बजट सत्र कल से, तैयारियों में जुटे सियासी दल, सीएए का मुद्दा भी गूंजेगा
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भले ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) केंद्र सरकार का कानून हो, लेकिन इस मामले के यहां भी बजट सत्र में छाए रहने की पूरी संभावना है। जिस तरह पिछले दिनों इस कानून के विरोध में राजधानी सहित प्रदेश के कई जिलों में आंदोलन में हिंसा हुई, कुछ स्थानों पर लोगों की मौतें हुईं।
साथ ही राजधानी में पिछले कई दिनों से धरना चल रहा है, इसे देखते हुए विपक्ष किसी न किसी रूप में इस मुद्दे को उठाकर सदन में भाजपा सरकार पर हमला बोलने की कोशिश करेगा। सरकार की तरफ से भी इस मुद्दे पर विपक्ष के हमलों का जवाब देने की कोशिश होगी।
बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा भी कि सीएए के खिलाफ हुए आंदोलन में पुलिस व प्रशासन ने जगह-जगह ज्यादती की है। लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन पुलिस ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिससे कुछ लोगों की मौत भी हुई।
इन मुद्दों पर भी ध्यान
सीएए के खिलाफ आंदोलन करने वालों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर प्रताड़ित किया जा रहा है। सपा और कांग्रेस नेता भी सीएए पर भाजपा का विरोध करते रहे हैं। अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदेश में कई स्थानों पर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है। जाहिर है कि सपा व कांग्रेस भी सदन में इस मामले में सरकार को घेरेंगी।
विपक्ष की तरफ से गन्ना किसानों का बकाया भुगतान, बिजली दरों में बढ़ोतरी, कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटनाएं भी सरकार को घेरने का हथियार बनेंगी। बसपा विधानमंडल दल नेता लालजी वर्मा, सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ कहते हैं कि प्रदेश सरकार ने किसानों को पंद्रह दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान कराने का वादा किया था।
पर, किसानों का हजारों करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया है। गन्ने की खरीद नहीं हो रही, किसानों को पर्ची नहीं मिल रही है। धान खरीद नहीं होने से भी किसान परेशान हैं। इन सब मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा।
भाजपा की भी जवाबी तैयारी
सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के तेवरों को देखते हुए हमलों का जवाब देने की रणनीति बनाने के लिए बुधवार शाम 5 बजे लोकभवन में पार्टी विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक, बजट सत्र के मद्देनजर सदस्यों को सदन में मौजूद रहने और अनुशासन में रहकर विरोधी दलों का जवाब देने की रणनीति तैयार होगी।
सचेतकों के माध्यम से सदस्यों को संयम में रहकर विरोधी दलों का जवाब देने को कहा जाएगा। साथ ही बजट केे समर्थन में विपक्ष के सवालों का जवाब देने और राज्यपाल के अभिभाषण तथा बजट पर चर्चा के सहारे सरकार की नीतियों को सदन में रखने की रणनीति बनेगी।
बजट 18 को होगा पेश
वर्ष का पहला सत्र होने के कारण इसमें राज्यपाल का अभिभाषण भी होना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे विधानसभा में दोनों सदनों के सदस्यों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगी। वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट 18 फरवरी को रखा जाएगा।