यूपी में भाजपा की चुनौतियां घटीं पर चिंताएं और गहराईं
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यूपी में भारी बहुमत से सरकार बनने से भगवा टोली की चुनौती भले ही घट गई हो लेकिन चिंता कम नहीं हुई है। पहले वनवास खत्म करके सूबे में सत्ता पाने की फिक्र थी तो अब इसे सहेजने की दिखाई दे रही है। जिससे 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा जनता की पहली पसंद बनी रहे।
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की दो दिन की बैठक में जिस तरह बार-बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक के मुंह से पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को सत्ता में होने की मर्यादा, संयम और सरकार की सीमा समझाई गई।
नसीहतें मिलीं तो आगाह भी किया गया। दिमाग में यह बात बैठाने की कोशिश की गई कि वे अब विपक्ष में नहीं बल्कि सरकार में आ चुके हैं, उससे भी यह बात साफ हो गई।
दो दिनी इस बैठक ने न सिर्फ सरकार और भाजपा के सियासी सरोकारों पर प्रतिबद्धता को साफ कर दिया बल्कि यह संदेश भी दे दिए कि कोई आलोचना करे। विपक्ष फैसलों को ध्रुवीकरण से जोड़े। भाजपा पर हिंदुत्व को धार देने के आरोप लगें। भगवा टोली के रणनीतिकार टस से मस नहीं होने वाले।
सपा व बसपा जैसा बनने से बचने की कोशिश
लोकसभा में सूबे की 80 सीटों में 73 मिल गई हों। विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को भारी बहुमत मिल गया हो। पर, पार्टी के रणनीतिकारों के दिमाग में 2019 को लेकर अभी से चिंता छाई है।
इसीलिए उन्हें प्रतीकों का सहारा लेने और ध्रुवीकरण की राजनीति से न तो परहेज है और न इसमें कोई हिचक। कोशिश यह भी है कि जनता में यह संदेश न जाने पाए कि सत्ता मिलने के बाद भाजपा भी सपा और बसपा की तरह आम लोगों के सरोकारों को भूल गई है। पार्टी के लोगों को मनमानी करने की छूट मिल गई है।
सरोकारों के सहारे भी संदेश
मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में छुरेबाजों को संरक्षण देने वाली सरकार न होने की बात कहकर यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार किसी वर्ग के दबाव में नहीं आने वाली।
बात भले ही वह बूचड़खाने के बंद कराने के बहाने से कर रहे हों लेकिन वह यह संदेश देना चाहते हैं कि किसी मनमानी अब नहीं चलने वाली। समझा जा सकता है कि योगी ने जहां एक वर्ग को चेताया तो दूसरे वर्ग को यह भरोसा भी दिलाने की कोशिश की कि यह सरकार उनके सरोकारों की चिंता भूली नहीं है।
हिंदूवादी होने के ठप्पे से कोई परेशानी नहीं
गंगा की सफाई की बात हो या 2019 में प्रयाग में आयोजित अर्धकुंभ में स्वच्छ गंगाजल उपलब्ध कराने का वादा, किसी का तुष्टीकरण न करने का संकल्प हो या यह बताने की कोशिश कि पहली बार किसी सरकार ने नवरात्र पर देवी मंदिरों की व्यवस्था ठीक कराई।
मतलब यही सरकार हिंदुत्व के सरोकारों का ख्याल रखने वाली है। बाकी सरकारों की तरह यह सरकार तुष्टीकरण की फिक्र नहीं करने वाली और न इस बात को लेकर हिचकने वाली कि उस पर हिंदूवादी होने का आरोप लगेगा।
योगी की तरफ से जब शक्तिपीठों पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने, अयोध्या व मथुरा को 24 घंटे बिजली आपूर्ति कराने और रामनवमी पर अयोध्या की साफ-सफाई कराने की बात कही गई तो यह बात और साफ हो गई।
बीच-बीच में 2019 की चिंता जोड़ने से यह साफ हो गया है कि यह सब बताने के पीछे लोकसभा चुनाव के लिए समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश भी है।
शाह, योगी व माथुर ने इस तरह समझाया
चिंता की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उद्घाटन सत्र के संबोधन के साथ हुई और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के समापन सत्र के भाषण तक जारी रही। योगी ने कार्यकर्ताओं से विपक्षी मानसिकता से उबरने का आग्रह किया।
शायद इसीलिए उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि सरकार अगर किसी को कानून हाथ में लेने के लिए आगाह कर रही है तो कार्यकर्ताओं को भी इसका पालन करना चाहिए। अगर अपने ही कार्यकर्ता नहीं मानेंगे तो दूसरों पर सख्ती कैसे की जाएगी।
कार्यकर्ता हताश न हों, इसलिए यह भी जोड़ा कि सरकार उनकी भावनाओं को आहत नहीं होने देगी। प्रदेश प्रभारी ओमप्रकाश माथुर ने भी इसी तरह की बात की।
उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कार्यकर्ताओं की सिफारिशों पर भी गौर होगा। काम भी होंगे। पर, मर्यादा तोड़ने वाला कोई काम नहीं करना है। कारण, इससे 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के रास्ते में बाधाएं खड़ी होंगी।
कार्यकर्ताओं की मनमानी का पड़ेगा असर
शाह भी इन सरोकारों को छुए बिना नहीं रहे। उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि कार्यकर्ताओं के सत्ता के मद में आने और मनमानी का संदेश गया तो भाजपा का हाल भी सपा और बसपा जैसा हो सकता है। इससे बड़ा नुकसान होगा।
तुष्टीकरण, एक वर्ग विशेष को संरक्षण देने वाले, जातिवाद और परिवारवाद को मजबूत बनाने वालों को फिर मजबूत बनने का मौका मिल जाएगा। प्रदेश व केंद्र दोनों जगह भाजपा सरकार में है।
इसलिए अब बच नहीं सकते। कोई बहाना नहीं चलेगा। जहां जीते हैं वहां बढ़त बनाए रखने के लिए जुटने की जरूरत है। जहां वोट नहीं मिले हैं वहां वोटों का प्रबंध करने की जरूरत है।