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भर्ती होने के लिए 17 घंटे इंतजार करता रहा केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचा ब्लैक फंगस का मरीज
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लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे मरीजों को इलाज मिलने में भी देरी हो रही है। इससे उनकी हालत बिगड़ रही है। ताजा मामला किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का है। यहां इलाज के लिए आये ब्लैक फंगस के मरीज को 17 घंटे बाद भर्ती किया गया। शनिवार से यह मरीज ट्रॉमा सेंटर के बाहर निजी वाहन में भर्ती होने का इंतजार करता रहा और रविवार दोपहर को इसे भर्ती किया गया।
सुल्तानपुर निवासी वकील अहमद के घर वालों ने कोरोना संक्रमण के बाद उसे सिर में दर्द की शिकायत हुई। इसकी वजह से उसकी एक-एक करके दोनों आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद भी तकलीफ बढ़ती जा रही थी तो इलाज के लिए शनिवार को लखनऊ ले आये। यहां एक निजी चिकित्सक की सलाह पर सीटी स्कैन कराया तो ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। इसके बाद मरीज को लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां पर कोरोना की जांच के नाम पर उनको 17 घंटे इंतजार करना पड़ा। ब्लैक फंगस से डरे घर वालों के लिए एक-एक मिनट भारी था। ऐसे में भर्ती होने में देरी मरीज की हालत और खराब हो गई। शुरुआत में मरीज को होल्डिंग एरिया में रखा गया, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर उसे वहां से निकाल कर गाड़ी में लिटा दिया गया। इसके बाद भर्ती होने का इंतजार करने लगे, जो रविवार दोपहर डेढ़ बजे समाप्त हुआ। डेढ़ बजे मरीज की कोरोना की जांच रिपोर्ट आई तो उसे वार्ड में भर्ती किया गया।
इलाज में नहीं हुई लापरवाही
होल्डिंग एरिया में मरीज का इलाज शुरू कर दिया गया था। कोविड की रिपोर्ट आने पर ही तय होता है कि मरीज को कोविड वार्ड में भर्ती करना है या पोस्ट कोविड वार्ड में। जांच रिपोर्ट आते ही मरीज को भर्ती किया गया है। मरीज के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है।
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डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
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सुल्तानपुर निवासी वकील अहमद के घर वालों ने कोरोना संक्रमण के बाद उसे सिर में दर्द की शिकायत हुई। इसकी वजह से उसकी एक-एक करके दोनों आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद भी तकलीफ बढ़ती जा रही थी तो इलाज के लिए शनिवार को लखनऊ ले आये। यहां एक निजी चिकित्सक की सलाह पर सीटी स्कैन कराया तो ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। इसके बाद मरीज को लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां पर कोरोना की जांच के नाम पर उनको 17 घंटे इंतजार करना पड़ा। ब्लैक फंगस से डरे घर वालों के लिए एक-एक मिनट भारी था। ऐसे में भर्ती होने में देरी मरीज की हालत और खराब हो गई। शुरुआत में मरीज को होल्डिंग एरिया में रखा गया, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर उसे वहां से निकाल कर गाड़ी में लिटा दिया गया। इसके बाद भर्ती होने का इंतजार करने लगे, जो रविवार दोपहर डेढ़ बजे समाप्त हुआ। डेढ़ बजे मरीज की कोरोना की जांच रिपोर्ट आई तो उसे वार्ड में भर्ती किया गया।
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इलाज में नहीं हुई लापरवाही
होल्डिंग एरिया में मरीज का इलाज शुरू कर दिया गया था। कोविड की रिपोर्ट आने पर ही तय होता है कि मरीज को कोविड वार्ड में भर्ती करना है या पोस्ट कोविड वार्ड में। जांच रिपोर्ट आते ही मरीज को भर्ती किया गया है। मरीज के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है।
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डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू