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यूपी में एक निपटी तो दूसरी परीक्षा की तैयारी में है भाजपा

Tue, 28 Mar 2017 03:51 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 28 Mar 2017 03:51 PM IST
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BJP plans to fight local body election in Uttar Pradesh.

भाजपा यूपी विधानसभा चुनाव की परीक्षा में तो अव्वल नंबर से पास हो गई लेकिन अब दूसरी परीक्षा सिर पर है। यह परीक्षा है निकाय चुनाव की। नगर निगमों में पार्टी का झंडा फहराकर महानगरों में स्थानीय सरकार बनाने की चुनौती है।

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वैसे तो ज्यादातर नगर निगमों में इस समय भाजपा का ही कब्जा है लेकिन छोटे शहरों की स्थिति एकदम भिन्न है। इनमें अधिकतर पर सपा काबिज है। इस नाते भाजपा के सामने महानगरों में अपना कब्जा बरकरार रखते हुए छोटे शहरों व कस्बों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने की चुनौती सामने है। प्रदेश में अगस्त से पहले निकायों की चुनाव प्रक्रिया पूरी होनी है।
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नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव के रूप में भाजपा के लिए परीक्षा इसलिए भी है क्योंकि वर्ष 2000 के बाद सूबे में भाजपा की सरकार होते हुए ये चुनाव होंगे। स्वाभाविक रूप से एक-एक सीट का नतीजा भाजपा की प्रतिष्ठा का पैमाना बनेगा। साथ ही प्रदेश सरकार का कामकाज भी कसौटी बनेगा।
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दरअसल, विधानसभा की 403 सीटों में गठबंधन के साथियों के साथ 325 सीटें जीतने के बाद यह साफ है कि भाजपा महानगरों के साथ छोटे नगरों अर्थात नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत वाले ज्यादातर स्थानों पर बढ़त बनाने में सफल रही है। जाहिर है, निकाय चुनाव में उसके सामने इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती रहेगी।

इसलिए है चुनौती

BJP plans to fight local body election in Uttar Pradesh.

प्रदेश में इस समय 14 नगर निगम हैं। 2012 में सिर्फ 12 के चुनाव हुए थे। दस में भाजपा जीतने में कामयाब रही थी। इलाहाबाद में बसपा समर्थित अभिलाषा गुप्ता नंदी जीती थी। अभिलाषा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गई हैं। इस प्रकार सूबे के जिन 12 नगर निगमों में 2012 में चुनाव हुए थे उनमें 11 भाजपा के कब्जे में हैं।

बरेली में सपा के आईएस तोमर महापौर हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा मुरादाबाद में सात में दो, मेरठ की सात में छह, गाजियाबाद में सभी पांच, अलीगढ़ की सभी सात, आगरा की सभी नौ, बरेली की सभी नौ, लखनऊ की नौ में आठ, कानपुर नगर की 10 में सात, वाराणसी की आठ में छह भाजपा व दो गठबंधन, इलाहाबाद की नौ में भाजपा को आठ व एक गठबंधन, गोरखपुर में नौ में आठ, झांसी की सभी चार सीटों पर कब्जा करने में कामयाब रही है। साफ है कि विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद छोड़कर ज्यादातर महानगरों में भाजपा ने अपनी बढ़त न सिर्फ बनाए रखी है बल्कि बढ़ाई भी है।

जाहिर है, भाजपा के सामने 10 नगर निगमों को कब्जे में बनाए रखने की चुनौती है। उधर, बरेली में विधानसभा चुनाव की बढ़त को बरकरार रखते हुए वहां कब्जा करने की परीक्षा से गुजरना है। साथ ही मुरादाबाद नगर निगम में फिर जीत दर्ज करके यह साबित करना है कि विधानसभा चुनाव में अच्छी स्थिति न होने के बावजूद उसके महापौर की पकड़ बरकरार है।

यह भी है वजह

BJP plans to fight local body election in Uttar Pradesh.

नगर पालिका परिषदों व नगर पंचायतों में ज्यादातर दूसरे दलों या निर्दलीयों के कब्जे में हैं। पर,  विधानसभा चुनाव में इनमें ज्यादातर पर भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाने में कामयाब हुए हैं।

स्वाभाविक रूप से भाजपा को निकाय चुनाव में इन स्थानों पर जीत सुनिश्चित करने की परीक्षा से गुजरना है। परीक्षा सिर्फ भाजपा की नहीं होनी है बल्कि पार्टी विधायकों व सांसदों की भी होनी है।

निकाय चुनाव में इन स्थानों पर पार्टी उम्मीदवारों को मिलने वाले वोट निर्वाचित भाजपा विधायकों की शुरुआती कामकाज की कसौटी बनेंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि वहां के लोगों का भाजपा के प्रति झुकाव स्थिर है या वह सिर्फ विधानसभा चुनाव तक था।

निकाय चुनाव में मिलने वाले वोटों को विधायकों के साथ सांसदों के कामकाज की भी कसौटी माना जाएगा। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति का आधार भी बनेंगे।

यह भी हैं कारण

BJP plans to fight local body election in Uttar Pradesh.

जैसी की संभावना है कि इस बार दो नए नगर निगमों सहारनपुर व फिरोजाबाद में भी चुनाव होंगे। भाजपा को 11 नगर निगमों में अपना कब्जा बनाए रखते हुए इन दो नए नगर निगमों में भी झंडा फहराकर यह साबित करना है कि विधानसभा चुनाव में उसे मिला वोट कोई तुक्का नहीं बल्कि उसकी रणनीति का परिणाम है।

यही नहीं, विधानसभा चुनाव में पराजित होने के बावजूद भाजपा महानगरों में अपनी बढ़त लगातार बढ़ाती रही है। जिसका प्रमाण यह है कि 2000 में उसके छह महापौर चुने गए थे जो 2006 में हुए चुनाव में बढ़कर आठ हो गए। वर्ष 2012 में यह आंकड़ा बढ़कर 10 हो गया। जो अभिलाषा के भाजपा में शामिल होने के बाद  अब 11 हो गया है।

देखें, अभी नगर निगमों पर इन पार्टियों का है कब्जा

BJP plans to fight local body election in Uttar Pradesh.
नगर निगम--महापौर--पार्टी
लखनऊ--डॉ. दिनेश शर्मा--भाजपा (अब उप मुख्यमंत्री होने के नाते त्यागपत्र)
मेरठ--हरिकांत अहलूवालिया--भाजपा
अलीगढ़--शकुंतला भारती--भाजपा
मुरादाबाद--विनोद अग्रवाल--भाजपा

बरेली--आईएस तोमर--सपा
आगरा--इंद्रजीत सिंह वाल्मीकि--भाजपा
कानपुर--जगतवीर द्रोण--भाजपा
झांसी--किरन वर्मा--भाजपा

इलाहाबाद--अभिलाषा गुप्ता--अब भाजपा
गाजियाबाद--आशु वर्मा--भाजपा
गोरखपुर--सत्या पांडेय--भाजपा
वाराणसी--रामगोपाल मोहले--भाजपा
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