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निकाय चुनाव : गठबंधन में भी महापौर प्रत्याशी उतारने का साहस नहीं जुटा पाया रालोद

Sun, 16 Apr 2023 09:58 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 16 Apr 2023 09:58 PM IST
सार

सभी 17 सीटों पर सपा के उम्मीदवार ही लड़ेंगे और रालोद इसे समर्थन करेगा। हां, पश्चिमी उप्र में नगर पालिका और पंचायत अध्यक्ष पदों पर रालोद अवश्य मजबूती से ताल ठोंक रहा है लेकिन रालोद कार्यकर्ताओं के मन में महापौर पद पर न लड़ने की टीस ही रह गई।

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Body elections: RLD could not muster the courage to field mayor candidate even in the alliance, no candidate f
निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इसी सियासी समीकरण कहें या कुछ और कि नगर निकाय चुनाव में पहली बार सपा से गठबंधन होने के बावजूद रालोद का एक भी प्रत्याशी महापौर पद पर नहीं लड़ेगा। सभी 17 सीटों पर सपा के उम्मीदवार ही लड़ेंगे और रालोद इसे समर्थन करेगा। हां, पश्चिमी उप्र में नगर पालिका और पंचायत अध्यक्ष पदों पर रालोद अवश्य मजबूती से ताल ठोंक रहा है लेकिन रालोद कार्यकर्ताओं के मन में महापौर पद पर न लड़ने की टीस ही रह गई।

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विधानसभा चुनाव 2022 में सपा और रालोद का गठबंधन हुआ था जो इस नगर निकाय चुनाव में भी जारी है। इसी गठबंधन के सहारे विधानसभा चुनाव में रालोद ने आठ सीटें जीत ली थीं। खतौली की एक सीट बाद में हुए उपचुनाव में जीतने के बाद रालोद के विधायकों की संख्या 9 हो गई। माना जा रहा है कि पश्चिमी उप्र में यह गठबंधन मजबूती से निकाय चुनाव भी लड़ेगा पर महापौर पद पर सभी सीटों पर सपा के उम्मीदवार ही मैदान में होंगे। कुछ सीटों पर रालोद कार्यकर्ता रालोद प्रत्याशी को महापौर पद पर लड़ाने की बात कह रहे थे। 
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मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा सीट पर रालोद कार्यकर्ताओं की मंशा थी कि रालोद का उम्मीदवार महापौर पद का चुनाव लड़े। सपा उसे समर्थन करे। ऐसा नहीं है कि सपा थिंक टैंक इसके लिए राजी नहीं था। कुछ सीटें रालोद को देने पर सहमति की बात चल रही थी पर बताया जा रहा है कि रालोद ने खुद ही महापौर के रण में उतरने से अपने पांव खींच लिए। उसने नगर पालिका और पंचायत पर फोकस कर दिया। यही कारण रहा कि पश्चिमी उप्र में जिलों में पहले चरण पर रालोद दर्जन भर से ज्यादा पालिका और पंचायत अध्यक्ष सीटों पर चुनाव लड़ रही है। रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे कहते हैं कि यह सियासी समीकरण है। रालोद नगर पालिका और पंचायतों पर ही ज्यादा फोकस कर रही है।
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वोटों के बंटवारे पर मंथन
अब इस गठबंधन में वोटों के बंटवारे पर भी मंथन हो रहा है। अहम सवाल यह है कि क्या रालोद का मूल वोटर सपा उम्मीदवार को वोट करेगा। जहां रालोद का उम्मीदवार महापौर पद पर नहीं होगा वहां सपा कितने रालोद समर्थित वोटरों को जोड़ पाएगी। दोनों के सियासी विशेषज्ञ इस पर गुणा भाग कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर यही हुआ था जब इस गठबंधन में जितने वोट ट्रांसफर होने की बात कही जा रही थी, उतना नहीं हो पाया और नजदीकी मुकाबले में गठबंधन हार गया। गठबंधन निकाय चुनाव में पूरी कोशिश करेगा कि इस तरह की पुनरावृत्ति न हो।

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