अब यूपी में कोई भी जमीन ले सकेगी सरकार
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प्रदेश में विकास से जुड़े प्रोजेक्ट में अब जमीन की कमी आड़े नहीं आएगी। प्रदेश सरकार किसी भी जिले में 20 प्रतिशत खेती योग्य बहुफसली जमीन का अधिग्रहण कर सकेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में साल की अंतिम कैबिनेट बैठक में मंगलवार को यह महत्वपूर्ण फैसला हुआ।
इसके अलावा अधिग्रहण व पुनर्वास में विभिन्न स्तर पर आने वाले खर्च के लिए मदवार हिस्सा भी तय कर दिया गया है। भू-अर्जन अधिनियम, 2013 की धारा-10 के तहत खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह शर्त लगाई थी कि अपवाद वाली परिस्थितियों को छोड़कर सिंचित बहुफसली भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।
साथ ही अपवाद वाली स्थितियों में बहुफसली भूमि के अधिग्रहण की किसी जिले की अधिकतम सीमा क्या हो, यह तय करने का अधिकार राज्यों को दिया गया है।
प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को हर जिले के लिए बहुफसली भूमि के अधिग्रहण की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत रखने का फैसला किया। यह सिंचित अथवा कुल बुआई क्षेत्रफल का 20 प्रतिशत होगा।
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार यदि किसी ऐसे स्थान पर विकास के प्रोजेक्ट शुरू करना चाहती है, जहां खेती योग्य जमीनें ज्यादा हैं तो वहां भी 20 फीसदी तक जमीन का अधिग्रहण कर सकेगी।
नहीं तय की गई सीमा
इसमें काश्तकार की व्यक्तिगत कृषि योग्य जमीन लेने की सीमा तय नहीं की गई है क्योंकि यदि कहीं कोई प्रोजेक्ट लगेगा तो वहां किसी काश्तकार की पूरी जमीन जा सकती है तो किसी की आंशिक। ऐसे में इसके लिए पैमाना जिले का बहुफसली व सिंचित क्षेत्रफल ही लिया जाएगा।
भूमि अधिग्रहण पर इस तरह कर सकेंगे खर्च
- भूमि अध्याप्ति इकाई के वेतन व भत्ते आदि में मुआवजे की कुल रकम का तीन प्रतिशत।
- अधिग्रहण के कागजात तैयार करने में मुआवजे का तीन प्रतिशत।
- अधिग्रहण वाली परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के लिए मानदेय आदि पर मुआवजे का 1.5 प्रतिशत।
- पुनर्वास की दृष्टि से सर्वेक्षण के लिए सहायक मशीनरी पर होने वाले मानदेय खर्च में मुआवजे की रकम का 1.5 प्रतिशत
- अधिग्रहण के अन्य आवश्यक खर्च के लिए मुआवजे की कुल रकम का एक प्रतिशत।