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आपको बुला रहा पुस्तकों का संसार
नीरज ‘अम्बुज’/लखनऊ
Updated Sat, 28 Sep 2013 02:10 AM IST
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‘प्यारे मित्रों नमस्कार... बहुत खुशी हो रही है लखनऊ बुक फेस्टिवल में आकर’। अपने चहेते पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के मुंह से यह शब्द सुनकर प्रशंसकों की खुशी देखने लायक थी।
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जो खचाखच भरे पंडाल में गर्मी से तरबतर होते हुए भी उन्हें सुनने को आतुर खड़े थे। पूर्व राष्ट्रपति ने फिर बोलना शुरू किया कि ‘जहां जाता हूं लोग पूछते हैं कौन सी बुक्स पसंद हैं’।
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जैसे ही वह दो सेकंड के लिए रुके, उनके प्रशंसकों ने तुरंत उन नामों को कागज पर उतारने की तैयारी कर ली।
कलाम बोले ये वो किताबें हैं, जिन्हें मैंने सेकंड हैंड खरीदकर पढ़ा। उन्होंने बताया कि ‘लाइट फ्रॉम मैनी लैंप’, पहली किताब है जिसे उन्होंने 15 वर्ष की उम्र में पढ़ा था।
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किताब में उन महान लोगों के बारे में लिखा है, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी। दूसरी किताब उनकी मातृ भाषा (तमिल) में लिखी है, जिसकी कविताएं जीवन का मार्गदर्शन करती हैं।
शेष किताबों के बारे में जानने की उत्सुकता पंडाल में खड़े प्रशंसकों के चेहरे और उंगली में फंसे पेन की हरकत से दिख रही थी, जो तेजी से हिल रही थी।
उन्होंने बताया कि डॉ. एलेक्सिस लिखित ‘मैन द अननोन’ तीसरी किताब है। ‘भगवद गीता’ और ‘कुरान’ से मिली शिक्षाओं को भी उन्होंने साझा किया।
मोती महल लॉन में 11वें पुस्तक मेले के उद्घाटन करने आए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा अच्छी किताबें रचनात्मकता बढ़ाने का काम करती हैं।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि घर में लाइब्रेरी बनाएं और कम से कम दस अच्छी किताबें जरूर रखें।
इतना ही नहीं टीवी सीरियल देखने की जगह खाने की टेबिल पर या फैमिली मीटिंग में उन किताबों के कुछ पन्ने बच्चों को पढ़कर सुनाएं ताकि उनमें संस्कार और नैतिकता पैदा हो।
अंत में उन्होंने युवाओं, छात्र व छात्राओं को वह कहानियां सुनाईं, जिससे वे किताबों को पढ़ने के लिए प्रेरित हो सकें। उन्होंने शपथ भी दिलवाई।
कार्यक्रम में फेडरेशन ऑफ पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स एसोसिऐशन के अध्यक्ष एससी सेठी ने कहा कि कोलकाता की तरह लखनऊ पुस्तक मेला अगर देश के चुनिंदा पुस्तक मेलों में गिना जाता है तो इसे लोकप्रिय बनाने में मीडिया का अहम योगदान है।
मेले के मनोज सिंह चंदेल ने बताया कि प्रवेश नि:शुल्क है। सुबह 11 बजे से रात नौ बजे तक चलने वाले इस पुस्तक मेले में किताबों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत तक छूट खरीदारों को मिलेगी।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि सफलता हासिल करने के चार तरीके हैं। पहला जीवन में बड़ा लक्ष्य स्थापित करें।
दूसरा लगातार ज्ञान अर्जित करते रहें, जो किताबों की मदद से की जा सकती है। तीसरा मंत्र कड़ी मेहनत और चौथा लगातार उस मेहनत को करते रहने से सफलता मिलनी तय है।
उन्होंने कहा ये वे सूत्र हैं जिनको थॉमस एल्वा एडिशन, मैडम क्यूरी, सीवी रमन और राइट ब्रदर्स ने अपनाया।
एपीजे अब्दुल कलाम की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका एक ऑटोग्राफ पाने और उन्हें देखने की चाहत लेकर सैकड़ों युवक, छात्र व छात्राएं पुस्तक मेले के पंडाल में जुट गए।
करीब एक घंटे तक उनका लेक्चर सुना, लेकिन जब मौका आया तो भीड़ एक साथ टूट पड़ी, जिससे उन्हें भी काफी दिक्कत हुई। हालांकि, प्रशंसकों को शुभकामनाएं देने के बाद वह समारोह से चले गए।