भाजपा ने बनाया अखिलेश की खिलाफत का प्लान
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लोकसभा चुनाव में मिली जबर्दस्त सफलता के बाद भाजपा के रणनीतिकारों ने विश्राम व सत्ता का सुख लेने के बजाय कार्यकर्ताओं को यूपी की सत्ता पाने का सपना दिखाते हुए संघर्ष की राह पर उतारने का फैसला किया है।
तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर देने की रणनीति बनाई है। भले ही तकनीकी तौर पर यूपी में बसपा मुख्य विपक्षी दल हो लेकिन मैदान में यह भूमिका भाजपा निभाएगी। पार्टी सपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के मूड में है।
जनता की समस्याओं पर सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरेगी। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से जुड़े लोगों से निरंतर संवाद व संपर्क की कार्ययोजना बनेगी, जिससे ये लोग पार्टी से जुड़े रहें।
सरकार के खिलाफ संघर्ष के लिए क्षेत्रों की समस्याओं व वहां के मुद्दों का पूरा ब्यौरा जुटाने की योजना भी बनी है।
यूपी को लेकर डर में हैं भाजपाई
दरअसल, संघ परिवार के रणनीतिकार मोदी लहर से मिली सफलता से खुश तो हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की चिंता से मुक्त नहीं हो पाए हैं।
इनका मानना है कि यूपी का राजनीतिक वातावरण और परिदृश्य बदले बगैर इस परिवर्तन के स्थायी रहने की उम्मीद करना सच्चाई से आंखें चुराना होगा। इनका यह भी मानना है कि लोकसभा चुनाव केंद्रीय मुद्दों पर था।
इसलिए स्थानीय मुद्दे, समीकरण व जातिवादी तत्व नतीजों पर हावी नहीं हो पाए, लेकिन विधानसभा चुनाव में ये सारी बातें जीत व हार में काफी निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
इसलिए वे चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में मिली जीत का मनौवैज्ञानिक लाभ उठाते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी जाए।
समर्थन को शक्ति में बदलेंगे
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते भी हैं कि लोकसभा चुनाव में जनता से मिला समर्थन अकल्पनीय है। इसे संजोकर रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
इसके लिए कार्ययोजना बन रही है। जल्द ही कुछ कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। फिलहाल पार्टी के प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि जीत पर इतराने के बजाय वे पहले से ज्यादा विनम्र व जिम्मेदार बनें।
स्थानीय स्तर पर लोगों से मिलें-जुलें। उनकी समस्याओं के समाधान में मदद करें। स्थानीय स्तर पर कोई दिक्कत हो तो जिला या प्रदेश इकाई को बताएं।
केंद्र सरकार के कामकाज को लोगों के बीच रखें और उनकी अपेक्षाएं पार्टी को बताएं। वाजपेयी ने बताया कि प्रदेश सरकार व सरकारी मशीनरी के जनविरोधी फैसलों के खिलाफ संघर्ष की रणनीति भी बन रही है।
जल्द ही पूरे प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष करते दिखेंगे।
मनौवैज्ञानिक बढ़त लेने का प्रयास
विधानसभा चुनाव में अभी लगभग तीन साल बचे हैं, पर रणनीतिकारों का मानना है कि इन चुनाव की तैयारी में देरी भाजपा की चुनौतियां बढ़ा सकती है।
अभी लोगों को यह समझाने में आसानी रहेगी कि मोदी के नेतृत्व और फैसलों का पूरा लाभ लेने के लिए उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार जरूरी है न कि सपा की।
यह भी समझाया जा सकेगा कि भाजपा जब अपने अकेले दम पर केंद्र में सरकार बनाने लायक वोट हासिल कर सकती है तो पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपने दम पर अकेले सत्ता क्यों नहीं मिल सकती।
इसमें देरी लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त का मनोवैज्ञानिक लाभ भाजपा से छीन लेगी।
अखिलेश को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी
इसके लिए भाजपा ने अखिलेश सरकार को कानून-व्यवस्था व मुस्लिम तुष्टीकरण के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करने का फैसला किया है।
साथ ही बिजली, पानी व विकास जैसे जनता से जुड़े अन्य मुद्दों पर सपा सरकार को घेरने की कार्ययोजना बनाई है।
भाजपा की तरफ से लोगों को यह भी समझाया जाएगा कि राज्य सरकार की अड़ंगेबाजी के कारण केंद्र के कई फैसलों का लाभ राज्यों को नहीं मिल पाता, इसलिए सूबे में भी भाजपा की सरकार बनवाएं।