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भाजपा का जोर अब कार्यकर्ताओं की नाराजगी व मनमुटाव दूर करने पर

Thu, 24 Jun 2021 11:14 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 24 Jun 2021 11:14 AM IST
सार

पार्टी की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि पुरानी बातें भूलकर सभी को एकजुट होकर मिशन 2022 के लिए जुटना होगा।

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BJP's emphasis is now on removing the displeasure and estrangement of the workers

विस्तार

आगामी विधानसभा चुनाव के  मद्देनजर सरकार और संगठन का जोर अब असंतुष्ट नेताओं व कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर है। यही नहीं सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच दूरियां खत्म कराने के बाद भाजपा अब पार्टी के अन्य नेताओं के बीच मनमुटाव दूर कराने की मुहिम में जुटी है। 

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पार्टी की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि पुरानी बातें भूलकर सभी को एकजुट होकर मिशन 2022 के लिए जुटना होगा। अपनी ही सरकार में तवज्जो न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं को भी संतुष्ट करने की रणनीति बनाई गई है। नेताओं व कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए नौकरशाही की मनमानी पर भी अंकुश लगाया जाएगा।

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भाजपा के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में मंगलवार को प्रदेश सरकार के मंत्रियों और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की करीब चार घंटे तक चली बैठक के बाद सरकार और संगठन स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी व नेताओं के आपसी मनमुटाव दूर कराने की मुहिम छेड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष ने साफ कर दिया है कि सम्मान सभी को मिलेगा, लेकिन पुरानी बातें भूलकर पूरी ताकत से एकजुट होकर 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए लगना होगा।

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भरोसेमंद सूत्रों के  अनुसार बैठक में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने संगठन और सरकार के सामने कार्यकर्ताओं का दर्द बयां किया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार, डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी सहित अन्य नेताओं ने कहा कि काम न होने से जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। संगठन से लेकर सरकार तक में कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे हैं। सपा व बसपा सरकार के समय से कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज राजनीतिक मुकदमे भी वापस नहीं हुए हैं। वहीं श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य सहित कई अन्य मंत्रियों ने नौकरशाही के हावी होने का मुद्दा उठाया। मंत्रियों का कहना था कि शासन से लेकर जिलों के डीएम व कप्तान तक उनकी नहीं सुनते।


अब कमियां गिनाने का वक्त नहीं
बैठक में मिले फीडबैक के बाद संगठन ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की कवायद शुरू की है। निगम, आयोग, बोर्ड और समितियों में नियुक्तियों के साथ कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की कवायद शुरू की जा रही है। वहीं मंत्रियों को अपने निर्वाचन क्षेत्र व प्रभार वाले जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद कर उन्हें संतुष्ट करनेे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तबादलों में भी नेताओं-कार्यकर्ताओं के वाजिब मामलों की सुनवाई करने को कहा गया है। सूत्रों के अनुसार बीएल संतोष ने मंत्रियों से दो टूक कहा कि अब नाराजगी जताने या कमियां गिनाने का वक्त नहीं है। पार्टी अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। पार्टी का एकमात्र उद्देश्य यूपी में फिर से भारी बहुमत से सरकार बनाना है। लिहाजा सब कुछ भूलकर चुनाव जीतने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।



संवादहीनता दूर कर एक सूत्र में पिराए जाएंगे नेता
भाजपा ने चुनाव से पहले धरातल पर किसी भी प्रकार की संवादहीनता, विवाद या मनमुटाव को समाप्त करने कर सभी प्रमुख व प्रभावशाली नेताओं को एक सूत्र में पिरोने की योजना बनाई है। पार्टी में अब तक उपेक्षित चल रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार, लक्ष्मीकांत बाजपेयी और रमापति राम त्रिपाठी के भी अनुभव और उनके जातीय वोट बैंक का लाभ लेने के लिए चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। 

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