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नगर निगम: हंगामे के बीच बिना चर्चा ही बजट पास
प्रवेंद्र गुप्ता/अमर उजाला,लखनऊ
Updated Wed, 29 Jan 2014 09:33 AM IST
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हंगामे के बीच बिना चर्चा के ही नगर निगम का पुनरीक्षित बजट मंगलवार को सदन में पास हो गया। यह पहला मौका है जब बजट पर कोई चर्चा नहीं हुई।
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दोपहर करीब डेढ़ बजे माइक खराब होने से नाराज सपा व कांग्रेस के अधिकांश पार्षद हंगामा सदन से बाहर चले गए। इसके बाद भाजपा व अन्य पार्षदों ने 15.04 अरब रुपये का पुनरीक्षित बजट पास कर दिया।
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चालू वित्तीय वर्ष 2013-14 में नगर निगम सदन ने 11.26 अरब रुपये का मूल बजट मंजूर किया था। इसमें आमदनी व खर्च को देखते हुए 3.78 अरब रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है।
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कांग्रेस पार्षद दल के उप नेता ने फाड़ा बजट
बजट पर चर्चा न कराए जाने से नाराज कांग्रेस पार्षद दल के उप नेता मुकेश सिंह चौहान ने सदन में बजट की कॉपी फाड़कर अध्यक्ष के आसन के पास फेंक दी। इनका कहना था कि बिना चर्चा के ही बजट को पास करना गलत है।
वहीं दूसरी ओर सीवर सफाई के ठेका व्यवस्था मे धांधली को लेकर नगर निगम सदन में पार्षदों ने खूब हंगामा किया। सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू, कांग्रेस पार्षद प्रदीप कनौजिया और सपा पार्षद रुद्र प्रताप ने जलकल अभियंताओं की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीवर सफाई के नाम पर घोटाला किया जा रहा है।
दो जेटिंग मशीनें खरीदी जाएंगी
नगर निगम जोन पांच व जोन छह में सीवर सफाई के लिए दो जेटिंग मशीन खरीदेगा। इसकी मंजूरी सदन ने दे दी।
महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण सीवर सफाई का काम बाधित होता है इसलिए दो नई जेटिंग मशीन खरीदी जाएंगी।
इसी तरह डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन और कचरा निस्तारण प्लांट का काम करने वाली निजी कंपनी ज्योति एन्वायरोटेक के कामकाज पर सदन में खूब हंगामा हुआ। सपा, कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने कहा कि कचरा निस्तारण प्लांट दो साल से अभी तक शुरू नहीं हो पाया।
उसके बाद भी जनता से यूजर चार्ज वसूल किया जा रहा है जबकि निजी कंपनी शहर के अंदर ही कूड़ा डम्प करती है। निजी कंपनी के काम करने के बाद न तो नगर निगम के खर्च में कमी आई और न ही कर्मचारियों की तैनाती में। ऐसे में कंपनी से फायदा क्या है।
किस मद में हुई कितनी बढ़ोतरी
मार्ग प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 2.50 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। क्षतिग्रस्त सड़कों का ठीक करने के लिए मूल बजट के प्राविधान को बढ़ाकर 75 करोड़ कर दिया गया है।
इस वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने नई सड़कों के लिए 10 करोड़ रुपये का प्राविधान किया था। यातायात सुधार को लेकर पुनरीक्षित बजट में जोर दिया गया है और बजट को एक करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ कर दिया गया है।
सफाई कर्मियों की कमी के चलते पटरी से उतरी सफाई व्यवस्था को ठीक करने के लिए नगर निगम ने ठेके पर सफाई कराने का खर्च पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं।
पार्कों की मरम्मत व रखरखाव के लिए बजट को अब 11 करोड़ कर दिया गया है। शिक्षा खर्च का बजट दो करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया है।
नगर निगम अधिकारियों की गाड़ियों, कचरा निस्तारण की गाड़ियों, नाला सफाई की गाड़ियों और फागिंग पर डीजल पेट्रोल के खर्च मद में 7 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी की गई।
नगर निगम में करीब छह हजार कर्मचारी हैं। इनके वेतन भत्ते व रिटायर्ड कर्मचारियों पर होने वाले खर्च में 36.30 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी गई है।