सामाजिक सम्मेलनों से चुनावी समर सजाने में जुटी भाजपा
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मिशन 2019 की तैयारियों में जुटी भाजपा ने सामाजिक सम्मेलनों के जरिये चुनावी समर सजाने की रणनीति बनाई है। मंगलवार को यहां विश्वेश्वरैया सभागार में प्रजापति सम्मेलन के साथ इस पर काम शुरू हो गया। बुधवार को राजभर समाज का सम्मेलन होगा।
बृहस्पतिवार को नाई, सविता, ठाकुर और सेन जातियों के प्रतिनिधियों का इसी स्थान पर सम्मेलन होगा। इसके बाद मेरठ में 11 व 12 अगस्त को पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद सम्मेलनों का सिलसिला शुरू होगा।
निषाद, कश्यप, बिंद, केवट, कहार जातियों का 24 और भुर्जी, भड़भूजा, कांदू, कसौधन जाति का सम्मेलन 25 अगस्त को प्रस्तावित है। प्रदेश स्तर पर इन सम्मेलनों के बाद लोकसभा और विधानसभा के सभी क्षेत्रों में यह काम शुरू हो जाएगा।
पार्टी के रणनीतिकारों ने पिछड़ों के साथ दलितों के भी अलग-अलग तबकों के सम्मेलन की योजना बनाई है। पर, अभी पिछड़ों के सम्मेलनों का ही सिलसिला शुरू किया गया है।
सामान्य वर्ग के लोगों के भी पेशे के आधार पर सम्मेलन करने की तैयारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा के गठजोड़ की संभावनाओं को देखते हुए भगवा टोली के रणनीतिकारों ने चुनावी बिसात इस तरह बिछानी शुरू की है जिसमें गठबंधन के मोहरे भाजपाई गोटों को मात न दे सकें। इसी नाते भगवा टोली ने खेतिहर और पेशेवर दोनों प्रकार की जातियों पर फोकस किया है।
इस तरह तैयारी
साफ है कि हर सम्मेलन में उस जाति के औसतन 400 लोगों की जुटान लखनऊ में होगी। सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समाज के लिए किए गए काम बताएंगे।
इसके अलावा आगे की योजनाओं की जानकारी देंगे। पिछड़ों में प्रभावी संदेश देने के लिए उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य को इन सम्मेलनों का प्रभारी बनाया गया है। संगठन की तरफ से प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष बाबूराम निषाद को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हर कोई जोड़ेगा अपने समाज को
प्रत्येक समाज के सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों का जिलों में भी एक समूह बनेगा। यही समूह चुनाव के दौरान अपने-अपने समाज को भाजपा के साथ लाने का काम करेगा।
यहां हिस्सा लेने वाले हर समाज के प्रतिनिधि लोकसभा व विधानसभा क्षेत्रों में अपने-अपने समाज के सम्मेलन करेंगे। इनमें उस वर्ग और पिछड़ों के लिए किए गए काम बताकर लोगों को लामबंद किया जाएगा। मेरठ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के बाद 14 अगस्त से सम्मेलनों का सिलसिला फिर शुरू हो जाएगा। बढ़ई, विश्वकर्मा, तेली, तमोली, मौर्य, शाक्य, कुशवाहा, कोइरी, लोहार, यादव, पाल, गड़रिया, जाट, गूजर, धोबी, दर्जी व लोध सहित अन्य जातियों के भी सम्मेलन होंगे।