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ब्रेस्ट कैंसर का ये इंजेक्शन पड़ता है 10 हजार करोड़ का!

Tue, 23 Dec 2014 11:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 23 Dec 2014 11:43 AM IST
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breast cancer costly medicine disturbed the patient.

ब्रेस्ट कैंसर की केवल एक दवा की खरीद पर हम हर साल 2000 रॉल्स रॉयस की कीमत के बराबर पैसा खर्च कर रहे हैं। स्विट्जरलैंड की एक फार्मा कंपनी के इंजेक्शन हरसेप्टिन (ट्रेस्टूज्यूमेव) की महंगी कीमत पर सवाल उठाते हुए केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत ने सोमवार यह आकलन किया।

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उनका कहना था कि अगर भारत में इस दवा का सस्ता विकल्प तैयार कर लिया जाए तो हम हर साल अपनी जरूरत पूरी करने के अलावा 10,000 रॉल्स रॉयस की कीमत की दवा विदेशों में निर्यात कर सकते हैं। केजीएमयू के वीसी, बायोटेक पार्क के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों में सबसे तेजी से ब्रेस्ट कैंसर बढ़ रहा है। ब्रेस्ट कैंसर को नियंत्रित करने के लिए एक इंजेक्शन हरसेप्टिन दिया जाता है। इस 50 मिली. के एक इंजेक्शन की कीमत करीब 1.25 लाख रुपये भारत में है।
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इसे अभी केवल स्विटरलैंड की कंपनी रोश ही बनाती है। वहीं हर साल देशभर में हजारों करोड़ रुपये सिर्फ एक इंजेक्शन की खरीद पर खर्च किए जाते हैं। यह आंकड़ा करीब 8-10 हजार करोड़ रुपये का है। लंग कैंसर और सॉफ़्ट टिश्यू के कैंसर में भी कमोबेश यही स्थिति है।

बायो इंजीनियरिंग से बनेंगी नई ड्रग्स

breast cancer costly medicine disturbed the patient.

प्रो. रविकांत ने कहा कि हमें अब बायो इंजीनियरिंग की जरूरत है जिससे नई ड्रग और डायग्नोस्टिक तकनीक को विकसित किया जा सके। अगर ब्रेस्ट कैंसर को पहले चरण में ही पता कर लिया जाए तो इसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया को हमें सुनिश्चित करना होगा।

उनका कहना था कि हमारे प्रीमियम वैज्ञानिक संस्थानों को इसके लिए आगे आना चाहिए। अगर हम हरसेप्टिन का सस्ता विकल्प ही तैयार कर लें तो एक सस्ती दवा हमारे मरीजों केलिए उपयोग हो पाएगी। विदेशों में भी सस्ती दवा के रूप में हम इसे निर्यात कर सकते हैं। कार्यक्रम में बायोटेक पार्क की सीईओ डॉ. पीके सेठ, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एचएम बहल, पूर्व सीडीआरआई निदेशक डॉ. नित्यानंद मौजूद रहे।

आईआईटी कानपुर के बायलॉजी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. एस गणेश ने कहा कि लफोरा रोग म्योक्लिनिकल मिर्गी का ही एक रूप है। अधिकांश मरीजों में यह न्यूरोडिजेनरेटिव रोग के रूप में मिलता है।

प्रारम्भिक लक्षण किशोर उम्र में ही मिल जाते हैं। काफी स्टडी के बाद इस रोग का इलाज संभव हो सका है। इससे पर्किंसन, अल्झाइमर जैसी बीमारियों का भी इलाज किया जा सकेगा।

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