यूपी चुनाव 2022: हाथी से उतर रहे महारथी, चुनावी चक्रव्यूह कैसे तोड़ेंगी मायावती, बढ़ रही बसपा की चुनौती
यूपी चुनाव के लिए प्रदेश में माहौल बन रहा है। सभी पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं, बसपा के नेता लगातार पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। ऐसे में मायावती की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
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सोशल इंजीनियरिंग के मंत्र से कभी सत्ता के शिखर तक पहुंची बसपा के महारथी लगातार पार्टी छोड़ दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं। इस समय जब सभी दलों ने चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत झोंक रखी है तो वहीं बसपा अपने दिग्गजों को ही नहीं रोक पा रही है।
दस साल में सौ से ज्यादा दिग्गज पार्टी छोड़ गए हैं। रविवार को भी एक झटका लगा तो सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किसके सहारे इस बार बसपा चुनावी चक्रव्यूह तोड़ने की रणनीति तैयार करेगी।
बसपा का गठन 1984 में हुआ था। वीर सिंह पहले बामसेफ में सक्रिय थे और बसपा के संस्थापक सदस्य बन गए। तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे। प्रदेश महासचिव रहे। महाराष्ट्र प्रभारी के साथ बसपा के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनका सपा में जाना बसपा के लिए बड़ा झटका है। बसपा छोड़ने वालों को लंबी फेहरिस्त है और उन्होंने तमाम आरोप भी लगाए हैं।
पिछले दिनों पार्टी के विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा और विधायक व राष्ट्रीय महासचिव राम अचल राजभर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर ली है और यह माना जा रहा है कि वे साइकिल पर सवार हो जाएंगे।
19 में से छह विधायक ही रह गए हैं
2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 19 सीटें जीती थीं। अंबेडकरनगर जिले के उपचुनाव में पार्टी हार गई थी, जिससे उसके विधायकों की संख्या 18 रह गई। अलग-अलग समय पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर 9 विधायकों को निलंबित किया जा चुका है। लालजी वर्मा व राम अचल के निष्कासन से पार्टी में सिर्फ सात विधायक बचे हैं। एक और विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का एलान कर चुकी है।
2007 के दिग्गज बस नाम मात्र के ही
2007 की बसपा सरकार में जिन दिग्गजों को मंत्री बनाया गया था उनमें आज नाम मात्र को ही बचे हैं। उस समय स्वामी प्रसाद मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, चौधरी लक्ष्मी नारायण, लालजी वर्मा, नकुल दुबे, रामवीर उपाध्याय, ठाकुर जयवीर सिंह, बाबू सिंह कुशवाहा, फागू चौहान, दद्दू प्रसाद, वेदराम भाटी, सुधीर गोयल, धर्म सिंह सैनी, इंद्रजीत सरोज, राम अचल राजभर, राकेश धर त्रिपाठी, राम प्रसाद चौधरी और सुखदेव राजभर को महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे गए थे। इनमें से आज नकुल दुबे, सुधीर गोयल व सुखदेव राजभर ही पार्टी में हैं।
अब ये ही महारथी बचे
शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली
सुखदेव राजभर
श्याम सुंदर शर्मा
उमाशंकर सिंह
मुख्तार अंसारी (इन्हें भी चुनाव न लड़ाने का एलान किया जा चुका है)
विनय शंकर तिवारी
आजाद अरिमर्दन