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Lucknow News: नाक में आ रहा था दिमाग का पानी, बिना चीरा सर्जरी
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महिला की सर्जरी करने वाले डॉ. रवि शंकर, प्रो. आरएस विर्क और डॉ. गोविंद भुस्कुटे। (बाएं से)
लखनऊ। नाक में दिमाग का पानी आने की समस्या का संजय गांधी पीजीआई के डॉक्टर रवि शंकर ने बिना चीरा लगाए इलाज करने में सफलता हासिल की है। उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ जाकर वहां के दो डॉक्टरों के साथ मिलकर यह ऑपरेशन किया। दावा है कि इस बीमारी का बिना चीरा लगाए सर्जरी करने का देश में यह पहला मामला है।
डॉ. रवि शंकर ने बताया कि दिमाग का पानी लीक होने के मामले दुर्लभतम होते हैं। इनमें दूरबीन विधि से सर्जरी की जाती है। नाक के माध्यम से दूरबीन डालकर चीरा लगाकर एक नस को काटकर समस्या को दूर किया जाता है। हालांकि, इसमें यह परेशानी आती है कि कई बार आंसू बनना बंद हो जाते हैं। साथ ही चेहरे में झनझनाहट होने लगती है, जिससे मरीज हमेशा असहज रहता है। इसे देखते हुए आंख के माध्यम से बिना चीरा (न्यूनतम इनवेसिव ट्रांसऑर्बिटल-एंडोनासल सर्जरी) की विधि ईजाद की गई है। अभी तक इसका इस्तेमाल सिर्फ विदेश में ही हो रहा था।
डॉ. रवि ने बताया कि उन्होंने शव पर इस तकनीक का अभ्यास किया था। नई विधि की सर्जरी में आंख के रास्ते बिना नस काटे दिमाग के पानी का रिसाव रोका जाता है। नस न कटने से आंसू न आने व झनझनाहट की समस्या भी नहीं होती है।
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40 वर्षीय महिला की बाईं नाक में थी समस्या
डॉ. रवि शंकर ने बताया कि 40 वर्षीय महिला को दिमाग का पानी बाईं नाक के माध्यम से रिसने की समस्या थी। पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों प्रो. आरएस विर्क और डॉ. गोविंद भुस्कुटे ने भी शव पर नई तकनीक की सर्जरी का अभ्यास किया है। उनके बुलावे पर रवि चंडीगढ़ गए। इसके बाद तीनों ने आंख के माध्यम से ऑपरेशन किया। इसमें 40 हजार रुपये का खर्च आया। महिला अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उन्हें कोई समस्या नहीं है।
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डॉ. रवि शंकर ने बताया कि दिमाग का पानी लीक होने के मामले दुर्लभतम होते हैं। इनमें दूरबीन विधि से सर्जरी की जाती है। नाक के माध्यम से दूरबीन डालकर चीरा लगाकर एक नस को काटकर समस्या को दूर किया जाता है। हालांकि, इसमें यह परेशानी आती है कि कई बार आंसू बनना बंद हो जाते हैं। साथ ही चेहरे में झनझनाहट होने लगती है, जिससे मरीज हमेशा असहज रहता है। इसे देखते हुए आंख के माध्यम से बिना चीरा (न्यूनतम इनवेसिव ट्रांसऑर्बिटल-एंडोनासल सर्जरी) की विधि ईजाद की गई है। अभी तक इसका इस्तेमाल सिर्फ विदेश में ही हो रहा था।
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डॉ. रवि ने बताया कि उन्होंने शव पर इस तकनीक का अभ्यास किया था। नई विधि की सर्जरी में आंख के रास्ते बिना नस काटे दिमाग के पानी का रिसाव रोका जाता है। नस न कटने से आंसू न आने व झनझनाहट की समस्या भी नहीं होती है।
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40 वर्षीय महिला की बाईं नाक में थी समस्या
डॉ. रवि शंकर ने बताया कि 40 वर्षीय महिला को दिमाग का पानी बाईं नाक के माध्यम से रिसने की समस्या थी। पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों प्रो. आरएस विर्क और डॉ. गोविंद भुस्कुटे ने भी शव पर नई तकनीक की सर्जरी का अभ्यास किया है। उनके बुलावे पर रवि चंडीगढ़ गए। इसके बाद तीनों ने आंख के माध्यम से ऑपरेशन किया। इसमें 40 हजार रुपये का खर्च आया। महिला अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उन्हें कोई समस्या नहीं है।