फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   bjp targets 2022 election with cabinet expansion

भाजपा ने 23 चेहरों से 2022 के चुनाव पर साधा निशाना, सियासी गणित के साथ सांस्कृतिक एजेंडे पर काम

Thu, 22 Aug 2019 09:35 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 22 Aug 2019 09:35 PM IST
विज्ञापन
bjp targets 2022 election with cabinet expansion
योगी कैबिनेट का पहला विस्तार - फोटो : एएनआई
बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में 23 चेहरों को शपथ दिलाकर भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव पर अभी से निशाना साध दिया है। सरोकारों पर ध्यान और जातीय गणित पर काम करके एक के बाद एक जीत का परचम फहराती चली आ रही भाजपा ने एक बार फिर इसी एजेंडे पर आगे बढ़ने का संदेश दिया है।
विज्ञापन


मंत्रिमंडल विस्तार में 18 नए चेहरों को शामिल करके और पांच चेहरों को तरक्की देकर 2022 के चुनावी गणित को मजबूत किया गया है। साथ ही सियासी समीकरणों के साथ जातीय हिसाब-किताब भी दुरुस्त रखने का प्रयास है। कामकाज को लेकर कठघरे में खड़े कुछ मंत्रियों को अभी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता न दिखा पाने के बावजूद जिस तरह कुछ मंत्रियों के इस्तीफे लिए गए, उससे भाजपा व सरकार की साफ-सुथरी छवि और साख तथा जनता के प्रति जवाबदेही का संदेश देने की कोशिश की गई है। 
विज्ञापन


दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश के साथ ही अगड़ों, पिछड़ों और अनुसूचित जाति के लोगों को एक साथ अपने पक्ष में लामबंद करके चुनावी लड़ाई को 60 बनाम 40 बनाने के फॉर्मूले पर काम कर रही पार्टी के रणनीतिकारों ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये भी इसी समीकरण को आगे बढ़ाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके जरिये सिर्फ क्षेत्रीय और जातीय गणित को ही साधने की कोशिश नहीं की गई है बल्कि लोगों को सांस्कृतिक सरोकारों पर सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश भी देने की कोशिश की गई है। पर, सबका साथ और सबका विश्वास के संदेश के साथ।

यह है वजह

भाजपा को आगे लगातार चुनावी चुनौतियों से निपटना है। अगले वर्ष पंचायतों के चुनाव होने हैं। इन चुनाव के निपटते-निपटते ही विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी कोटे की सीट के चुनाव शुरू हो जाएंगे। इनके पूरा-पूरा होते-होते विधानसभा चुनाव का बिगुल बज जाएगा। इसीलिए भाजपा ने इस पहले मंत्रिमंडल विस्तार के जरिये अगड़ों, पिछड़ों और अनुसूचित जाति के चेहरों का प्रतिनिधित्व और महत्व बढ़ाकर न सिर्फ जातीय और क्षेत्रीय गणित को दुरुस्त करने की कोशिश की है बल्कि इनके जरिये सियासी समीकरणों को भी साधने का ध्यान रखा गया है।

इसके पीछे एक वजह हाल में ही लोकसभा चुनाव के परिणामों का असर भी नजर आ रहा है। भाजपा को भले ही गठबंधन सहित प्रदेश में लोकसभा की 80 में 64 सीटें मिली हों, लेकिन पार्टी के रणनीतिकार 2022 को लेकर चौकन्ने हो गए हैं। इन्हें यह हजम नहीं हो पा रहा कि जब कन्नौज और बदायूं जैसी सीटें भाजपा को मिल सकती हैं तो बिजनौर और मुरादाबाद जैसी सीटें हाथ से निकल कैसे गईं।

इस तरह कोशिश

मुरादाबाद मंडल में लोकसभा की पांच सीटें हैं। इनमें से एक भी सीट अभी भाजपा के पास नहीं है। बिजनौर और नगीना सीटें बसपा ने भाजपा से छीन ली थीं।मुरादाबाद और संभल सपा के कब्जे में चली गई और अमरोहा बसपा के पास। भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार में बिजनौर से गुर्जर समाज के अशोक कटारिया को शामिल कर न सिर्फ बिजनौर बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी संख्या में मौजूद गुर्जरों को अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश की है।

साथ ही चौधरी भूपेंद्र सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाकर और चौधरी उदयभान को भी मंत्रिमंडल में लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खासी आबादी वाली जाट बिरादरी का महत्व और प्रतिनिधित्व बढ़ाकर न सिर्फ इस इलाके के सियासी समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश की है बल्कि रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के प्रभाव को और कम करने की तैयारी का संदेश दिया गया है। 

जीएस धर्मेश को शामिल करके पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटव समाज की अच्छी आबादी और भीम आर्मी के चंद्रशेखर जैसे नेताओं की काट की कोशिश की गई है। यही नहीं, बदायूं से महेश गुप्त और मैनपुरी से रामनरेश अग्निहोत्री को मंत्री बनाकर भविष्य के मद्देनजर यादव परिवार के इस गढ़ में न सिर्फ भाजपा की पैठ को और बढ़ाने का इंतजाम किया है बल्कि बदायूं और कन्नौज जैसी संसदीय सीटों को भाजपा की झोली में डालने का इनाम भी दिया गया है। इस संदेश के साथ कि जो भाजपा के साथ रहेगा, उसका और उस इलाके के सरोकारों एवं सम्मान का ख्याल रखा जाएगा।

ये भी है बानगी

कानपुर से दो कैबिनेट मंत्री थे। इनमें सत्यदेव पचौरी ने सांसद निर्वाचित होने के बाद त्यागपत्र दे दिया था। विस्तार में कानपुर शहर और देहात मिलाकर एक कैबिनेट और दो राज्यमंत्री बनाकर आसपास के इलाकों के अगड़े, पिछड़े और अनुसूचित जाति के समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। अ

ब कानपुर शहर और ग्रामीण से दो कैबिनेट और दो राज्यमंत्री हो गए हैं। कानपुर के पड़ोसी जिले औरैया से लाखन सिंह राजपूत को मंत्रिमंडल में लेकर कानपुर, आगरा और फर्रुखाबाद इलाके में मौजूद ब्राह्मणों के साथ कुर्मियों, लोध तथा गड़रिया एवं वैश्यों को साधकर सियासी समीकरणों को और दुरुस्त किया गया है।

देश की सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली काशी से दो स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाकर और एक कैबिनेट मंत्री बनाकर सरोकारों को महत्व देने का संदेश देने तथा संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलिया, मिर्जापुर जैसे इलाकों से भी अगड़े , पिछड़े और अनुसूचित जाति के चेहरों को लेकर पूर्वांचल के अगड़ा, पिछड़ा और अनुसूचित जाति के समीकरणों को और मजबूती देते हुए सियासी गणित पर काम किया गया है। 

अयोध्या को फिर भागीदारी नहीं
वैसे भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे में अहम स्थान रखने वाली अयोध्या को मंत्रिमंडल विस्तार में भी जगह नहीं मिल पाई है। इसके पीछे भाजपा के रणनीतिकारों की सोच शायद यह रही है कि अयोध्या को लेकर जिस तरह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सक्रिय हैं, उसके मद्देनजर यहां से मंत्री न बनाए जाने से भी समीकरणों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। वैसे पूरे अयोध्या मंडल को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई है, पर इससे कोई बहुत विपरीत प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed