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सपा-कांग्रेस गठबंधन से बदली रणनीति, ध्रुवीकरण से जवाब देंगे भाजपा-बसपा

Tue, 31 Jan 2017 10:21 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 31 Jan 2017 10:21 AM IST
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 BSP and BJP to focus on polarization to face alliance in UP.
अखिलेश यादव व राहुल गांधी - फोटो : amar ujala

सपा-कांग्रेस गठजोड़ सामने आने के बाद भाजपा और बसपा की बदली रणनीति पर हो रहा काम भी नजर आने लगा है। बसपा ने जहां अल्पसंख्यकों को गठबंधन की ओर जाने से रोकने के लिए माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी का बसपा में विलय कर मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की चाल चली।

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वहीं, भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तरह हिंदू ध्रुवीकरण की सियासत पर कदम बढ़ाते हुए पश्चिम से पलायन और पशु रक्षा के मुद्दे पर जोर देना शुरू कर दिया है।

इसकी झलक भाजपा के चुनाव घोषणापत्र और पार्टी के हिंदूवादी चेहरे महंत आदित्यनाथ की पश्चिम यूपी की सभाओं से मिलने लगी है। लेकिन विश्लेषक सपा-कांग्रेस गठबंधन को भी ध्रुवीकरण की बुनियाद पर रख कर ही देख रहे हैं।

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ध्रुवीकरण पर केंद्रित हो गई है यूपी की सियासत

 BSP and BJP to focus on polarization to face alliance in UP.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीतिशास्त्री प्रो. आरपी पाठक यूपी के इलेक्शन को पूरी तरह से ध्रुवीकरण पर केंद्रित मानते हैं। वह कहते हैं कि विकास के मुद्दे पीछे छूट गए हैं। तीनों कोणों से ध्रुवीकरण की सियासत तेज हो गई है। सपा व कांग्रेस गठबंधन का आधार मुस्लिम मतों का बिखराव रोकना है। अखिलेश अकेले ऐसा नहीं कर सकते थे।

अपराधी छवि के अतीक अहमद, विजय मिश्रा और मुख्तार अंसारी जैसों को ठुकराने के बाद उन्हें इस वोट बैंक के काफी हिस्से के नुकसान का अंदेशा था। अखिलेश को उम्मीद होगी कि कांग्रेस के साथ आने से नुकसान हुए मतों की भरपाई भी हो जाएगी और धर्मनिरपेक्ष मतों का बिखराव भी नहीं होगा।

मायावती यह गेम को समझती नजर आ रही हैं। इसीलिए 97 मुस्लिमों को टिकट देने के बावजूद मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल का विलय कर 100 टिकट पूरा करने का दांव चला।

बसपा चाह रही है कि पूरा मुस्लिम वोट बैंक उनके साथ हो जाए। भाजपा पलायन और गोहत्या जैसे मुद्दों को उठा रही है। इस तरह चुनाव के तीनों मुख्य ध्रुव ध्रुवीकरण की सियासत में लग गए हैं। यदि मुस्लिम ध्रुवीकरण हुआ तो हिंदू ध्रुवीकरण भी होगा।

भाजपा को हो सकता है फायदा

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जैन पीजी कॉलेज बड़ौत में राजनीति विज्ञानी डॉ. स्नेहवीर पुंडीर भी चुनाव को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की ओर बढ़ते देख रहे हैं। वह कहते हैं कि लोकतंत्र में जाति, धर्म, क्षेत्र, मनी पावर और गन पावर को रोकने की बात होती है। पर, चुनाव इससे कभी भी दूर नहीं रह पाता। यह चुनाव भी हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण पर केंद्रित होता जा रहा है। जनता के मुद्दे नहीं उठाए जा रहे हैं।

डॉ. पुंडीर कहते हैं कि जब तक अखिलेश अकेले थे, मुकाबला भाजपा और बसपा में नजर आ रहा था। भाजपा-बसपा की सीधी लड़ाई में बाजी बसपा के हाथ लग सकती थी। लेकिन सपा-कांग्रेस गठबंधन से अल्पसंख्यक दुविधा में होंगे। अब लड़ाई तिकोनी हो गई है।

बसपा ने ध्रुवीकरण के लिए ही मुस्लिमों को 100 टिकट दिए। लेकिन कोई बसपा से पूछे कि वह मुसलमानों की किन समस्याओं का समाधान करेंगी तो वह कहेंगे कि चुनाव बाद बताएंगे। इसी तरह भाजपा ने हिंदूवादी वर्ग को समझा रही है कि सारी समस्याओं की जड़ मुस्लिम हैं और वह ही इन पर नियंत्रण रख सकती है।

पलायन और गोहत्या जैसे मुद्दे पर को फोकस कर भाजपा नेताओं ने अपने इस एजेंडे को साधने का प्रयास किया है। इस तरह लड़ाई सपा-कांग्रेस गठबंधन, भाजपा और बसपा के बीच तिकोनी होती जा रही है। इसमें फायदा भाजपा को हो सकता है।

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चुनाव में मुस्लिम हैं केंद्रीय भूमिका में

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जेएनयू के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर आनंद कुमार कहते हैं कि न्याय व व्यवस्था के परिवर्तन की बात करने के बावजूद यूपी में पिछले पांच साल तक यदि कोई सबसे अधिक उपेक्षित रहा तो वह मुस्लिम था। मुस्लिम चुनाव में केंद्रीय भूमिका में हैं।

मायावती उन्हें अधिक भागीदारी देकर अपनी ओर लाना चाहती हैं। सपा-कांग्रेस का गठबंधन पंचर साइकिल को ठीक करने जैसा है। दूसरी ओर भाजपा कैराना से लेकर दादरी और मुजफ्फरनगर के मुद्दे तीन साल से उठा रही है। ऐसे में इस चुनाव में ध्रुवीकरण एक फैक्टर होगा लेकिन पूरा चुनाव इसी पर केंद्रित नहीं होगा।

नए मतदाता और किसानों की बड़ी तादाद है और वे अपनी आर्थिक समस्याओं को जरूर देखेंगे। ऐसे में यह चुनाव कई आयामों पर लड़ा जाएगा। इसमें हिंदू बनाम मुस्लिम, विकास बनाम भ्रष्टाचार और जाति-बिरादरी जैसी परतें होंगी। कहीं कोई फैक्टर काम करेगा तो कहीं कोई। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यूपी का चुनाव त्रिकोणीय हो गया है।

बसपा की रणनीति : 100 मुस्लिमों को टिकट देने के बाद मुख्तार की पार्टी का विलय

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बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala

प्रदेश में लंबे समय तक चली अटकलों के बाद 22 जनवरी को सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने गठबंधन का एलान किया था। इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने बिना देर किए 26 जनवरी को पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल (कौएद) का बसपा में विलय कर लिया। इससे पहले इस दल के सपा में विलय की कोशिश भी हुई थी।

सपा में जहां मुख्तार के भाई सिगबतुल्लाह अंसारी को ही टिकट नहीं मिला था, वहीं मायावती ने मुख्तार अंसारी और सिगबतुल्लाह अंसारी के साथ मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी के लिए तीन-तीन टिकट दे दिए। यही नहीं मायावती ने मुख्तार को पूरी तरह क्लीन चिट देने की भी कोशिश की।

सपा को कमजोर दिखाने के लिए वह अपने प्रत्याशियों का टिकट काट-काट कर सपा के बागियों को उम्मीदवार बनाने में जुटी हैं। यह अल्पसंख्यकों को संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है। उन्हें अंदेशा रहा है कि सपा-कांग्रेस के मिलने से अल्पसंख्यक उनकी ओर झुक सकता है। रविवार को राहुल गांधी-अखिलेश यादव की साझा प्रेस कांफ्रेंस के बाद उन्होंने बयान जारी कर कहा कि यह नापाक गठबंधन बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार न बनने देने के लिए है।

भाजपा : वर्ग विशेष के पलायन और पशु रक्षा के मुद्दे को एजेंडे में दिया स्थान

 BSP and BJP to focus on polarization to face alliance in UP.
BJP LOGO

भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा फायदा पश्चिम यूपी में दंगे के बाद हुए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से हुआ था। विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने ध्रुवीकरण के एजेंडे को फिर साफ कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के एलान के बाद 28 जनवरी को भाजपा का घोषणापत्र जारी करते हुए पश्चिमी यूपी में पलायन के मुद्दे को भरपूर धार दी।

भाजपा सरकार बनने पर पलायन पर श्वेतपत्र लाने का वादा किया और पलायन पर जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी तय करने को कहा। यह भी कहा गया कि सांप्रदायिक तनाव के कारण पलायन रोकने के लिए पुलिस में विशेष विभाग बनाया जाएगा और इसके लिए एक डिप्टी कलेक्टर नियुक्त किया जाएगा। पार्टी ने सभी अवैध कत्लखानों को बंद करने का वादा भी किया।

खास बात ये है कि इस एजेंडे को जारी करते समय उग्र हिंदुत्व के झंडाबरदार सांसद महंत आदित्यनाथ को भी मंच पर स्थान दिया। इसे धार देने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंप दी गई। अब पश्चिम यूपी में उनकी सभाएं शुरू हो गई हैं। उन्होंने सभाओं में न सिर्फ वर्ग विशेष के पलायन का मामला उठाया है बल्कि यह कहकर लोगों की भावनाएं भी हिलाने की कोशिश की कि मनुष्य क्या यहां पशु तक सुरक्षित नहीं हैं।

इसके साथ पार्टी बसपा पर आरोप लगा रही है कि उसने सत्ता के लिए कांशीराम द्वारा खड़ी की गई पार्टी मुसलमानों के हाथ में सौंप दी है। इसके लिए मुसलमानों को 100 टिकट और माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी के विलय का उदाहरण दिया जा रहा है।

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