संविधान बदलना चाहती है भाजपा: प्रकाश अंबेडकर
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फुले, शाहू व आंबेडकर विद्वत मंच की ओर से शुक्रवार को यहां लक्ष्मण मेला मैदान में संविधान बचाओ रैली में केंद्र की भाजपा सरकार व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ निशाने पर रही। मुख्य वक्ता डॉ. भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश राव अंबेडकर ने कहा, संघ व भाजपा काफी समय से संविधान को बदलना चाहती थी, लेकिन बहुमत नहीं होने के कारण चुप थी।
वर्तमान में देश के 19 राज्यों में भाजपा की सरकार है। इसलिए संविधान में बदलाव की बात कर जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कर रही है।
अंबेडकर ने एससी-एसटी एक्ट में बदलाव मामले में केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में की गई अपील को दिखावा करार दिया। कहा, अब इसमें कोई फैसला नहीं आने वाला है। कोर्ट ने समय देकर जनता के गुस्से को कम करने की कोशिश की है।
मंच के संयोजक सीएल राजन ने कहा कि आज अंबेडकरवादियों को सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं अंबेडकर विवि के प्रो. डॉ. एनके मोरे, बाबू जगजीवन राम फाउंडेशन के अध्यक्ष जेआर हरकोटिया व भागीदारी आंदोलन के अध्यक्ष पीसी कुरील ने देश भर में दलित समुदाय पर बढ़ रहे हमलों पर नाराजगी जताई।
रैली में शामिल लोगों ने संविधान को किसी भी कीमत पर बदलने नहीं देने का संकल्प लिया। बाद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व राज्यपाल को एक मांग पत्र भेजा गया।
ये हैं प्रमुख मांगें
-एससी-एसटी एक्ट को निष्प्रभावी करने वाला आदेश कानून बनाकर रोका जाए।
-दो अप्रैल को गिरफ्तार बहुजन समाज के निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।
-सुप्रीम कोर्ट में दाखिल क्रीमी लेयर के नाम पर आरक्षण को समाप्त करने की मांग वाली याचिकाएं निरस्त हो।
-गाय के नाम पर एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वालों पर रासुका लागई जाए। - भीमा कोरेगांव में बहुजनों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- पदोन्नति में आरक्षण बहाल हो और निजी क्षेत्र, सेना व न्यायपालिका में आरक्षण लागू किया जाए।
- बहुजन समाज के महापुरुषों की मूर्तियां तोड़ने वालों पर रासुका लगाई जाए।