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लविवि : कोरे आश्वासनों ने बढ़ाई नए कॉलेजों की दिक्कत, लगा रहे विवि के चक्कर

Fri, 18 Feb 2022 01:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 01:29 AM IST
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Blank assurance of Lucknow university increased the problem of new colleges
लखनऊ विवि के कोरे आश्वासनों ने बढ़ाई नए कॉलेजों की दिककतें। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
अक्षय कुमार
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लखनऊ विश्वविद्यालय की आय बढ़ाने के लिए चार नए जिलों रायबरेली, लखीमपुर, सीतापुर और हरदोई के कॉलेज तो संबद्ध कर दिए गए, लेकिन विश्वविद्यालय के कोरे आश्वासनों ने उनकी दिक्कत बढ़ा दी है।
विश्वविद्यालय ने परीक्षा शुल्क में 250 रुपये कमी का आश्वासन तो दिया, लेकिन किया नहीं। साथ ही सिलेबस और विषयों को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, जिससे कॉलेजों की दिक्कत बढ़ी हुई है और वे लविवि के चक्कर काट रहे हैं।
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लखनऊ विवि से इस बार उक्त नए जिलों के लगभग 350 कॉलेज जुड़े। ये कॉलेज कानपुर विश्वविद्यालय में 700 रुपये परीक्षा शुल्क, 100 रुपये प्रैक्टिकल शुल्क, 100 रुपये रजिस्ट्रेशन कुल लगभग 1000 रुपये शुल्क देते थे।
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वहीं, लविवि में एक सेमेस्टर का परीक्षा शुल्क ही 2000 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे कॉलेजों के विरोध के बाद 500 रुपये कम किया गया। वहीं 1000 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क था, इसे भी 500 रुपये कम किया गया।
इसके बाद भी सहयुक्त कॉलेज संतुष्ट नहीं थे और परीक्षा शुल्क में और कम करने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर उनकी रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह के साथ 9 दिसंबर को बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने 250 रुपये शुल्क कम करने का आश्वासन दिया था।
लेकिन कम करने का आदेश नहीं जारी किया। वहीं एक फरवरी को फिर विवि व कॉलेज प्रतिनिधियों की बैठक में आचार संहिता का हवाला देते हुए इसे अगले सेमेस्टर में एडजस्ट करने का आश्वासन दिया गया।
यह कवायद इतनी देरी से हुई कि विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा फार्म भरने व जमा करने की तिथि समाप्त हो गई। इसका यह असर रहा कि उक्त चार जिलों से मात्र 20 फीसदी कॉलेजों के ही परीक्षा फार्म जमा हुए हैं।
कॉलेजों ने शुल्क कम होने के इंतजार में इसे जमा नहीं किया। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पहले सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरने व जमा करने की तिथि 21 फरवरी तक और परीक्षा फार्म जमा करने की तिथि सहयुक्त कॉलेजों के लिए 24 फरवरी तक दोबारा बढ़ानी पड़ी है।
वहां साइंस यहां आर्ट्स में चल रहे विषय
इन सहयुक्त कॉलेजों की समस्या फीस तक नहीं सिमटी है। कॉलेज प्रतिनिधियों के अनुसार आश्वासन के बाद भी अभी तक कई विषयों के सिलेबस नहीं मिले हैं। इससे उनके पेपर भी नहीं बन पा रहे हैं और परीक्षाएं करानी हैं। यही नहीं कई विषय फिजिकल एजुकेशन, अर्थशास्त्र आदि लविवि में आर्ट्स में चलते हैं, जबकि वहां साइंस में चल रहे हैं। जिसकी वजह से इन विषयों के विद्यार्थियों के परीक्षा फार्म नहीं भरे जा पा रहे हैं न जमा हो पा रहे हैं। कॉलेज प्रतिनिधि इसके लिए भी विवि के चक्कर काट रहे हैं।

आचार संहिता को देखते हुए फीस पर निर्णय नहीं लिया जा सका, इससे कॉलेजों को अवगत कराया जा चुका है। छात्रहित में फार्म भरने व जमा करने तिथि बढ़ाई गई है। कुछ एक विषयों के सिलेबस नहीं बने हैं, इस पर डीन एकेडमिक्स की कमेटी काम कर रही है। विषयों को लेकर जो दिक्कत है, उसे भी जल्द दूर कर लेंगे।
- डॉ. विनोद कुमार सिंह, रजिस्ट्रार, लविवि
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