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संरक्षित क्षेत्र में बिना पुरातत्व एनओसी के बनी पूर्व सांसद की बिल्डिंग
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पूर्व सांसद दाउद अहमद।
- फोटो : ??? ?????
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रेजीडेंसी के पास बन रही पूर्व सांसद दाउद अहमद की बिल्डिंग जांच में संरक्षित क्षेत्र में मिली है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने जांच के बाद एलडीए को भी इसकी सूचना भेज दी है।
ताकि पूर्व में स्वीकृत मानचित्र को निरस्त किया जा सके। जांच में संरक्षित इमारत से 123 मीटर दूरी पर यह निर्माण मिला है। एलडीए ने भी अब नक्शा निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
एएसआई के नियमों के मुताबिक, संरक्षित इमारत के 100 मीटर के दायरे में कोई नया निर्माण नहीं किया जा सकता है। वहीं, 200 मीटर के दायरे में पुरातत्व एनओसी की जरूरत होती है।
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इसके बावजूद यह निर्माण संरक्षित क्षेत्र में हो गया। एलडीए ने यहां चार मंजिल का मानचित्र भी स्वीकृत किया हुआ है।
पांचवीं मंजिल के अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई एलडीए के शुरू करने के बाद पुरातत्व एनओसी का विवाद सामने आया।
एलडीए सचिव पवन गंगवार ने प्रवर्तन जोन-6 को इसकी जांच का आदेश दिया। प्रवर्तन जोन-6 और एएसआई की रिपोर्ट में सामने आया है कि बिल्डिंग केवल 123 मीटर दूर है।
सचिव ने मानचित्र सेल को स्वीकृत नक्शा निरस्त करने को कहा है। एलडीए पूर्व सांसद को नोटिस जारी करेगा।
सत्येंद्र सिंह के कार्यकाल में स्वीकृत हुआ नक्शा
पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह के कार्यकाल में बसपा के पूर्व सांसद दाउद अहमद का यह नक्शा भूखंड संख्या 203/027 नबीउल्लाह रोड पर स्वीकृत हुआ। 30 जनवरी 2017 को स्वीकृत मानचित्र के लिए संरक्षित क्षेत्र में होने के बाद भी पुरातत्व एनओसी नहीं ली गई। 2019 में निर्माण होने पर एएसआई ने इसे रुकवाने के लिए मंडलायुक्त और पुलिस को पत्र भेजा। फिर भी बिल्डिंग पांच मंजिल तक बन गई।
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ताकि पूर्व में स्वीकृत मानचित्र को निरस्त किया जा सके। जांच में संरक्षित इमारत से 123 मीटर दूरी पर यह निर्माण मिला है। एलडीए ने भी अब नक्शा निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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एएसआई के नियमों के मुताबिक, संरक्षित इमारत के 100 मीटर के दायरे में कोई नया निर्माण नहीं किया जा सकता है। वहीं, 200 मीटर के दायरे में पुरातत्व एनओसी की जरूरत होती है।
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इसके बावजूद यह निर्माण संरक्षित क्षेत्र में हो गया। एलडीए ने यहां चार मंजिल का मानचित्र भी स्वीकृत किया हुआ है।
पांचवीं मंजिल के अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई एलडीए के शुरू करने के बाद पुरातत्व एनओसी का विवाद सामने आया।
एलडीए सचिव पवन गंगवार ने प्रवर्तन जोन-6 को इसकी जांच का आदेश दिया। प्रवर्तन जोन-6 और एएसआई की रिपोर्ट में सामने आया है कि बिल्डिंग केवल 123 मीटर दूर है।
सचिव ने मानचित्र सेल को स्वीकृत नक्शा निरस्त करने को कहा है। एलडीए पूर्व सांसद को नोटिस जारी करेगा।
सत्येंद्र सिंह के कार्यकाल में स्वीकृत हुआ नक्शा
पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह के कार्यकाल में बसपा के पूर्व सांसद दाउद अहमद का यह नक्शा भूखंड संख्या 203/027 नबीउल्लाह रोड पर स्वीकृत हुआ। 30 जनवरी 2017 को स्वीकृत मानचित्र के लिए संरक्षित क्षेत्र में होने के बाद भी पुरातत्व एनओसी नहीं ली गई। 2019 में निर्माण होने पर एएसआई ने इसे रुकवाने के लिए मंडलायुक्त और पुलिस को पत्र भेजा। फिर भी बिल्डिंग पांच मंजिल तक बन गई।