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यूपी के उपचुनाव में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर, हर सीट पर कड़ी टक्कर, जानें- किसके पक्ष मे हैं समीकरण

Sat, 17 Oct 2020 02:04 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 17 Oct 2020 02:04 PM IST
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BJP will face big challenge in bypoll in Uttar Pradesh.
प्रियंका गांधी वाड्रा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व मायावती। - फोटो : amar ujala

कोरोना काल, अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास और हाथरस कांड के बाद उत्तर प्रदेश की सात विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव पर सभी की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है उपचुनाव के नतीजों से बदले हालात में जनता के सियासी रुख का अंदाजा लगेगा। इन उपचुनावों में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है।

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जिन सात सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें छह पर भाजपा का कब्जा था। एकमात्र मल्हनी सीट सपा के पास थी। भाजपा ने अपनी मौजूदा सीटों में से दो पर दिवंगत नेताओं की पत्नी को चुनाव में उतारकर सहानुभूति कार्ड भी खेलने की कोशिश की है। हर सीट के अपने समीकरण हैं। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार तेज होने के साथ ही जनता का रुख भी साफ होने लगेगा।
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मल्हनी : निर्दलीय धनंजय ने बढ़ाई सरगर्मी
जौनपुर जिले की मल्हनी सीट पर दिग्गज सपा नेता पारसनाथ यादव के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। सपा के सामने इस सीट को बरकरार रखने की चुनौती है। पार्टी ने पारसनाथ यादव के पुत्र लकी यादव पर दांव लगाया है। यादव बहुल सीट पर लकी को सहानुभूति लहर की उम्मीद है। उनके सामने दो ब्राह्मण व दो क्षत्रिय प्रत्याशी हैं।
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भाजपा ने मनोज सिंह को मैदान में उतारा है। पार्टी की राह में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को रोड़ा माना जा रहा है। वहीं बसपा व कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारकर जातिगत समीकरणों को उलझा दिया है। बसपा ने जयप्रकाश दुबे और कांग्रेस ने राकेश मिश्र को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट से दो बार विधायक और एक बार जौनपुर से सांसद रहे बाहुबली धनंजय सिंह ने निर्दल उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है। 2017 के चुनाव में धनंजय निषाद पार्टी से दूसरे स्थान पर रहे थे।

3.62 लाख मतदाताओं वाले मल्हनी क्षेत्र में सर्वाधिक लगभग 90 हजार यादव, 55 हजार अनुसूचित जाति, 45 हजार क्षत्रिय, 40 हजार ब्राह्मण, 30 हजार मुस्लिम और 50 हजार गैर यादव ओबीसी वोटर हैं।

देवरिया : सभी का ब्राह्मणों पर दांव, अति पिछड़े निर्णायक

देवरिया सदर विधानसभा सीट पर सभी प्रमुख दलों ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारे हैं। यहां अति पिछड़े व वैश्य वोटर निर्णायक हो सकते हैं। भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के निधन के कारण हो रहे उपचुनाव में उनके बेटे अजय सिंह उर्फ पिंटू पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़ रहे हैं। वह चुनावी समीकरण में उलटफेर कर सकते हैं।

3.34 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में भाजपा, सपा, बसपा व कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रत्याशियों पर दांव लगाया है। यह इत्तेफाक है कि सभी प्रत्याशी त्रिपाठी हैं। भाजपा ने डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस से मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी और बसपा से अभयनाथ त्रिपाठी मैदान में हैं। सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अभयनाथ 2017 में भी बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े थे। वह तीसरे नंबर पर रहे थे।

नौगावां सादात: चेतन चौहान की विरासत संभालेंगी पत्नी

कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान के निधन के बाद अमरोहा जिले की नौगांवा सादात विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव मेंभाजपा ने उनकी पत्नी संगीता चौहान को उम्मीदवार बनाया है। अहम सवाल यह है कि क्षेत्र की जनता क्रिकेटर व राजनीतिज्ञ रहे चेतन चौहान की पत्नी को उनकी विरासत सौंपती है या नहीं?

