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40 लाख की चिल्लर लेकर पहुंचा बैंक, जमा नहीं हुई तो हाईकोर्ट से ली मदद

Sat, 10 Dec 2016 06:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 10 Dec 2016 06:45 PM IST
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business man went to bank with 40 lakhs change money
डेमो प‌िक - फोटो : amar ujala

नोटबंदी के दौर में जहां ज्यादातर लोग खुले पैसों के लिए भटक रहे हैं वहीं एक कारोबारी को 40 लाख के चिल्लर बैंक में जमा कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। बैंकों ने नोटबंदी के बाद काम ज्यादा होने की वजह से पैसे जमा करने से इन्कार कर दिया। 

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बेकरी कारोबारी संदीप आहूजा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका में दायर कर अपने पैसे जमा कराने की गुहार लगाई। मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबासाहेब भोसले और जस्टिस राजन रॉय ने राहत देते हुए बैंकों को निर्देश दिए कि वे कारोबारी के पैसे जमा करें। 
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इसके बाद बैंकों ने एक जनवरी 2017 से हर रोज बैंक कार्य दिवसों में दोपहर तीन से चार बजे के बीच यह रकम पांच-पांच हजार रुपये करके जमा करने पर हामी भरी।

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डीलर देते हैं टूटे पैसे

business man went to bank with 40 lakhs change money
च‌िल्लर - फोटो : amar ujala

याची के अधिवक्ता अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि संदीप आहूजा की ब्रेड और रस्क की ऐशबाग में फैक्ट्री है। फैक्ट्री से जो उत्पादन होता है उसे विभिन्न डीलरों के जरिए बेचा जाता है और डीलर बदले में टूटे पैसे ही लौटाते हैं। ऐसे में उनके पास यह राशि इकट्ठा होती गई। 

इस बीच नोटबंदी की घोषणा कर दी गई और बैंकों में भारी भीड़ पहुंचने लगी। इन हालात में बैंकों के लिए रुपया जमा करना मुश्किल हो गया। इस दौरान उनके पास पैसा और बढ़ते-बढ़ते करीब चालीस लाख रुपये पहुंच गया। यह राशि एक, दो, पांच और 10 रुपये के मूल्य वर्ग में है। उनके इलाहाबाद बैंक की हुसैनगंज शाखा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मिल एरिया ऐशबाग शाखा में खाते हैं। 

वे जब यहां पैसा जमा करवाने जाते हैं तो बैंक स्टाफ इसे लेने से मना कर देता है। ऐसे में उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याचिका में कहा गया है कि यह करेंसी भारत सरकार द्वारा जारी की गई है, और इसे अगर लेने से बैंक ही इन्कार करेंगे तो यह गलत है। उन्‍होंने अपनी याचिका में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल को भी प्रथम प्रतिवादी बनाया है।

बैंकों का तर्क, संभव नहीं

business man went to bank with 40 lakhs change money
डेमो प‌िक - फोटो : डेमो फोटो

दूसरी ओर हाईकोर्ट में बैंकों की ओर से जवाब में कहा गया कि नोट बंदी के बाद शाखाओं में हर रोज बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। स्टाफ के पास बहुत काम है, यहां पांच सौ और हजार के पुराने नोट जमा कराए जा रहे हैं। ऐसे में याची से इतनी बड़ी मात्रा में पैसा लेकर उसे गिनना और जमा करना अभी संभव नहीं है।

आयकर विभाग को भी दें जानकारी
पैसा जमा नहीं कर रहे बैंकों ने हाईकोर्ट से यह भी निवेदन किया कि संदीप आहूजा द्वारा जमा करवाई जा रही इतनी बड़ी रकम के बारे में आयकर विभाग को भी सूचित किया जाना चाहिए। 

बैंकों की ओर से ही हाईकोर्ट में समाधान के तौर पर कहा गया कि याची अगर चाहे तो एक जनवरी 2017 के बाद शाखाओं पर हर रोज आ सकता है। इस दौरान वह पांच हजार रुपये एक बार में लाए। वह दोपहर तीन से चार बजे के बीच जाए। 

तब बैंक स्टाफ इत्मीनान से पैसा गिनकर उसके खाते में जमा कर देगा। इस समाधान पर संदीप आहूजा ने रजामंदी जताई। जिस पर अदालत ने इसी व्यवस्था के अनुसार पैसा जमा कराने के निर्देश दिए। साथ ही कहा है कि इसकी जानकारी आरबीआई और आयकर विभागों को भी दी जाए।

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