बसपा का प्लान, चैन से नहीं बैठने देंगे अखिलेश को
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प्रदेश की कुर्सी से सत्ता गंवाने के करीब ढाई साल बाद पहली बार सड़क पर उतरी बसपा ने पुलिस की दमनकारी कार्रवाई, महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं व जनहित से जुड़े मामलों पर आगे भी सड़क पर उतरने का फैसला किया है।
ऐसी घटनाएं जहां होंगी, पार्टी के बड़े नेता तत्काल वहां पहुंचकर इसकी अगुवाई करेंगे।
मकसद साफ है बसपा का प्लान प्रदेश की सत्ता को घेरना है, जिससे कि प्रदेश सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं क्यों भाजपा भी अखिलेश सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।
मंगलवार को बसपा की प्रदेश स्तरीय बैठक प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर की अध्यक्षता में हुई।
धरना प्रदर्शनों में नहीं होगा बवाल
मंगलवार को हुई बैठक में पार्टी पदाधिकारी व जोनल कोआर्डिनेटर शामिल हुए।
यहां तय हुआ कि पार्टी प्रदेश व केंद्र की जनविरोधी व उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन व आंदोलन कर सरकार को बेनकाब करेगी।
इसके लिए जोनल कोआर्डिनेटर ऐसे मामलों की प्रदेश को तत्काल सूचना देंगे। पार्टी के बड़े नेता जल्द से जल्द वहां पहुंचेंगे।
अब तक मीडिया से दूरी बनाकर चलने वाली पार्टी के नेता वहां मीडिया से बात कर पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे। आवश्यक हुआ तो आंदोलन का भी ऐलान करेंगे।
हर महीने मायावती को भेजी जाएगी रिपोर्ट
बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती से खड़ा करने का फैसला हुआ। इसके लिए बूथ व जिलास्तर पर गतिविधि तेज की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि महीने की दस तारीख को महीने के भीतर किए गए आंदोलन व संगठन की मजबूती से जुड़े कार्यों की समीक्षा होगी।
महीने की 11 तारीख को पूरी रिपोर्ट बसपा अध्यक्ष मायावती को सौंपी जाएगी।
भाजपा भी है निशाने पर
भले ही बसपा का विरोध सत्तारूढ़ दल के लिए ही नजर आ रहा हो पर सच तो यह है कि बसपा भी खुद के लिए भाजपा को सबसे बड़ा खतरा मान रही है।
उल्लेखनीय है कि आमचुनाव में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। मतलब बसपा का परंपरागत वोट भाजपा के साथ चला गया।
वहीं आज पारित हुए रेलबजट के बाद यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि केंद्र सरकार भले ही बुलेट ट्रेन के बारे में सोचे लेकिन बसपा दलितों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी।
कहा जा सकता है कि अभी सपा के खिलाफ मुखर बसपा, भाजपा पर भी हमले के लिए तैयार है।