बुद्धेश्वर मंदिर: क्यों चढ़ाएं बुधवार को शिवलिंग पर जल
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बाबा भोलेनाथ की पूजा-आराधना के लिए वैसे तो सोमवार का विशेष महत्व होता है, लेकिन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में बुधवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है।
इसका पुण्य तब और बढ़ जाता है, जब बुधवार सावन का हो। इस ऐतिहासिक मंदिर पर लगने वाला मेला भी बहुत भव्य और शानदार होता है, जहां आसपास के ग्रामीण अंचलों से सैकड़ों की संख्या में शिव भक्त दर्शन करने आते हैं।
बुद्घेश्वर महादेव मंदिर में सावन के पहले बुधवार को भव्य मेला लगेगा। रुद्राभिषेक से लेकर आरती और भक्तों के दर्शन की व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
बुधवार के पीछे की ये है कहानी
महादेव प्रबंध समिति के पदाधिकारी रामशंकर राजपूत बताते हैं कि मान्यता है कि त्रेतायुग में जब भगवान राम माता सीता को लक्ष्मण चित्रकूट छोड़ने जा रहे थे तो रास्ते से गुजरते वक्त वह बेहद भावुक थे।
विचलित मन से उन्होंने शिवशंकर को याद किया। सौभाग्य से वह दिन बुधवार था। उसी वाकये से इस मंदिर की मान्यता जुड़ी हुई है। मंदिर पर चार से पांच बुधवारों पर रुद्राभिषेक करने से मानसिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
हर साल होता है मेले का आयोजन
सावन में यहां हर साल बड़े पैमाने पर मेले का आयोजन होता है। रामशंकर राजपूत ने बताया कि मेले में अव्यवस्थाएं न हों, इसके लिए पुरुषों व स्त्रियों की अलग लाइनों की व्यवस्था की गई है। रंग-रोगन का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
इसके अलावा मेला परिसर में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 60 वालंटियर तैनात किए गए हैं, जो भक्तों की मदद के लिए तत्पर रहेंगे।
51 बत्तियों की भव्य आरती
सावन के पहले बुधवार पर सुबह बाबा बर्फानी का भव्य रुद्राभिषेक होता है। इसके बाद श्रृंगार व आरती कर भक्तों को प्रसाद वितरित होता है। शाम को भजन और रात 11 बजे 51 बत्तियों से भोलेनाथ की विशेष आरती होती है। आरती में सैकड़ों शिव भक्त शामिल होते हैं।