजकीय, 59 निजी आयुर्वेद महाविद्यालय व चिकित्सालय, यूनानी निदेशालय में दो राजकीय व 13 निजी यूनानी महाविद्यालय व चिकित्सालय तथा होम्योपैथ निदेशालय में नौ राजकीय व तीन निजी होम्योपैथिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय संचालित हैं। ये प्रदेश के अधिकारिता प्राप्त क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। राज्य आयुष विश्वविद्यालय बनने से सभी महाविद्यालयों के एक ही विश्वविद्यालय से संबद्ध होने की वजह से इन महाविद्यालयों में संचालित पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं तय समय में पारदर्शी तरीके से कराई जा सकेगी।
उच्च शिक्षा के सामान्य विश्वविद्यालयों की चिकित्सा क्षेत्र में कोई विशेषज्ञता नहीं होती है। इस कारण वह इन संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रख पाते हैं। इसके अलावा आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथ महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों व इनकी परीक्षा के स्तर में एकरूपता नहीं हो पाती है।
45 दिन में ही मिल जाएगा व्यवसाय संघ का पंजीकरण
प्रदेश सरकार ने व्यवसाय संघ संशोधन विधेयक-2017 को वापस लेने और इसके स्थान पर नया विधेयक पारित कराकर राष्ट्रपति की नए सिरे से मंजूरी लेने का निर्णय किया है। प्रदेश कैबिनेट ने इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए विधेयक में व्यवसाय संघ को पंजीकृत करने की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 45 दिन की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए उद्योगों की आवश्यकताओं व बदलते परिवेश को देखते हुए श्रम कानूनों में बदलाव की पहल की है। इसके अंतर्गत व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 में संशोधन की कार्यवाही करत हुए ट्रेड यूनियन (यूपी संशोधन) विधेयक, 2017 राज्य विधान मंडल से पारित कराया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति के विचार के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया था। इस विधेयक में यह व्यवस्था थी कि ‘रजिस्ट्रीकरण के लिए सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी आवेदन पत्र प्राप्त करने की तिथि से 90 दिन के अंदर व्यवसाय संघ की रजिस्ट्री कर देगा या इंकार करेगा या आपत्ति बताएगा लेकिन केंद्र सरकार ने इस समय सीमा को अधिक बताते हुए इसे 90 दिन के बजाय 45 दिन करने का निर्देश दिया।
अब प्रदेश सरकार ने केंद्र के सुझाव के मुताबिक कार्यवाही करते हुए व्यवसाय संघ (यूपी संशोधन) विधेयक, 2017 केंद्र से वापस लेने तथा इसके स्थान पर रजिस्ट्रीकरण की समय-सीमा 45 दिन करने के लिए व्यवसाय संघ (यूपी संशोधन) विधेयक, 2020 राज्य विधान मंडल से पारित कराकर राष्ट्रपति की अनुमति के लिए संदर्भित करने संबंधी प्रस्ताव को अनुमति दे दी है।
नोएडा भवन नियमावली को मंजूरी, भवन खरीदना होगा महंगा
प्रदेश कैबिनेट ने नवीन ओखला औद्योगिक विकास क्षेत्र भवन (सातवां संशोधन) नियमावली, 2020 व इसकी अधिसूचना जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे वहां भवन खरीदना महंगा हो जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि नोएडा में वर्तमान में यातायात घनत्व व भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति को देखते हुए क्रय योग्य फ्लोर एरिया रेशियो (एफ एआर)को अपेक्षाकृत अधिक दरों पर मंजूर करने के लिए नवीन ओखला औद्योगिक विकास क्षेत्र भवन (सातवां संशोधन) नियमावली, 2020 की अधिसूचना जारी करने की मंजूरी दे दी है।
नोएडा क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता व इस पर होने वाले खर्च को देखते हुए क्रय योग्य एफएआर के फैक्टर को एक समान करते हुए 0.60 किया गया है। इससे प्राधिकरण को अधिक राजस्व मिलेगा जिससे क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।