बेअसर रहा माया का जलवा, लगातार पार्टी छोड़ रहे पुराने साथी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बसपा के नामी चेहरों का पार्टी से मोहभंग होने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। अब तक एक एमएलसी सहित करीब आधा दर्जन से ज्यादा बड़े नेता या उनके परिवारीजन बसपा का दामन छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। संकेत है कि आने वाले दिनों में कई और नेता बसपा का साथ छोड़ सकते हैं।
बसपा नेतृत्व को ठाकुर जयवीर सिंह के बसपा छोड़ने की भनक तब हुई जब वह भाजपा का दामन थामने मैनपुरी से निकल पड़े। पार्टी किसी तरह भाजपा में शामिल होने से पहले उन्हें निकाल भर सकी।
सूबे के मौजूदा राजनीतिक हालात में बसपा के कई नेताओं में सियासी भविष्य को लेकर असुरक्षा का भाव पनप रहा है। नतीजतन बसपा छोड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें से ज्यादातर भाजपा में जा रहे हैं।
बाराबंकी के एमएलसी हरगोविंद सिंह सदन की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में चले गए। राज्यसभा सांसद जुगुल किशोर का पूरा कुनबा भाजपा में शामिल हो गया।
मायावती सरकार में कृषि मंत्री रहे चौधरी लक्ष्मी नारायण ने भी बसपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद मुरादाबाद के एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी के बेटे जय प्रकाश सैनी भी भाजपा में पहुंच गए।
इन्होंने भी छोड़ा माया का साथ
पूर्व मंत्री दीनानाथ भास्कर पहले ही बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद भी बसपा सुप्रीमो पर हमला करते हुए बगावत कर चुके हैं।
रविवार को चौथे पूर्व मंत्री जयवीर सिंह ने बसपा छोड़ भाजपा में शामिल होकर इस बात का संकेत कर दिया कि बसपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भविष्य में बसपा छोड़ने वालों की तादाद और बढ़ सकती है।
विधानसभा चुनाव के बाद गिरा ग्राफ
जानकार बताते हैं कि विधानसभा चुनाव 2012 के बाद बसपा का ग्राफ लगातार गिरा है। लोकसभा चुनाव में उसका खाता नहीं खुल सका। प्रतीकात्मक धरना-प्रदर्शन के अलावा पार्टी आम लोगों से जुड़ाव का कोई कदम नहीं उठा पाई है।
संगठन खड़ा करने के नाम पर जो कवायद चल रही है, उसके भी कोई चौंकाने वाले नतीजे नहीं आ रहे। शायद इसी नाते पार्टी के बड़े-बड़े नेता भी अपने भविष्य को लेकर बेचैन हैं। इसी चिंता में वे अब निर्णायक कदम बढ़ाने लगे हैं।
आने वाले दिनों में यह सिलसिला और तेज हो तो चौंकने वाली बात न होगी। चर्चा है कि बसपा के कई मौजूदा विधायक भी दूसरे दलों के संपर्क में हैं।