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'अच्छे दिन' के साथ ही 'बीते दिनों' की ओर भाजपा

Mon, 06 Oct 2014 01:47 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 06 Oct 2014 01:47 AM IST
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BJP wants to make changes.

हरियाणा में भाजपा की एक चुनावी सभा के मंच पर अमित शाह और यूपी के बाहुबली व दबंग नेता माने जाने वाली डीपी यादव के मिलन पर भाजपा उलझ गई है। भाजपा की तरफ से यह सफाई दी जा रही है कि यह मिलन सिर्फ संयोग भर था। इसकी न तो कोई सियासी वजह थी और न यूपी में कोई नए समीकरण बनने जा रहे हैं। बावजूद, इसके चर्चा व अटकलें थम नहीं रही हैं।

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सफाई सिर्फ भाजपा की तरफ से ही नहीं बल्कि खुद डीपी यादव की तरफ से भी दी गई है। यादव ने कहा है कि हरियाणा में भाजपा के मंच पर जाने के पीछे कोई सियासी वजह नहीं है। हरियाणा की अंबाला सीट से भाजपा से चुनाव लड़ रहे असीम गोयल हमारे मित्र हैं। इसलिए गए थे। जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की बात है तो वे अच्छा काम कर रहे हैं। इसलिए तारीफ कर दी। भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं में दम नहीं है।
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बावजूद इसके भाजपा के भीतर यह मिलन खलबली मचाए है। भाजपाई भले ही सार्वजनिक टिप्पणी से बच रहे हैं, पर निजी बातचीत में मानते हैं कि इसके पीछे कोई न कोई सियासी वजह जरूर है।
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यूपी में विधानसभा की 11 सीटों के उपचुनाव के जो नतीजे आए, उसके बाद भाजपा नेतृत्व समझ चुका है कि सिर्फ यूपी के भाजपा नेताओं के सहारे सूबे में सफलता संभव नहीं है। इसीलिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश में जुट गया है। यह मिलन भी उसी का हिस्सा है।

भाजपा में ही उठी विरोध की लहर

BJP wants to make changes.

वर्ष 2011 से ही भाजपा ने बाबूसिंह कुशवाहा के जरिये मायावती सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। भाजपा नेता एक दिन पहले तक सत्ता में आने पर कुशवाहा जैसे नेताओं को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे। उसी भाजपा के नेता अगले ही दिन दिल्ली में कुशवाहा का भाजपा में स्वागत करते दिखे। हालांकि इसका भाजपा में ही भारी विरोध शुरू हो गया। नेताओं के पुतले फूंके जाने लगे। आखिरकार कुशवाहा से भाजपा की सदस्यता स्थगित करने का पत्र मीडिया को देकर मुसीबत से पीछा छुड़ाया गया।

यादव को लेकर पहले भी हुआ बवाल
: डीपी यादव को लेकर भाजपा में पहले भी बवाल हो चुका है। पार्टी राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ अभियान चला रही थी। इसी बीच एक दिन दिल्ली में डीपी यादव को भाजपा में शामिल करने करने की घोषणा हो गई। कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त प्रतिक्रिया हुई। धरना-प्रदर्शन होने लगे।

अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अपने अंदाज में यह कहते हुए कि ‘यह नए जमाने की नई भाजपा के नए नेताओं का फैसला है’, अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। तब यादव को पार्टी में लेने का फैसला बदला गया।

इसलिए सफाई कोई कुछ भी दे, पर यह बात किसी को भी हजम नहीं हो सकती कि यादव सिर्फ मित्रता निभाने गए थे। भाजपा नेताओं का भी यह तर्क गले से नीचे नहीं उतरता कि उनकी जानकारी के बिना यादव मंच पर पहुंच गए। हरियाणा को इसलिए चुना गया कि यादव के रूप में एक कंकड़ पानी में फेंककर देखा जाए कि लोगों में हलचल कैसी होती है।

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