आत्महत्या के लिए मजबूर कर रही भाजपा: सपा
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समाजवादी पार्टी ने बजट को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता और राजनीतिक पेंशन मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि वित्त मंत्री ने कॉर्पोरेट घरानों के लिए तो खजाना खोला लेकिन आम आदमी को ठेंगा दिखा दिया।
सूखे की मार झेलते किसानों को तो मोदी सरकार आत्महत्या के लिए मजबूर कर रही है।
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि वित्तमंत्री ने कारपोरेट घरानों को साढ़े पांच लाख करोड़ से ऊपर की रियायतें देने के साथ कई क्षेत्रों में पीपीपी के नाम पर निजी कंपनियों के लिए नए चरागाह खोलने का काम किया है।
पहले ही बजट में भूले महंगाई
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आम आदमी की जरूरत की चीजों, पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और घरेलू गैस पर सब्सिडी घटाने का काम बजट से ठीक पहले शुरू कर दिया था।
उन्होंने कहा कि चुनाव भाषणों में महंगाई को बड़ा मुद्दा बनाने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले बजट में इसकी अनदेखी ही की गई है। उसके तौर-तरीके जता रहे हैं कि महंगाई की आग और भड़केगी।
सपा प्रवक्ता ने कहा, सूखे की आशंका है लेकिन केंद्रीय बजट में इस तरफ ध्यान नहीं है। गावों और शहरों में बढ़ती बेरोजगारी दूर करने की दिशा में कुछ भी नहीं है।
यह विडंबना ही है कि एफडीआई का विरोध करने वाली भाजपा का इसी पर खास जोर है।
किसान विरोधी है बजट
राजेंद्र चौधरी के अनुसार बजट जनविरोधी, किसान विरोधी, दिशाहीन और महंगाई बढ़ाने वाला है।
उन्होंने कहा कि आम बजट से अच्छे दिनों की उम्मीद करने वाले करोड़ों लोगों को भारी निराशा हुई है। यह बजट उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के लिए ही अच्छे दिन लेकर आया है।
बजट में रोजगार की व्यवस्था नहीं है। इससे नौजवान हतोत्साहित होंगे। यूपी जैसे बड़े राज्य की घोर उपेक्षा की गई है।
बजट में महिलाओं के लिए कुछ नहीं
राजेंद्र चौधरी ने कहा, केंद्र सरकार का कार्यकाल 2019 तक है, पर 2022 तक सबको घर देने का वादा किया जा रहा है।
भाजपा को किसानों, गरीबों और मजदूरों की कोई चिंता नहीं है। बजट में महंगाई कम करने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। नौकरीपेशा लोग इनकम टैक्स की दरों में बड़ी रियायतों की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्हें भी निराशा हुई है।
रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की व्यवस्था करके देश की सुरक्षा को दांव पर लगाया जा रहा है।
सपा प्रवक्ता ने कहा कि बजट में महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी व्यवस्था नहीं की गई है। कृषि एवं किसानों की भी अनदेखी की गई है।