शाह की परीक्षा में पास होने को पसीना बहा रहे हैं भाजपाई
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भाजपाई इन दिनों परीक्षा पास करने की तैयारी में जुटे हैं। परीक्षा 11 जुलाई को कानपुर में होनी है। परीक्षक होंगे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह।
उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में महासंपर्क अभियान की जमीनी हकीकत के बारे में तो सवाल होंगे ही। साथ ही जिलेवार सक्रिय सदस्यता की स्थिति का भी उनसे फीडबैक लिया जाएगा।
सूबे के पार्टी नेता इस कोशिश में हैं कि महासंपर्क अभियान और सक्रिय सदस्यता के आंकड़ों को ठीक कर लिए जाएं जिससे इनका सटीक जवाब देने में आसानी हो। इसीलिए महासंपर्क अभियान से लेकर आंदोलनों तक के लिए पार्टी ने प्रदेश और क्षेत्र के पदाधिकारियों को एक-एक जिले की जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें इस काम की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है।
प्रभारी कहां है और क्या कर रहे हैं, इसके लिए क्षेत्रों में नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। नियंत्रण कक्षों से प्रतिदिन यह जानकारी मांगी जा रही है कि अमुक व्यक्ति ने किस क्षेत्र में कितने लोगों से संपर्क किया है। इसी तरह सक्रिय सदस्यता की जानकारी और धरना-प्रदर्शन के बारे में प्रदेश मुख्यालय से लेकर क्षेत्र और जिला स्तर पर रोज का फीडबैक जुटाया जा रहा है।
खास मकसद से की जा रही हैं कवायदें
पार्टी ने 6 से 10 जुलाई तक पूरे प्रदेश में महासंपर्क अभियान और सदस्यता का विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके लिए पार्टी के ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश तक के नेताओं का सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया जा रहा है। मुख्य रूप से जोर इस पर है कि मिस्ड कॉल के जरिये प्राथमिक सदस्यता का आवेदन करने वालों में कम से कम 60 प्रतिशत लोगों से इस दौरान संपर्क और संवाद का काम पूरा हो जाए।
एक वजह यह भी
दरअसल, पार्टी के रणनीतिकार चाहते हैं कि सदस्यता और महासंपर्क अभियान का काम किसी भी स्थिति में अगस्त तक निपटा लिया जाए, जिससे संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर आगे की तैयारियों में जुटा जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, महासंपर्क और सदस्यता फॉर्म भरवाने व सक्रिय सदस्य बनाने का काम मिस्ड कॉल की तुलना में अभी आधा भी नहीं पहुंचा है। यह स्थिति प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक को चिंता में डाल रही है। कारण, भाजपा के रणनीतिकार इस बार जिला पंचायतों का चुनाव लड़कर सूबे में अपनी जमीन का अंदाज लगाना चाहते हैं।
इनका मानना है कि इन चुनावों को लड़ने से दो लाभ होंगे। सिंबल पर चुनाव न होने से बहुत बदनामी भी नहीं होगी और पार्टी को क्षेत्रवार पकड़ का अंदाज भी हो जाएगा। उस लिहाज से विधानसभा चुनाव 2017 की लड़ाई के लिए मोर्चाबंदी को और दुरुस्त किया जा सकेगा। बताया जाता है कि इन्हीं बातों को लेकर अमित शाह ने सूबे की मौजूदा स्थिति की हकीकत जानने के लिए कानपुर में बैठक बुलाई है।