'मकसद' में मिली कामयाबी तो बढ़ेगा भाजपाइयों का रुतबा!
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सदस्यता का लक्ष्य पूरा करने के लिए जूझ रहे भाजपा हाईकमान ने अब सूबे के बड़े नेताओं, पदाधिकारियों, सांसदों व विधायकों के भी पेंच कसने का फैसला किया है। तय किया गया है कि सदस्यता को पार्टी में नेताओं के पद और उनके कद से जोड़ दिया जाए।
सदस्यता की कसौटी पर खरे उतरने वालों को ही पद दिया जाए और उनका कद भी बढ़ाया जाए। जो लापरवाही बरतें उनको प्रभावहीन किया जाए। इस सिलसिले में दिल्ली में हाल ही में पार्टी सांसदों व प्रदेश नेताओं की बैठक में पूरा रोडमैप तैयार किया गया है।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद शामिल हुए और उन्होंने भी काम करने वाले को पद और उसका कद बढ़ाने के फॉर्मूले पर सहमति जताई। जानकारी के मुताबिक, पहले तो सांसदों के साथ सरकार के कामकाज पर बातचीत हुई। साथ ही भूमि अधिग्रहण अध्यादेश जैसे मुद्दे पर बातचीत की गई।
सांसदों को 25 हजार तो विधायकों को दस हजार का कोटा
सदस्यता अभियान में सांसदों व विधायकों के पर्याप्त दिलचस्पी न लेने पर चिंता जताई गई। बैठक में मौजूद प्रदेश के नेताओं के भी पेंच कसे गए।
उनसे पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ लोगों के साथ समन्वय न रखने पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। कहा गया कि सभी को साथ लेकर उप्र में पार्टी को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाए।
तय हुआ है कि प्रत्येक सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्र से पांच-पांच हजार सदस्य बनाए। इस प्रकार उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र में कम के कम 25 हजार सदस्य बनाने हैं।
विधायकों को अपने क्षेत्र में कम से कम 10 हजार सदस्य बनाने को कोटा सौंपा गया है। इसी तरह पदाधिकारियों को भी सदस्यता का कोटा देने का फैसला किया गया है। कहा गया है कि सदस्यता को लेकर सौंपी गई जिम्मेदारी को किसी भी हाल में पूरा करना है।
इसलिए हो रही है बेचैनी
प्रदेश में भाजपा को लगभग 1.50 करोड़ सदस्य बनाने हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी चाहते हैं कि उप्र में लगभग दो करोड़ लोग पार्टी के सदस्य बन जाएं। प्रदेश में अभी भाजपा की सदस्यता का आंकड़ा लगभग 1.25 करोड़ ही पहुंच पाया है। वैसे तो सदस्यता अभियान 31 मार्च तक चलना है।
पर, अब सदस्य बनने के लिए लोगों में पहले जैसा उत्साह न दिखने के कारण भाजपा नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें बनने लगी हैं। उन्हें लग रहा है कि ऐसा न हो कि लक्ष्य पूरा न हो पाए। इसके बावजूद पार्टी के रणनीतिकार किसी भी तरह आंकड़ा खींचकर दो करोड़ पहुंचाना चाहते हैं ताकि उनकी पहुंच-पकड़ व क्षमता पर सवाल न उठे।
हाईकमान को भी लगता है कि सदस्यता के बहाने ही सही उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तैयार करने का यही सबसे बेहतर तरीका है। भगवा रणनीतिकारों का मानना है कि सदस्यता के सहारे अगर प्रदेश में जमीन तैयार हो गई तो विधानसभा चुनाव-2017 की चुनौतियों से पार पाना आसान हो जाएगा।
प्रदेश सदस्यता प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह दावा करते हैं कि सदस्यता को लेकर लोगों में उत्साह बरकरार है। आंकड़ा डेढ़ करोड़ पूरा करने के लिए सिर्फ 25 लाख और सदस्य बनाने हैं। यह बहुत मुश्किल नहीं है। लक्ष्य पूरा करने के लिए पूरी कार्ययोजना बना ली गई है।