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Lucknow News: भवन खड़े, बेड लगे...फिर भी इलाज के इंतजार में मरीज

Mon, 07 Sep 2026 02:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Mon, 07 Sep 2026 02:28 AM IST
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Buildings stand ready, beds are in place... yet patients wait for treatment
लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों के भवन तो तैयार करा रहा है लेकिन संसाधनों और स्टाफ के अभाव में इनमें मरीजों को पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है। राजधानी में कई अस्पताल वर्षों से अधूरे संचालन की स्थिति में हैं। कहीं सिर्फ ओपीडी चल रही है तो कहीं इमरजेंसी तक शुरू नहीं हो सकी है। फैजुल्लागंज का 50 बेड अस्पताल अब भी बंद है, जबकि जानकीपुरम ट्रॉमा सेंटर में जरूरी जांच सुविधाओं का अभाव है।
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एमसीएच विंग में अब तक भर्ती नहीं
गोसाईंगंज और काकोरी में कोविड से पहले करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से 50-50 बेड की मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग बनाई गई थीं। दिसंबर 2025 में काकोरी में सात और गोसाईंगंज में दो डॉक्टर तैनात किए गए। दोनों जगह 50-50 बेड भी तैयार हैं लेकिन अब तक सिर्फ ओपीडी चल रही है। भर्ती और इमरजेंसी सेवा शुरू नहीं हो सकी है।
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डॉक्टर हैं, फिर भी इमरजेंसी ठप
मोहनलालगंज और मलिहाबाद में 30-30 बेड की एमसीएच विंग तैयार है। दोनों जगह पर बेड इंस्टॉल कर दिए गए हैं। मोहनलालगंज में बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अफसर और एनेस्थीसिया के डॉक्टर तैनात हैं। मलिहाबाद में भी डॉक्टर उपलब्ध हैं। इसके बावजूद दोनों जगह इमरजेंसी शुरू नहीं हुई। मलिहाबाद सीएचसी प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि एमसीएच विंग तक जाने वाला रास्ता संकरा है। एंबुलेंस के पहुंचने में दिक्कत होती है। इस संबंध में पत्राचार किया गया है। मोहनलालगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. दिवाकर भारद्वाज ने बताया कि डॉक्टर और स्टाफ अभी पूरा नहीं है, इसलिए फिलहाल ओपीडी चल रही है।
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फैजुल्लागंज अस्पताल में ताला
करीब पांच लाख की आबादी वाले फैजुल्लागंज में 50 बेड का अस्पताल तैयार है लेकिन तीन महीने से अधिक समय बाद भी शुरू नहीं हो सका है। यहां मरीजों को भर्ती के लिए आठ से दस किलोमीटर दूर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। सीएमओ के मुताबिक डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण अस्पताल शुरू नहीं किया जा सका।
चार वर्ष बाद भी जानकीपुरम ट्रॉमा सेंटर अधूरा
जानकीपुरम ट्रॉमा सेंटर शुरू हुए चार वर्ष हो चुके हैं लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। एक्सरे भी दोपहर बाद बंद हो जाता है। नौ विशेषज्ञ पदों की जगह तीन ही तैनात हैं। दो इमरजेंसी मेडिकल अफसर जरूर हैं लेकिन जरूरी सुविधाओं और विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को इलाज व जांच के लिए दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ रहा है।


जिन अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा शुरू नहीं हुई है उन्हें चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है। फैजुल्लागंज अस्पताल के लिए डॉक्टरों की मांग शासन से की गई है। -डाॅ. एनबी सिंह, सीएमओ
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