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सदन में बड़े बसपा नेता ने दिया शर्मनाक बयान!

Tue, 01 Jul 2014 12:45 PM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 01 Jul 2014 12:45 PM IST
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bsp leader comments on vidhan sabha chief

प्रश्न प्रहर में अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय पर आपत्तिजनक टिप्पणी करके नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य बुरे फंस गए। अध्यक्ष ने तत्काल पीठ से ही मौर्य की निंदा की।

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विधानसभा के इतिहास में संभवत: पहला मौका था जब पीठ से नेता प्रतिपक्ष के आचरण को लेकर निंदा जैसे तल्ख शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

शून्य प्रहर में सरकार की तरफ से मौर्य के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया गया तो बसपा और पीस पार्टी को छोड़ सभी दलों ने मौर्य की भाषा और आचरण पर ऐतराज जताया।
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बसपा सदस्य लोकेश दीक्षित ने अपने नेता का बचाव किया तो सत्ता पक्ष के सदस्य भी उत्तेजित हो गए।

यह था पूरा वाक्या

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जिसके बाद में स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह कहते हुए खेद जताया कि उनकी मंशा पीठ या अध्यक्ष के अपमान करने की कतई नहीं थी। अगर उनके किसी शब्द से अध्यक्ष या पीठ की गरिमा को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।

अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने और मौर्य ने जो टिप्पणी की है उन शब्दों को कार्यवाही से निकाल देंगे। प्रश्न प्रहर में पहले सवाल में ही 20 मिनट निकल जाने पर अध्यक्ष ने दूसरे प्रश्न के लिए सदस्य का नाम पुकार लिया तो मौर्य ने पीठ को इंगित करते हुए पक्षपात का आरोप लगाया।

अध्यक्ष को यह नागवार गुजरा और उन्होंने तत्काल इसकी निंदा की। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष सदन से चले गए।

शून्य प्रहर में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी ने यह मामला हुए कहा कि यह असाधारण स्थिति है क्योंकि पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं आई जब पीठ को किसी खासकर नेता प्रतिपक्ष की निंदा करनी पड़ी हो। ऐसे आचरण की स्पष्ट निंदा होनी चाहिए। संसदीय कार्यमंत्री को औपचारिक रूप से निंदा प्रस्ताव लाना चाहिए।

बसपा नेता ने दी सफाई

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भाजपा के सतीश महाना, कांग्रेस के प्रदीप माथुर रालोद के पूरन प्रकाश ने भी पीठ की गरिमा को सर्वोपरि बताते हुए इसका समर्थन किया। पीस पार्टी केडॉ. अयूब ने मौर्य का बचाव करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष का भाव या मंशा पीठ की गरिमा कम करने की नहीं थी।

कटुता को बढ़ावा देने के बजाय इस मामले को यहीं खत्म कर दिया जाना चाहिए। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी कड़ी कार्रवाई की मांग की।

संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने कहा कि बसपा के सदस्यों को भी अपने नेता से बात करनी चाहिए। उनकी भाषा हिकारत भरी थी और अंदाज ठीक नहीं था। राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की भाषा और आचरण का प्रयोग किया। सबको शर्मिंदा होना चाहिए और निंदा से भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

मौर्य ने कहा कि वह पीठ की गरिमा का सदैव ध्यान रखते हैं। शब्द कार्रवाई में हैं। दिखवा लिया जाए। ऐसे शब्द हैं जिससे ठेस पहुंची है तो वह खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने तो दोनों पक्षों को संरक्षण देने की बात कही थी। अध्यक्ष को चोट पहुंचाने की कोई मंशा नहीं थी।

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