पढ़िए, डॉक्टर्स कैसे ढूढेंगे कैंसर का सस्ता इलाज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आलम ये है कि जिस तरह की भीड़ फिजीशियन के पास होती है उतनी ही भीड़ ऑन्कोलॉजिस्ट के पास है। ऐसे में कैंसर का महंगा होता इलाज गरीब मरीजों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
अब डॉक्टरों को सोचना होगा कि कैंसर का इलाज सस्ता कैसे हो। ये बात टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई के रेडियोथेरेपी विभाग के प्रो. एसके श्रीवास्तव ने कही। वे मंगलवार को केजीएमयू के रेडियोथेरपी विभाग के 28वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रो. श्रीवास्तव ने कहा, बाजार में आ रहीं आधुनिक मशीनें इलाज को आसान तो कर रही हैं लेकिन इनकी वजह से इलाज दोगुना महंगा हो रहा है। प्रो. श्रीवास्तव ने कैंसर के ब्रांडेड दवाओं और आधुनिक मशीनों के मूल्यांकन पर भी जोर दिया।
उनके मुताबिक, कौन सी दवा और मशीन कितनी कारगर और उसका इस्तेमाल किस स्तर से होना चाहिए, इसका पता मूल्यांकन से चलेगा। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से चिकित्सकों को सहूलियत मिली लेकिन खर्च कई गुना बढ़ गया। जाहिर सी बात है इस तरह का इलाज गरीबों मिलना मुश्किल है।
भेजा गया है राज्य कैंसर संस्थान का प्रस्ताव
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में पहुंचे कुलपति प्रो. रविकांत ने कहा कि कैंसर मरीजों को बेहतरीन सुविधा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को राज्य कैंसर संस्थान का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मरीजों को अच्छी सुविधा और इलाज मिलेगा। उन्होंने कहा कि केजीएमयू में कैंसर रोगियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की जा रही है। केजीएमयू में बंद पड़ी लीनियर एक्सीलरेटर मशीन को जल्द शुरू करवाया जाएगा जिससे रेडियोथेरेपी आसान हो सके।
रेडियोथेरपी विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भाशय कैंसर के मामले तेजी से कम हो रहे हैं। डॉक्टरों का मानना था कि पहले ये कैंसर दस में से चार महिलाओं को होता था लेकिन अब इसका ग्राफ दो से तीन हो गया है।
महिलाएं सेहत का ध्यान रखें, नियमित इलाज और जांच कराएं तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। गंदगी और लापरवाही से होने वाला संक्रमण कैंसर जैसी बीमारी को जन्म देता है।