BTC में दाखिले मुद्दे पर शिक्षामंत्री बोले, 'देखते हैं'
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निजी बीटीसी कॉलेज प्रबंधन को दाखिले का अधिकार देने पर पेंच फंस गया है। विभाग चाहता है कि विकेंद्रीकरण व्यवस्था के तहत कॉलेज प्रबंधन को दाखिले का अधिकार देने से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) पर दबाव कम होगा और निजी कॉलेजों को छात्र आवंटन के मसले पर आए दिन दाखिल होने वाले मुकदमे समाप्त हो जाएंगे।
मगर बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी को यह प्रस्ताव रास नहीं आ रहा है। उन्होंने वार्ता के बहाने फाइल रोक ली है। अधिकारियों ने जब इस संबंध में उनसे कहा तो वह बोले- देखते हैं।
प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक बनने की योग्यता स्नातक व बीटीसी है। बीटीसी कोर्स सरकारी संस्थान डायट के साथ निजी कॉलेजों में भी कराया जाता है। डायटों में मात्र 10,450 सीटें हैं, जबकि निजी 702 कॉलेजों में 31,500 सीटें।
सूबे में 81 कॉलेज और बढ़ने वाले हैं जिससे 4050 सीटें निजी संस्थाओं में बढ़ जाएंगी। बीटीसी में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन लेकर जिलेवार मेरिट जारी की जाती है। टॉप मेरिट वालों को डायट और इससे कम वालों को निजी कॉलेजों में दाखिले के लिए भेजा जाता है।
जुलाई में शुरू करना था बीटीसी सत्र
डायट प्राचार्य दाखिले में देरी करते हैं और निजी कॉलेजों को समय से छात्रों का आवंटन नहीं हो पाता है। इसके चलते निजी कॉलेज प्रबंधन हाईकोर्ट में मुकदमे करते रहते हैं, जिससे शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय में आए दिन खड़ा होना पड़ता है।
शासन स्तर पर उच्चाधिकारियों की बैठक में यह सहमति बनी थी कि निजी कॉलेज प्रबंधन को दाखिले का अधिकार दे दिया जाए। बीटीसी में दाखिले के लिए वे ही आवेदन मांगे और मेरिट जारी करते हुए दाखिला दें।
एससीईआरटी से प्रस्ताव लेते हुए शासन ने बेसिक शिक्षा मंत्री के पास प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव भेजे हुए करीब तीन माह हो चुका है, लेकिन मंत्री ने अभी तक सहमति नहीं दी है। सूत्रों का कहना है कि जब विभागीय अधिकारियों ने बैठकों में उनसे इसके बारे में पूछा तो कहा दिया गया कि वार्ता के बाद कोई निर्णय किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग हाईकोर्ट में यह कह चुका है कि जून में आवेदन लेकर जुलाई में बीटीसी का सत्र शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन निजी कॉलेजों को दाखिले का अधिकार देने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।