संगम और संतों के सहारे ब्रांडिंग करेगी भाजपा, 27 को प्रयाग से सियासी संदेश देंगे अमित शाह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक महीने में प्रदेश में पांच स्थानों पर अलग-अलग सरोकारों पर सभाएं करने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी 27 जुलाई को प्रयाग में संगम तट पर सरोकारों की सियासत को परवान चढ़ाएंगे। जानकारी के मुताबिक, शाह संगम तट पर गंगा आरती करने के अलावा अखाड़ा परिषद जाकर संतों से भी बातचीत करेंगे।
शाह पार्टी के प्रमुख नेताओं से विचार-विमर्श के साथ ही काशी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं संग बैठक भी करने वाले हैं। प्रधानमंत्री मोदी के एक महीने में उत्तर प्रदेश के पांच दौरे, पांच सभाओं सहित आठ कार्यक्रमों के बीच अमित शाह का एक महीने में दूसरी बार यूपी आना और प्रयाग जाकर संतों से मुलाकात करना पूरे मामले को खास बना रहा है। शाह के प्रयाग प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी इलाहाबाद में रहेंगे।
इसलिए दौरा बना खास
वैसे तो संगम और कुंभ के नाते प्रयाग का अलग ही महत्व है, पर भगवा टोली के लिए इसका महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इनके सरोकारों को धार और ताकत देने में इस स्थान के फैसले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। भाजपा को फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाले राम मंदिर आंदोलन का ताना-बाना भी प्रयाग में संगम तट पर ही बुना गया था। अगले वर्ष लोकसभा का चुनाव है और संयोग से प्रयाग में कुंभ भी। कुंभ में देश और दुनिया भर से आम लोगों के साथ हिंदुओं की लगभग सभी शाखाओं से जुडे़ अखाड़ों के प्रमुखों के अलावा अन्य प्रमुख धर्मस्थानों से जुड़े लोग जुटते हैं।
लंबे समय बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि केंद्र और प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है। ऐसी सरकार जिसे हिंदुओं के सरोकारों वाली माना जाता रहा है। भगवा टोली के लिए ब्रांडिंग करने और चुनावी समीकरण दुरुस्त करने का इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता। माना जा रहा है कि इसीलिए शाह की कोशिश है कि आयोजन को लेकर भाजपा सरकारों के समर्पण और सरोकारों की चिंता का संदेश ही न बना रहे बल्कि उन्हें केंद्र व प्रदेश में अपनी और अपनों की सरकार होने का एहसास भी हो।
यह है पूरा कार्यक्रम
जानकारी के मुताबिक, संगम पर आरती करने के साथ शाह लेटे हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके अलावा किले का भ्रमण करेंगे। इसके बाद वे बाघम्बरी मठ जाकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मिलेंगे। अन्य कई संतों से भी शाह की बातचीत होगी। वे कुंभ की तैयारियों की जानकारी लेने के साथ संतों की तरफ से संगम तट पर स्थायी निर्माण के बारे में संभावनाएं टटोलेंगे।
संतों को साधने की रणनीति का भी हिस्सा
संत-महात्मा अयोध्या में जल्द से जल्द राम मंदिर निर्माण की मांग कई बार उठा चुके हैं। कुंभ तक अविरल और निर्मल गंगा की मांग पर भी संत मुखर हैं। अखाड़ा परिषद फर्जी संतों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश में कुछ संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर भी संत नाराजगी जता चुके हैं। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयाग करने की मांग भी उठ रही है।
संत देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ ही संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा की मांग भी उठा चुके हैं। ऐसा लगता है कि शाह ने इसी सबको देखते हुए प्रधानमंत्री के 28 जुलाई को लखनऊ आगमन की पूर्व संध्या पर प्रयाग पहुंचकर संतों से संवाद का फैसला किया है। राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो शाह का प्रयाग दौरा लोकसभा चुनाव के मद्देनजर संतों को साधने की रणनीति का भी हिस्सा है।