'राम की धरती' से वनवास खत्म करेगी भाजपा!
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होली के तुरंत बाद भाजपा भविष्य की चुनौतियों से मुक्ति के लिए चिंतन में जुट जाएगी। इसके लिए शनिवार से भाजपाई चित्रकूट में जुट रहे हैं।
दो दिन तक चलने वाले इस मनन-मंथन में सदस्यता अभियान के साथ निकट भविष्य में होने जा रहे पंचायत चुनाव और 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी का परचम फहराने का रोडमैप तैयार किया जाएगा। साथ ही नेताओं के बीच खींचतान व अहं के टकराव को दूर करने की कोशिश होगी।
बैठक में पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ ही विधानमंडल दल के नेता सुरेश खन्ना और विधान परिषद में पार्टी के नेता हृदयनारायण दीक्षित को भी बुलाया गया है। लंबे समय बाद पार्टी की किसी बैठक में इन लोगों को बुलाया गया है।
इसलिए बैठक को लेकर यह जिज्ञासा रहेगी कि गुटबाजी व खींचतान से उबर न पा रही भाजपा राम की धरती चित्रकूट पर नेताओं को बड़े मन व बड़े दिल से फैसले लेने को तैयार कर पाती है या नहीं।
चित्रकूट के बाद आगे होने वाली बैठकों में भाजपा का मौजूदा प्रदेश नेतृत्व सबको साथ लेकर सामूहिक फैसले की पुरानी परिपाटी को अपने कामकाज में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ता या नहीं।
पड़ गई मनमाने फैसले लेने की परंपरा
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के साथ शुरू हुई पार्टी में मनमाने फैसलों की परंपरा सी पड़ गई है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एक तरह से पार्टी के कामकाज से दरकिनार कर दिए गए हैं। पूर्व पदाधिकारियों का भी संगठन के कामकाज से कोई वास्ता नहीं रह गया है।
भाजपा में लंबे समय तक परंपरा रही कि पार्टी के फैसलों में पूर्व पदाधिकारियों से सलाह-मशविरा की भी भागीदारी रहे, पर तीन-चार साल में यह परंपरा पूरी तरह खत्म हो गई है। जिलों में गठित होने वाली समन्वय समितियां भी तीन-चार सालों से नहीं गठित हुई हैं। इसको लेकर पार्टी हाईकमान के सामने तक बात उठ चुकी है।
पार्टी के बड़े नेता कई बार कह चुके हैं कि भाजपा की मुश्किल दूसरे दल नहीं, बल्कि खुद अपने-अपने अहं के टकराव हैं। नेताओं की खींचतान के कारण ही पार्टी की राह में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
इसीलिए चित्रकूट का चिंतन लोगों की जिज्ञासा का केंद्रबिंदु बना हुआ है। चिंतन बैठक में भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, महामंत्री (संगठन) सुनाली बंसल सहित सभी प्रदेश महामंत्री, क्षेत्रीय अध्यक्ष व क्षेत्र संगठन मंत्री शामिल होंगे।