लखनऊ में बनेंगी ऐसी इमारतें जिन्हे भूकंप भी नहीं गिरा पाएगा
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भूकंप के झटकों से दहशत में आई राज्य सरकार अब प्रदेश में ऐसे अपार्टमेंट व भवनों को बनाने की ही इजाजत देगी जो इसके झटकों को झेल सकें। निजी विकासकर्ताओं की मनमानी पर नकेल लगाने पर विकास प्राधिकरण लापरवाही नहीं बरत पाएंगे।
बड़े भवनों व अपार्टमेंट के निर्माण में नेशनल बिल्डिंग कोड का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों की बैठक में यह निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने सोमवार को प्रदेशभर के विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों, मंडलायुक्तों व विभागीय अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इसमें चर्चा तो की जानी थी समाजवादी आवास बनाने और इसके लक्ष्य की, मगर चर्चा शुरू हुई तो शनिवार व रविवार को आए भूकंप की अनदेखी नहीं की जा सकी।
भूकंपरोधी भवनों को ही मिलेगी इजाजत
प्रमुख सचिव ने कहा कि विकास प्राधिकरण शहरों में ऐसे भवनों को ही बनाने की इजाजत दें, जो भूकंप के झटकों को झेल सकें। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों से कहा कि वर्ष 2008 में सुरक्षित भवनों के निर्माण के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया गया था।
तय किया गया कि सभी विकास प्राधिकरण और व आवास विकास परिषद 12 मीटर से ऊंचे व 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनने वाले भवनों या अपार्टमेंट के निर्माण में नेशनल बिल्डिंग कोड का कड़ाई से पालन कराएंगे, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।
शहरों में आबादी बढ़ने के साथ अपार्टमेंट कल्चर तेजी से बढ़ा, मगर अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने में विकास प्राधिकरण फेल साबित हुए। उन्होंने निर्देश दिया कि विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष नियमों का कड़ाई से पालन कराएंगे।
लगातार दो दिन आए भूकंप से घबराया आवास विभाग अब भूकंप रोधी भवनों को बनाने के संबंध में जारी आदेशों का नए सिरे से अध्ययन करेगा। इसके लिए उच्चाधिकारियों की कमेटी बनाई जाएगी। जरूरत के आधार पर नया कानून बनाने के लिए भवन निर्माण संबंधी अधिनियम में संशोधन भी किया जाएगा।
जांच-परख कर खरीदें मकान
प्रमुख सचिव ने विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे जनता से अपील करें कि मकान खरीदते समय मानकों की जांच-पड़ताल जरूर करें। निजी विकासकर्ता से मकान लेने से पहले लेआउट और प्लान के बारे में जरूर जानकारी लें।
हकीकत परखने के लिए विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से संपर्क भी कर सकते हैं। विकास प्राधिकरणों में इसके लिए अलग से एक सेल बनाने पर भी विचार चल रहा है जिससे आम लोगों के साथ बिल्डर धोखाधड़ी न कर पाएं।
अपार्टमेंट बनाने से पहले नक्शा पास करवाने के लिए विकास प्राधिकरण में प्लान जमा करना होता है। इसके बाद नगर निकाय, जल संस्थान व फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। नियमत: सभी विभागों को मानक और शर्तों का परीक्षण कराने के बाद ही अनापत्ति प्रमाण पत्र देना चाहिए, लेकिन अमूमन शर्तों की अनदेखी कर इसे जारी कर दिया जाता है।