बसपा से निकाले गए भाजपा में शामिल होने वाले बृजेश पाठक
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बसपा नेतृत्व पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य व आरके चौधरी की तरह पूर्व सांसद बृजेश पाठक के भी पार्टी छोड़ने का अंदाजा नहीं लगा पाया। बसपा ने पाठक के निष्कासन का एलान तब किया जब उन्होंने बसपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा है कि पाठक परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे थे। इसे पार्टी ने स्वीकार नहीं किया और पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया है।
मिश्र ने एक बयान जारी कर बताया कि पाठक पूर्व में मल्लावां हरदोई से कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीत नहीं पाए थे। इसके बाद वह बसपा में आए और उन्नाव से सांसद बने। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सांसद भी बनाया।
पत्नी को महिला आयोग में बनाया उपाध्यक्ष
बसपा शासनकाल में उनकी पत्नी को महिला आयोग में उपाध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दिया गया। हर तरह का मौका देने के बावजूद 2012 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी नम्रता उन्नाव से जबकि साले गुड्डू त्रिपाठी सरोजनीनगर लखनऊ से हार गए।
इसके बाद 2014 में पार्टी ने पाठक को उन्नाव से चुनाव लड़ाया लेकिन वह तीसरे नंबर पर रहे। लोकसभा चुनाव हारने के बाद पाठक ने राज्यसभा में भेजने और पत्नी, साले व भाई को विधानसभा का टिकट देने की मांग की।
पर, पार्टी नेतृत्व ने पार्टी में परिवारवाद न बढ़ाने की नीति पर अमल करते हुए टिकट नहीं देने का फैसला किया। साथ ही उन्हें पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। पिछले साल भर से उनके पास कोई जिम्मेदारी नहीं थी।
परिवार के सदस्यों के लिए की थी टिकट की मांग
मिश्र ने बताया कि पाठक रविवार को आगरा रैली में जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती से मिले थे और उन्होंने परिवार के सदस्यों को उन्नाव, हरदोई सदर, मल्लावां व सरोजनीनगर लखनऊ से टिकट देने की मांग की थी। बसपा अध्यक्ष ने इसे अनुशासनहीनता माना और उसी समय पार्टी से निष्कासित करने का फैसला कर लिया।बृजेश के भाई राजेश पाठक और नजदीकी रिश्तेदार पूर्व एमएलसी गुड्डू त्रिपाठी को पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका है।
सतीश से निष्कासन कराने के अलग मायने
पूर्व सांसद बृजेश पाठक के निष्कासन की घोषणा बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र से कराने के अलग मायने हैं। जानकार बताते हैं कि बसपा में निष्कासन की घोषणा आमतौर पर कोऑर्डिनेटर ही करते आए हैं।
बृजेश पाठक का कार्यक्षेत्र लखनऊ था लिहाजा इसकी घोषणा इस क्षेत्र के मुख्य जोनल कोऑर्डिनेटर नसीमुद्दीन सिद्दीकी से कराने की संभावना थी।
लेकिन पाठक, मिश्र के बेहद करीबी और विश्वस्त माने जाते हैं। इसलिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने खास तौर से सतीश चंद्र मिश्र को ही पाठक के निष्कासन की घोषणा करने की जिम्मेदारी दी।