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चिकित्सा संस्थानों को अत्याधुनिक उपकरणों के लिए अतिरिक्त बजट की उम्मीद

Mon, 22 Feb 2021 01:49 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Feb 2021 01:49 AM IST
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चिकित्सा संस्‍थानों को उपकरणों के लिए अतिरिक्त बजट की आस।
लखनऊ। प्रदेश सरकार के बजट में इस बार राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में गरीबों के इलाज के लिए अतिरिक्त सहूलियत मिलने की उम्मीद है। चिकित्सा संस्थानों ने असाध्य रोग मद का बजट बढ़ाने और विभिन्न सुपर स्पेशिएलिटी सर्जरी से जुड़े अत्याधुनिक उपकरणों के लिए प्रस्ताव भेजा है। केजीएमयू को रोबोटिक सर्जरी के लिए बजट मिलने की उम्मीद है तो लोहिया संस्थान को न्यूरोसाइंस सेंटर और एसजीपीजीआई को ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए भरपूर बजट मिलने की उम्मीद है।
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स्वास्थ्य विभाग राजधानी के आउटर इलाके में हाईवे पर ट्रॉमा सेंटर के लिए आशान्वित है। इसके साथ आठ सीएचसी के उच्चीकरण, अल्ट्रासाउंड मशीनों एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त आवास का बजट मिलने की उम्मीद है। विभाग ने पिछले साल की अपेक्षा करीब 150 करोड़ अतिरिक्त धन राशि का प्रस्ताव भेजा है। बलरामपुर अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी लैब, सुपर स्पेशिएलिटी विंग के ऑपरेशन थिएटर के आधुनिकीकरण के लिए बजट तो सिविल अस्पताल को ट्रामा सेंटर के लिए बजट में अतिरिक्त धनराशि की उम्मीद है।
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केजीएमयू को रोबोट एवं संक्रामक अस्पताल की दरकार
केजीएमयू को सुपर स्पेशिएलिटी विभाग की सर्जरी के लिए रोबोट खरीदने के लिए अतिरिक्त बजट चाहिए। इसी तरह संक्रामक अस्पताल, थोरेसिक सर्जरी, लिवर ट्रांसप्लांट के लिए भी बजट मिलने की उम्मीद है। रिक्त पदों को भरे जाने से बढ़ने वाले खर्च के लिए वेतन मद में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले साल कुल बजट 919 करोड़ का था।
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बजट तय करेगा, एक रुपये के पर्चे पर इलाज मिलेगा या नहीं
लोहिया संस्थान के लिए यह बजट कई मामले में अहम है। दोनों संस्थानों के विलय के बाद इस बार यदि बजट में कटौती हुई तो एक रुपये के पर्चे पर मिलने वाला इलाज बंद हो सकता है। यहां हॉस्पिटल ब्लॉक में अभी एक रुपये के पर्चे पर इलाज के साथ जांच व दवाएं भी निशुल्क मिल रही हैं। सूत्र बताते हैं कि इस व्यवस्था को चलाने के लिए संस्थान प्रशासन ने करीब 500 करोड़ के अतिरिक्त बजट की मांग की है। इसमें कटौती हुई तो गरीबों के इलाज पर पाबंदी लग सकती है। इसी तरह अभी तक इमरजेंसी में आने वाले न्यूरो सर्जरी के मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। रात में ऐसे मरीजों को केजीएमयू या एसजीपीजीआई रेफर कर दिया जाता है। इस व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए न्यूरोसाइंस सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। संस्थान को उम्मीद है कि इस बार न्यूरोसाइंस सेंटर, गामा नाइफ आदि के लिए बजट मिलेगा।

ऑर्गन ट्रांसप्लांट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
एसजीपीजीआई को ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मामले में पूरे प्रदेश के समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहां नए सिरे से लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारी है। किडनी ट्रांसप्लांट चल रहा है। भविष्य में हार्ट ट्रांसप्लांट भी होना है। संस्थान को अभी तक करीब 820 करोड़ का बजट मिलता रहा है।
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