{"_id":"69b1d5f0261de6ffdb0ca3bd","slug":"bone-marrow-transplantation-started-at-kgmu-lucknow-news-c-13-lko1070-1639411-2026-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: केजीएमयू में शुरू हुआ बोन मैरो प्रत्यारोपण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: केजीएमयू में शुरू हुआ बोन मैरो प्रत्यारोपण
विज्ञापन
केजीएमयू।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण) की सुविधा शुरू हो गई है। संस्थान में एक मरीज का बोन मैरो प्रत्यारोपित करने के बाद उसे डिस्चार्ज किया जा चुका है।
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि दिसंबर में राज्यपाल ने संस्थान के बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया था। इस यूनिट को अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ तैयार किया गया है। यह सुविधा उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी, जिन्हें पहले इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब इस यूनिट में पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया है। यह केजीएमयू के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सुविधा से कई प्रकार के कैंसर और रक्त विकारों के इलाज में मदद मिलेगी।
मरीजों को मिलेगी राहत
बोन मैरो ट्रांसप्लांट ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा और सिकल सेल एनीमिया जैसी कई गंभीर बीमारियों के इलाज में सहायक है। इस सुविधा के शुरू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्हें अब महंगे निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। केजीएमयू में यह सुविधा छह से आठ लाख रुपये में उपलब्ध है।
विज्ञापन
इसलिए होती है बोन मैरो प्रत्यारोपण की जरूरत
बोन मैरो प्रत्यारोपण की जरूरत तब होती है, जब शरीर का अस्थि मज्जा कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के कारण खराब हो जाता है। अस्थि मज्जा से ही स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनती हैं। आमतौर पर ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), एप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और लिम्फोमा के रोगियों में अस्थि मज्जा खराब हो जाता है। ऐसे में स्वस्थ अस्थि मज्जा लेकर इसे प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
3.15 करोड़ रुपये से तैयार हुई है यूनिट
कुलपति ने बताया कि प्रत्यारोपण यूनिट आदित्य बिड़ला कैपिटल की ओर से कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसबिलिटी के तहत 3.15 करोड़ की सहायता से शुरू की गई है। यह यूनिट विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए जीवनरक्षक उपचार को अधिक सुलभ बनाएगी। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत आने वाले मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
विज्ञापन
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि दिसंबर में राज्यपाल ने संस्थान के बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया था। इस यूनिट को अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ तैयार किया गया है। यह सुविधा उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी, जिन्हें पहले इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब इस यूनिट में पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया है। यह केजीएमयू के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सुविधा से कई प्रकार के कैंसर और रक्त विकारों के इलाज में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
मरीजों को मिलेगी राहत
बोन मैरो ट्रांसप्लांट ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा और सिकल सेल एनीमिया जैसी कई गंभीर बीमारियों के इलाज में सहायक है। इस सुविधा के शुरू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्हें अब महंगे निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। केजीएमयू में यह सुविधा छह से आठ लाख रुपये में उपलब्ध है।
विज्ञापन
इसलिए होती है बोन मैरो प्रत्यारोपण की जरूरत
बोन मैरो प्रत्यारोपण की जरूरत तब होती है, जब शरीर का अस्थि मज्जा कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के कारण खराब हो जाता है। अस्थि मज्जा से ही स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बनती हैं। आमतौर पर ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), एप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और लिम्फोमा के रोगियों में अस्थि मज्जा खराब हो जाता है। ऐसे में स्वस्थ अस्थि मज्जा लेकर इसे प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।
3.15 करोड़ रुपये से तैयार हुई है यूनिट
कुलपति ने बताया कि प्रत्यारोपण यूनिट आदित्य बिड़ला कैपिटल की ओर से कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसबिलिटी के तहत 3.15 करोड़ की सहायता से शुरू की गई है। यह यूनिट विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए जीवनरक्षक उपचार को अधिक सुलभ बनाएगी। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत आने वाले मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।