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भारत नेपाल सीमा के चार बूथ केंद्र बंद
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पिपरहवा (बलरामपुर)। बकाया मानदेय भुगतान न होने से बॉर्डर बूथ के संविदा कर्मियों में भारी रोष है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में चार स्थानों पर संचालित बार्डर बूथ बंद कर दिए गए हैं। बंद करने से पहले काम करने वाले संविदा कर्मियों ने डीएम को शिकायती पत्र भेजकर बकाया मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है। शीघ्र बकाया मानदेय का भुगतान न होने पर संविदा कर्मियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इन बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का जिम्मा सौंपा गया था।
बॉर्डर बूथ के संविदा कर्मी राज बहादुर, राम खेलवान, कृपाराम, राम मनोहर, सतीश सिंह, शहनाज, कांशीराम, शिव कुमार, नीलम, सोनिया, जीवितराम वर्मा, अवधेश दूबे व राजकुमार तिवारी ने डीएम को भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चार बॉर्डर बूथ संचालित किए जा रहे थे।
बॉर्डर बूथों का संचालन करने के लिए संविदा कर्मियों को तैनात किया गया था। कैंप लगाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का जिम्मा सौंपा गया था। आठ वर्षों से बार्डर बूथ के संविदा कर्मी अपनी सेवाएं दे रहे थे। पचपेड़वा, त्रिलोकपुर जरवा, बालापुर, बनकटवा व नंदमहरा बार्डर बूथों पर 15 से 20 हजार बच्चों को हर साल सेहतमंद रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अप्रैल 2021 से बार्डर बूथों को बंद कर दिया गया है। संविदा कर्मियों का आरोप है कि जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक के बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। मानदेय का भुगतान न होने से संविदा कर्मियों में भारी रोष है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि बार्डर बूथ के संविदा कर्मियों का मानदेय मार्च माह में भुगतान के लिए आया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण यह बजट खर्च नहीं हो सका है। इस बजट को सुरक्षित कर लिया गया है। विभागीय आदेश के बाद इस बजट को खर्च करने की अनुमति मिलेगी। अनुमति मिलते ही सभी संविदा कर्मियों को उनके बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।
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बॉर्डर बूथ के संविदा कर्मी राज बहादुर, राम खेलवान, कृपाराम, राम मनोहर, सतीश सिंह, शहनाज, कांशीराम, शिव कुमार, नीलम, सोनिया, जीवितराम वर्मा, अवधेश दूबे व राजकुमार तिवारी ने डीएम को भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चार बॉर्डर बूथ संचालित किए जा रहे थे।
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बॉर्डर बूथों का संचालन करने के लिए संविदा कर्मियों को तैनात किया गया था। कैंप लगाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का जिम्मा सौंपा गया था। आठ वर्षों से बार्डर बूथ के संविदा कर्मी अपनी सेवाएं दे रहे थे। पचपेड़वा, त्रिलोकपुर जरवा, बालापुर, बनकटवा व नंदमहरा बार्डर बूथों पर 15 से 20 हजार बच्चों को हर साल सेहतमंद रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अप्रैल 2021 से बार्डर बूथों को बंद कर दिया गया है। संविदा कर्मियों का आरोप है कि जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक के बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। मानदेय का भुगतान न होने से संविदा कर्मियों में भारी रोष है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. अरुण वर्मा ने बताया कि बार्डर बूथ के संविदा कर्मियों का मानदेय मार्च माह में भुगतान के लिए आया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण यह बजट खर्च नहीं हो सका है। इस बजट को सुरक्षित कर लिया गया है। विभागीय आदेश के बाद इस बजट को खर्च करने की अनुमति मिलेगी। अनुमति मिलते ही सभी संविदा कर्मियों को उनके बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।