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आरडब्ल्यूए ने संवारी झील, बिल्डर ने बर्बाद कर दी
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बिल्डर ने निजी टाउनशिप में बनी झील सुखा दी।
- फोटो : ??? ?????
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अतुल भारद्वाज
बिजनौर रोड एक निजी टाउनशिप में आरडब्ल्यूए और स्थानीय लोगों ने एक झील को संवारा। बिल्डर कंपनी के बनाए एसटीपी से शोधन के बाद निकलने वाली पानी से इसे लबालब रखा जाता था।
इसमें जलीय जीव भी आसरा पाए। अब बिल्डर कंपनी ने एसटीपी बंद कर दिया तो जहां झील सूख गई है, वहीं सीवर का पानी भी बिना शोधन के नगर निगम के नाले में डालकर प्रदूषण फैला रही है।
आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी और बीबीएयू में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. वेंकटेश दत्ता का कहना है कि तीन साल पहले टाउनशिप के अंदर करीब साढ़े छह हेक्टेयर में झील में भरपूर पानी था।
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अब इसे बिल्डर ने पूरी तरह सुखा दिया है। पहले तो झील के पानी को पंप कर निकाल दिया गया। वहीं एसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी को भी अब झील में नहीं आने दिया जा रहा है।
आरडब्ल्यूए के लोगों ने जब एसटीपी पर जाकर देखा तो वह बंद मिला। इसे चलाने के उलट पूरे सीवर को एक पाइप लाइन से नगर निगम के नजदीक के नाले में डाला जाता मिला। इसके लिए भूमिगत लाइन भी एसटीपी से लेकर नाले तक बनाई गई है।
बर्बाद हो गया झील का ईको सिस्टम
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले झील में सालभर पानी रहता था। इससे इस क्षेत्र का भूजल भी रीचार्ज होता था। पांच साल पहले झील का पुनरुद्धार भी कराया गया था। इसमें पर्यावरणविद् डॉ. दत्ता ने तकनीकी सहयोग दिया था। जनसहयोग से करीब 400 पीपल, पाकड़ और बरगद समेत अन्य पेड़ यहां विकसित हो चुके थे। इनमें से भी अधिकांश पेड़ काटे जा चुके हैं। झील में मछलियां और क छुए के अलावा पक्षियों का बसेरा हुआ करता था। इससे पूरे क्षेत्र की जैव विविधता विकसित हुई थी।
चार हजार लाख लीटर पानी को पंप कर बहा दिया
लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने एसटीपी व सीवर लाइन के मरम्मत के नाम पर झील को बर्बाद किया है। इस दौरान बिल्डर कंपनी के लोग एसटीपी की क्षमता बढ़ाने, कलेक्शन टैंक बनाने की बात कहते रहे। कलेक्शन टैंक बनाने के नाम पर करीब झील का चार हजार लाख लीटर पानी को पंप कर बहा दिया। अब यहां दोबारा पानी नहीं डाला जा रहा है। किसी को पता न लगे। इस वजह से सीवर का गंदा पानी रात में गिराया जाता है। एसटीपी संचालन का खर्च कम रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
बिल्डर कंपनी को पिछले दिनों नोटिस दिया गया था। उस समय बिल्डर का जवाब आया था कि मरम्मत का काम चल रहा है। इसे जल्दी ही सुचारु कर दिया जाएगा। सीवर नाले में गिराए जाने और एसटीपी बंद होने की दोबारा जांच कराएंगे। ताकि आगे की विधिक कार्रवाई हो सके।
- कै लाश गुप्ता, सचिव, जलकल
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बिजनौर रोड एक निजी टाउनशिप में आरडब्ल्यूए और स्थानीय लोगों ने एक झील को संवारा। बिल्डर कंपनी के बनाए एसटीपी से शोधन के बाद निकलने वाली पानी से इसे लबालब रखा जाता था।
इसमें जलीय जीव भी आसरा पाए। अब बिल्डर कंपनी ने एसटीपी बंद कर दिया तो जहां झील सूख गई है, वहीं सीवर का पानी भी बिना शोधन के नगर निगम के नाले में डालकर प्रदूषण फैला रही है।
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आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी और बीबीएयू में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. वेंकटेश दत्ता का कहना है कि तीन साल पहले टाउनशिप के अंदर करीब साढ़े छह हेक्टेयर में झील में भरपूर पानी था।
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अब इसे बिल्डर ने पूरी तरह सुखा दिया है। पहले तो झील के पानी को पंप कर निकाल दिया गया। वहीं एसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी को भी अब झील में नहीं आने दिया जा रहा है।
आरडब्ल्यूए के लोगों ने जब एसटीपी पर जाकर देखा तो वह बंद मिला। इसे चलाने के उलट पूरे सीवर को एक पाइप लाइन से नगर निगम के नजदीक के नाले में डाला जाता मिला। इसके लिए भूमिगत लाइन भी एसटीपी से लेकर नाले तक बनाई गई है।
बर्बाद हो गया झील का ईको सिस्टम
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले झील में सालभर पानी रहता था। इससे इस क्षेत्र का भूजल भी रीचार्ज होता था। पांच साल पहले झील का पुनरुद्धार भी कराया गया था। इसमें पर्यावरणविद् डॉ. दत्ता ने तकनीकी सहयोग दिया था। जनसहयोग से करीब 400 पीपल, पाकड़ और बरगद समेत अन्य पेड़ यहां विकसित हो चुके थे। इनमें से भी अधिकांश पेड़ काटे जा चुके हैं। झील में मछलियां और क छुए के अलावा पक्षियों का बसेरा हुआ करता था। इससे पूरे क्षेत्र की जैव विविधता विकसित हुई थी।
चार हजार लाख लीटर पानी को पंप कर बहा दिया
लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने एसटीपी व सीवर लाइन के मरम्मत के नाम पर झील को बर्बाद किया है। इस दौरान बिल्डर कंपनी के लोग एसटीपी की क्षमता बढ़ाने, कलेक्शन टैंक बनाने की बात कहते रहे। कलेक्शन टैंक बनाने के नाम पर करीब झील का चार हजार लाख लीटर पानी को पंप कर बहा दिया। अब यहां दोबारा पानी नहीं डाला जा रहा है। किसी को पता न लगे। इस वजह से सीवर का गंदा पानी रात में गिराया जाता है। एसटीपी संचालन का खर्च कम रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
बिल्डर कंपनी को पिछले दिनों नोटिस दिया गया था। उस समय बिल्डर का जवाब आया था कि मरम्मत का काम चल रहा है। इसे जल्दी ही सुचारु कर दिया जाएगा। सीवर नाले में गिराए जाने और एसटीपी बंद होने की दोबारा जांच कराएंगे। ताकि आगे की विधिक कार्रवाई हो सके।
- कै लाश गुप्ता, सचिव, जलकल