सपा ने यहां मौलाना जावेद आब्दी और बसपा ने फुरकान अहमद को प्रत्याशी बनाया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में जावेद आब्दी दूसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस ने जाट बिरादरी से ताल्लुक रखने वाली डॉ. (श्रीमती) कमलेश सिंह पर दांव लगाया है। सपा की नजर मुस्लिमों के साथ ही सरकार से नाखुश मतदाताओं पर है, वहीं बसपा दलित-मुस्लिम समीकरण को परवान चढ़ने की उम्मीद संजोए है।

3.05 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर सर्वाधिक लगभग सवा लाख मुस्लिम मतदाता हैं। जाट मतदाताओं की संख्या 30-32 हजार है। चौहान (राजपूत) वोट लगभग 28 हजार हैं। लगभग 15 हजार सैनी, 10-12 हजार यादव और इतने ही गुर्जर मतदाता हैं।

घाटमपुर: बाजी मारने को सभी ने झोंकी ताकत

कानपुर जिले के घाटमपुर (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में सभी पार्टियों के सामने मतदाताओं को बूथ तक लाने की सबसे बड़ी चुनौती है। कैबिनेट मंत्री रहीं कमलरानी वरुण के निधन से खाली हुई इस सीट को बरकरार रखने के लिए भाजपा हरसंभव प्रयास कर रही है तो सपा, बसपा और कांग्रेस भी कसर नहीं छोड़ रहीं।

भाजपा ने यहां अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र नाथ पासवान को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने पूर्व विधायक इंद्रजीत कोरी, बसपा ने कुलदीप शंखवार और कांग्रेस ने डॉ. कृपा शंकर को चुनाव मैदान में उतारा है। इंद्रजीत को छोड़कर शेष तीनों प्रमुख उम्मीदवार पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।

3.18 लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 1.31 लाख पिछड़े वर्ग और लगभग एक लाख अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व अन्य सामान्य वर्ग के करीब 60 हजार वोटर हैं जबकि अल्पसंख्यक मतदाता करीब 25 हजार हैं।

टूंडला : भाजपा ने नए चेहरे पर लगाया दांव

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित फिरोजाबाद जिले की टूंडला विधानसभा सीट पर उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। डेढ़ साल से खाली इस सीट से भाजपा ने नए चेहरे प्रेमपाल धनगर पर दांव लगाया है। सपा से महाराज सिंह धनगर, बसपा से संजीव चक और कांग्रेस से स्नेहलता उर्फ  बबली चुनाव मैदान में हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से एसपी सिंह बघेल विधायक चुने गए थे। वह यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में वह आगरा से सांसद चुन लिए गए। टूंडला विधानसभा क्षेत्र से उनके इस्तीफे के बाद उपचुनाव हो रहा है। इस सीट पर कुल 3.64 लाख मतदाता हैं। इनमें बघेल, दलित और क्षत्रिय मतदाताओं की सर्वाधिक संख्या है।

बांगरमऊ : चुनावी बिसात में शह-मात का खेल शुरू

उन्नाव जिले की बांगरमऊ विधानसभा सीट पर टिकट न मिलने से रूठे नेताओं को मनाने और दूसरे दलों के असंतुष्टों को रिझाने का प्रयास किया जा रहा है। 2017 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार यहां जीत दर्ज की थी। सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कुलदीप सेंगर ने 87,657 वोट हासिल कर भाजपा को जीत दिलाई थी। कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा होने के बाद यहां उपचुनाव हो रहे हैं।

भाजपा प्रत्याशी के  सामने असंतुष्टों को मनाना और गुटबाजी से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी। इस सीट पर वर्ष 2007 और 2012 में सपा का कब्जा था। बसपा यहां 1996 और 2002 में जीत दर्ज कर चुकी है। भाजपा, सपा व बसपा ने यहां पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा से श्रीकांत कटियार, सपा से सुरेश पाल और बसपा से महेश पाल चुनाव मैदान में हैं।

वजूद के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही कांग्रेस के लिए भी यह उपचुनाव जिले में फिर से स्थापित होने का मौका है। कांग्रेस प्रत्याशी आरती बाजपेयी के पिता गोपीनाथ दीक्षित यहां से 1969, 1980, 1985 व 1991 में विधायक रहे। आरती के सामने भी पार्टी व परिवार के परंपरागत वोट को फिर से अपने पाले में लाने की चुनौती है।

बुलंदशहर : भाजपा का मुकाबला बसपा व रालोद से

बुलंदशहर सदर सीट पर विधायक और पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिरोही के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। भाजपा ने उनकी पत्नी उषा सिरोही को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने गठबंधन में यह सीट राष्ट्रीय लोकदल के लिए छोड़ी है। रालोद ने पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जगवीर सिंह के बेटे प्रवीण कुमार सिंह को मैदान में उतारा है।

बसपा ने पूर्व विधायक हाजी अलीम के भाई हाजी यूनुस और कांग्रेस ने सुशील चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। असदउद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने रियाजुद्दीन और भीम आर्मी चलाने वाले चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ने हाजी यामीन को मैदान में उतारा है। इस सीट पर कुल 3.88 लाख मतदाता हैं। सर्वाधिक संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है। उसके बाद अनुसूचित जाति के मतदाता हैं।

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