जीत की भनक मिलते ही जवां हुई मंत्री पद की चाहत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक्जिट पोल में एनडीए को बढ़त मिलते देख प्रदेश भाजपा नेताओं में केंद्र में बड़ी भूमिका पाने की लालसा जवां हो गई है और इसके लिए अजीब तर्क गढ़े जा रहे हैं। कहीं वरिष्ठता का तर्क दिया जा रहा है तो कहीं समीकरणों का हवाला दिया जा रहा है।
तर्क यह भी दिए जा रहे हैं कि यूपी से मिलने जा रहे भारी समर्थन के चलते मोदी के मंत्रिमंडल में यूपी को सबसे ज्यादा भागीदारी मिलेगी। ऐसे में कई लोगों को मौका मिल सकता है।
जिन नामों को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, उनमें डॉ. मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, योगी आदित्यनाथ, उमा भारती, मेनका गांधी, संतोष गंगवार सहित कुछ अन्य नाम शामिल हैं।
मंत्रिमंडल में संभावित नामों की चर्चा को सिर्फ भाजपा कार्यकर्ता या नेताओं के समर्थक ही नहीं, खुद नेता भी हवा दे चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने ही झांसी व अमेठी में उमा भारती और स्मृति ईरानी को भविष्य में मंत्री बनाने का संकेत दे चुके हैं।
कायम रहेगा जोशी का रुतबा
तर्क दिया जा रहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में शामिल रह चुके मुरली मनोहर जोशी को मोदी अगर अपने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करना चाहते हैं तो उन्हें जोशी के लिए किसी ऐसी भूमिका का चयन करना होगा, जहां जोशी को अपना अपमान न लगे।
इसलिए जोशी भले ही मंत्री न बनें लेकिन उनका रुतबा कम नहीं होगा। राजनाथ सिंह लगातार सरकार से बाहर रहने की घोषणा कर रहे हैं। बावजूद इसके उनके मंत्रिमंडल में जाने की अटकलें थम नहीं रही हैं।
तर्क दिया जा रहा है कि अगर भगवा रणनीतिकार संगठन में फेरबदल करना चाहते हैं तो सिंह का कहीं न कहीं सम्मानजनक समायोजन करना ही पड़ेगा।
विनय कटियार या मुख्तार अब्बास नकवी भले ही चुनाव न लड़े हों लेकिन भाजपा के भीतर इन्हें भी मंत्रिमंडल में शामिल बताया जा रहा है। मेनका गांधी और संतोष गंगवार को भी लोग भावी मंत्री बता रहे हैं।
मंत्री के रूप में लड़े चुनाव
एक ओर कार्यकर्ता व समर्थक अपने-अपने नेताओं को भविष्य का मंत्री बता रहे हैं तो कुछ ऐसे नेता भी हैं जिन्होंने मोदी के भावी मंत्री के रूप में ही चुनाव ही लड़ा।
बृजभूषण शरण सिंह और योगी आदित्यनाथ का तो पूरा प्रचार ही इसी के इर्द-गिर्द घूमा। दोनों के समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं को भविष्य का मंत्री बताकर क्षेत्र में विकास कार्य कराने का आश्वासन दिया है।
कलराज मिश्र के समर्थकों ने भी देवरिया में यही किया है। अब देखना यह है कि इसमें किसका सपना साकार होता है और किसका नहीं।
इन समीकरणों का भी पेंच
तर्क दिए जा रहे हैं कि प्रदेश में नतीजों के संकेत को देखते हुए मोदी की पहली कोशिश यूपी में भाजपा के पक्ष में बने माहौल को बनाए रखने की होगी।
मोदी कभी नहीं चाहेंगे कि पिछड़ों व अति पिछड़ों तथा दलितों के बीच बनी उनकी पैठ कमजोर पड़े। ऐसे में वह यूपी से इन वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को भी मंत्रिमंडल में लेना चाहेंगे।
मोदी न सिर्फ यूपी के सामाजिक समीकरणों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेंगे बल्कि क्षेत्रीय संतुलन भी बनाए रखना चाहेंगे।
ऐसे में चुनाव जीतने पर हुकुम सिंह, राजेन्द्र अग्रवाल, सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह और भानुप्रताप वर्मा की भी किस्मत जाग सकती है।