यूपी चुनाव 2022: कानून व्यवस्था में हुए सुधार को चुनावी मुद्दा बनाएगी भाजपा
भाजपा ने योगी राज में साढ़े चार साल में कानून व्यवस्था में हुए सुधार को चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है। गृहमंत्री अमित शाह ने इस संबंध में पदाधिकारियों को निर्देश दिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भाजपा विधानसभा चुनाव में योगी सरकार के साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में हुए कानून व्यवस्था में सुधार को मुख्य मुद्दा बनाएगी। पार्टी मुख्यालय में क्षेत्रीय अध्यक्षों, प्रदेश महामंत्रियों, चुनाव प्रभारी, सह चुनाव प्रभारी और संगठन प्रभारियों की तीन घंटे तक चली बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने फीडबैक लिया। उन्होंने प्रभारियों और सह प्रभारियों को फील्ड में जाकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने का एजेंडा सौंपा।
शाह ने सभी छह क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों से उनके इलाके के विधानसभा क्षेत्र में चुनाव जीतने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, इसकी रिपोर्ट 12 नवंबर को वाराणसी में होने वाली काशी क्षेत्र की बैठक में पेश करने को कहा।
उन्होंने सभी से उनके क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरण पर भी बात की और सपा, बसपा और कांग्रेस की स्थिति के साथ छोटे दलों के प्रभाव का फीडबैक लिया। बैठक में सामने आया कि भाजपा का मुख्य मुकाबला सपा से होगा। सहारनपुर, नोएडा, बुलंदशहर सहित कुछ अन्य जिलों में बसपा भी मुकाबले में है। पश्चिम क्षेत्र में किसान आंदोलन के चलते संभावित नुकसान की भरपाई का विकल्प तलाशने का सुझाव दिया गया।
पदाधिकारियों ने महंगाई, पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से जनता की नाराजगी का मुद्दा उठाया। इस पर शाह ने कहा कि साढ़े चार साल में कानून व्यवस्था में सुधार हुआ और अपराध में कमी आई है इसी को चुनावी मुद्दा बनाना है।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में सुभासपा और सपा के गठबंधन के साथ राजभर समाज के कुछ नेताओं के सपा में शामिल होने से संभावित नुकसान की भरपाई का विकल्प तैयार करने का भी फैसला हुआ। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, संगठन प्रभारी राधा मोहन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी शामिल हुए।