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सुल्तानपुर : वसूली के लिए शिक्षकों को निलंबित करता था यह बीएसए, अब हुआ सस्पेंड
Mon, 11 Mar 2019 10:39 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला सुल्तानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला सुल्तानपुर
Published by: Amulya Rastogi
Updated Mon, 11 Mar 2019 10:39 PM IST
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वसूली के लिए शिक्षकों को निलंबित करने वाले सुल्तानपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कौस्तुभ कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है। मुजफ्फरनगर के बीएसए रहते उन्होंने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के साथ ही गबन भी किया था। जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होने पर यह कार्रवाई की गई है।
शासन ने मुजफ्फरनगर के तत्कालीन बीएसए कौस्तुभ कुमार सिंह के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच अपर जिलाधिकारी, प्रशासन से कराई थी। साथ ही अन्य अनियमितताओं की जांच परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, मुजफ्फरनगर से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ गंभीर मामले मिले हैं। उन्होंने रेलवे की एसी तृतीय श्रेणी में मुजफ्फरनगर से लखनऊ के बीच पांच यात्राएं कीं, लेकिन यात्रा भत्ता एसी द्वितीय श्रेणी का लिया।
उन्होंने जिलाधिकारी, मुजफ्फरनगर से मौखिक अनुमति लेकर सड़क मार्ग से काठमांडु की विदेश यात्रा की। यात्रा भत्ता के फर्जी बिल बनाकर 36050 रुपये की राशि भी ली। जबकि, न तो डीएम को उनकी एलटीसी स्वीकृत करने का अधिकार था और न ही वह एलटीसी पाने के हकदार थे। क्योंकि, तब तक इनकी सेवा मात्र दो वर्ष की ही हुई थी। शासन ने इसे गबन की श्रेणी में माना है।
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शासन ने मुजफ्फरनगर के तत्कालीन बीएसए कौस्तुभ कुमार सिंह के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच अपर जिलाधिकारी, प्रशासन से कराई थी। साथ ही अन्य अनियमितताओं की जांच परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, मुजफ्फरनगर से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ गंभीर मामले मिले हैं। उन्होंने रेलवे की एसी तृतीय श्रेणी में मुजफ्फरनगर से लखनऊ के बीच पांच यात्राएं कीं, लेकिन यात्रा भत्ता एसी द्वितीय श्रेणी का लिया।
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उन्होंने जिलाधिकारी, मुजफ्फरनगर से मौखिक अनुमति लेकर सड़क मार्ग से काठमांडु की विदेश यात्रा की। यात्रा भत्ता के फर्जी बिल बनाकर 36050 रुपये की राशि भी ली। जबकि, न तो डीएम को उनकी एलटीसी स्वीकृत करने का अधिकार था और न ही वह एलटीसी पाने के हकदार थे। क्योंकि, तब तक इनकी सेवा मात्र दो वर्ष की ही हुई थी। शासन ने इसे गबन की श्रेणी में माना है।
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जांच में खुली पोल
कौस्तुभ ने फर्जी कोटेशन लेकर मेसर्स मिलन कार सर्विस से गाड़ी किराए पर ली गई दिखाई। इस पर 2.88 लाख रुपये व्यय किया गया। जांच में सामने आया कि इस फर्म से न तो कोई वाहन किराए पर लिया गया और न ही इस फर्म द्वारा कोई कोटेशन ही दिया गया था। वाहन ड्राइवर के साथ हायर किया हुआ दिखाया गया, जबकि विभागीय कर्मी से वाहन चलवाया गया। वाहन किराए पर लेते समय किसी भी शासकीय नियम का पालन नहीं किया गया।
निविदा प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। जांच में व्यक्तिगत यात्रा को सरकारी यात्रा दिखाकर भुगतान करने और शिक्षकों को निलंबित करके उनसे पैसे का लेनदेन कर बहाल करने के मामले भी पाए गए। अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि कौस्तुभ के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक कार्यवाही भी चलेगी। निलंबन अवधि में वह निदेशक, बेसिक उत्तर प्रदेश शिविर कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध रहेंगे।
निविदा प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। जांच में व्यक्तिगत यात्रा को सरकारी यात्रा दिखाकर भुगतान करने और शिक्षकों को निलंबित करके उनसे पैसे का लेनदेन कर बहाल करने के मामले भी पाए गए। अपर मुख्य सचिव डॉ. प्रभात की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि कौस्तुभ के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक कार्यवाही भी चलेगी। निलंबन अवधि में वह निदेशक, बेसिक उत्तर प्रदेश शिविर कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध रहेंगे।