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Lucknow News: कैसरबाग बस अड्डे पर सस्ता व किफायती खाना बंद, यात्री व कर्मचारी परेशान
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रोडवेज का कैफेटेरिया चार साल से बंद, यात्रियों को परेशानी
नहीं मिल रही सुविधा, रोडवेज को भी पौने दो करोड़ का नुकसान
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। कैसरबाग बस अड्डे पर यात्री सुविधाओं को लेकर संजीदगी नहीं बरती जा रही है। यही वजह है कि चार साल से कैफेटेरिया बंद पड़ा है। यहां यात्रियों को सस्ता व किफायती खाना मिलता था। इतना ही नहीं कैफेटेरिया बंद होने से रोडवेज को भी करीब पाैने दो करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
रोडवेज के कैसरबाग बस अड्डे से प्रतिदिन 700 से अधिक बसों का संचालन होता है। यहां से लखीमपुर, सीतापुर, बरेली, हरदोई, उत्तराखंड सहित 30 से अधिक गंतव्यों के लिए बसों का संचालन होता है। बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं, लेकिन यहां खानपान की सुविधाएं यात्रियों को नहीं मिल रही हैं। रोडवेज का कैफेटेरिया बस अड्डे पर बना है, लेकिन वह अधिकारियों की लापरवाही के चलते पिछले चार साल से बंद पड़ा हुआ है। यात्रियों को बस अड्डे पर अनिवार्य रूप से मिलने वाली कई सुविधाएं नदारत हैं। यात्रियों को बस अड्डे के रेस्टोरेंट में सस्ते में मिलने वाली 40 रुपये थाली खानपान की सुविधा बंद हो गई है। रोडवेज प्रशासन की इस लापरवाही से जहां यात्रियों को मंहगें दामों में खाना मिल रहा है।
1.75 करोड़ का रोडवेज को नुकसान
यात्रियों को होने वाली दिक्कतों के अतिरिक्त रोडवेज को भी भारी चपत लग रही है। कैफेटेरिया बंद होने से प्रतिमाह करीब चार लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। चार सालों में पौने दो करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है। बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही थम नहीं रही है।
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मनमानी दरों पर बेच रहे सामान
इतना ही नहीं कैसरबाग बस अड्डे के बाहर मनमाने दाम पर खाना बेचा जा रहा है, जिसे खाने के लिए यात्री मजबूर हैं। जबकि कैफेटेरिया में यात्री, ड्राइवर-कंडक्टर को 40 रुपये में थाली मिल जाती थी। बस अड्डे पर रोजाना 12 से 15 हजार यात्री व क्रू मैंबर परेशान हो रहे हैं।
आधिकारिक वर्जन
कैसरबाग बस अड्डे के कैफेटेरिया को चलाने के लिए मेसर्स सोहम सेवा प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया गया था। लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका। मामला परिवहन निगम मुख्यालय से जुड़ा है। ऐसे में मुख्यालय से जो भी फैसला आएगा, उसके अनुरूप कार्रवाई होगी।
-विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज
नहीं मिल रही सुविधा, रोडवेज को भी पौने दो करोड़ का नुकसान
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। कैसरबाग बस अड्डे पर यात्री सुविधाओं को लेकर संजीदगी नहीं बरती जा रही है। यही वजह है कि चार साल से कैफेटेरिया बंद पड़ा है। यहां यात्रियों को सस्ता व किफायती खाना मिलता था। इतना ही नहीं कैफेटेरिया बंद होने से रोडवेज को भी करीब पाैने दो करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
रोडवेज के कैसरबाग बस अड्डे से प्रतिदिन 700 से अधिक बसों का संचालन होता है। यहां से लखीमपुर, सीतापुर, बरेली, हरदोई, उत्तराखंड सहित 30 से अधिक गंतव्यों के लिए बसों का संचालन होता है। बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं, लेकिन यहां खानपान की सुविधाएं यात्रियों को नहीं मिल रही हैं। रोडवेज का कैफेटेरिया बस अड्डे पर बना है, लेकिन वह अधिकारियों की लापरवाही के चलते पिछले चार साल से बंद पड़ा हुआ है। यात्रियों को बस अड्डे पर अनिवार्य रूप से मिलने वाली कई सुविधाएं नदारत हैं। यात्रियों को बस अड्डे के रेस्टोरेंट में सस्ते में मिलने वाली 40 रुपये थाली खानपान की सुविधा बंद हो गई है। रोडवेज प्रशासन की इस लापरवाही से जहां यात्रियों को मंहगें दामों में खाना मिल रहा है।
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1.75 करोड़ का रोडवेज को नुकसान
यात्रियों को होने वाली दिक्कतों के अतिरिक्त रोडवेज को भी भारी चपत लग रही है। कैफेटेरिया बंद होने से प्रतिमाह करीब चार लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। चार सालों में पौने दो करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है। बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही थम नहीं रही है।
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मनमानी दरों पर बेच रहे सामान
इतना ही नहीं कैसरबाग बस अड्डे के बाहर मनमाने दाम पर खाना बेचा जा रहा है, जिसे खाने के लिए यात्री मजबूर हैं। जबकि कैफेटेरिया में यात्री, ड्राइवर-कंडक्टर को 40 रुपये में थाली मिल जाती थी। बस अड्डे पर रोजाना 12 से 15 हजार यात्री व क्रू मैंबर परेशान हो रहे हैं।
आधिकारिक वर्जन
कैसरबाग बस अड्डे के कैफेटेरिया को चलाने के लिए मेसर्स सोहम सेवा प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया गया था। लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका। मामला परिवहन निगम मुख्यालय से जुड़ा है। ऐसे में मुख्यालय से जो भी फैसला आएगा, उसके अनुरूप कार्रवाई होगी।
-विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज