यूपी: पंचायत चुनाव के बाद यूपी में बदले बदले ‘सरकार’ नजर आते हैं, संगठन में भी सुधार की कोशिश
पंचायत चुनाव के बाद भाजपा ने सरकार व संगठन में बदलाव शुरू कर दिए हैं। बूथ कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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पंचायत चुनाव में जमीनी हकीकत का अंदाजा लगने के बाद केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता का असर सरकार से संगठन तक हर स्तर पर नजर आने लगा है। हालांकि यह सक्रियता अभी कई स्तर पर दिखनी बाकी है जहां कई समस्याओं के समाधान के लिए नीतिगत पहल का इंतजार है।
दरअसल, पिछले काफी समय से सरकार से लेकर संगठन तक दुविधा में नजर आ रहे थे। जनप्रतिनिधियों का फीडबैक था कि उनके ’वाजिब’ काम भी कलेक्टर और कप्तान नहीं सुनते हैं। बार-बार के फीडबैक के बाद भी इस स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा था। सरकार से लेकर संगठन तक तमाम पद खाली थे, लेकिन उन्हें भरा नहीं जा रहा था जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही थी। गुस्सा यह भी था कि जब सियासी फायदा लेना होता है, तब बूथ कार्यकर्ता ढूंढा जाता है, लेकिन जरूरत पर बड़े पदाधिकारियों को छोड़ मंडल का प्रमुख कार्यकर्ता भी मंत्री तक नहीं पहुंच पाता है। मंत्रियों का जिला भ्रमण सरकारी बैठक व बड़े पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक तक सिमट जाती है।
कार्मिकों में नाराजगी थी कि जुगाड़ वाले लोगों की प्रशासनिक आधार पर वर्ष भर ट्रांसफर-पोस्टिंग गुपचुप तरीके से होती रहती है, लेकिन स्थानांतरण पर रोक की वजह से वास्तविक समस्याओं का सामना कर रहे तमाम कार्मिक नहीं हट पाते हैं।
शिकवा यह भी कि छोटे-छोटे मामलों को तिल का ताड़ बनाकर पीसीएस अधिकारियों व छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर सरकार की पीठ ठोंक ली जाती है, लेकिन जब लापरवाही, उदासीनता और नाफरमानी का मामला बड़े अफसरों तक पहुंचता है, तो चुप्पी सध जाती है। लेकिन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से संवाद व समीक्षा के बाद से इन सभी स्तर पर हरकत नजर आने लगी है।
इस तरह बदलाव
- सरकार से संगठन तक आम लोगों व जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व का संदेश देकर मंत्रियों को ब्लॉक-ब्लॉक तक पहुंचने और जमीनी लोगों से संवाद का कार्यक्रम तय कर दिया गया है। इससे कार्यकर्ताओं की पहुंच मंत्रियों तक बढ़ेगी।
- फील्ड के कार्मिक और अफसर जनप्रतिनिधियों को पूरा महत्व दें इसके लिए उच्च स्तर से निर्देश के बाद डीएम व कप्तान ने विधायकों व सांसदों को चाय पर आमंत्रित कर उनकी बात सुनना व उस पर अमल शुरू कर दिया है। इस तरह की बैठकों के बाद कई जिलों में थानेदार, तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर व लेखपाल इधर से उधर किए जाने शुरू किए गए हैं।
- मुख्यमंत्री ने वाराणसी में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी सरोज कुमार को जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर निलंबित कर दिया। शिकायत थी कि वह जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाते, जिससे विभाग से जुड़े काम लंबित पड़ते जा रहे हैं। सरोज डाइरेक्ट आईएएस अधिकारी हैं। इसका संदेश दूसरों तक भी पहुंचेगा, ऐसा माना जा रहा है।
- सरकार ने आम कर्मचारियों को राहत देते हुए स्थानांतरण पर लगी रोक हटा ली है। वाजिब कारणों से स्थानांतरण का इंतजार कर रहे कार्मिकों का भी स्थानांतरण संभव हो सकेगा।
- गैर सरकारी लोगों को संगठन से सरकार तक में रिक्त पदों पर नियुक्ति शुरू हो गई है। सरकार ने अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, स्थायी लोक अदालतों के साथ विभिन्न आयोगों, निगमों व अन्य सरकारी पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही शुरू कर दी है। संगठन में भी रिक्त पदों को भरने के साथ मोर्चों व प्रकोष्ठों के गठन का काम शुरू हो गया है।
- सरकारी विभागों में भी रिक्त पदों को भरने की कार्यवाही भी आगे बढ़ी है। कई भर्ती आयोगों ने अपने आगामी भर्ती कार्यक्रम व जारी भर्तियों को आगे बढ़ाने की बात शुरू की है।
इन पर कार्रवाई का इंतजार
- सरकार चुनाव ड्यूटी में कोविड से जान गंवाने वाले कर्मियों को तो सहायता कर रही है लेकिन बड़ी संख्या में आम लोगों ने कोविड से जान गंवाई है। ऐसे सामान्य परिवारों की कोई मदद नहीं हो सकी है। इन्हें मदद का इंतजार है।
- कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव समिति का गठन नहीं हो सका है। उच्च स्तर के निर्देश के बावजूद कार्यवाही अटकी है। कर्मचारियों में जबर्दस्त नाराजगी है।
- शिक्षा व राजस्व लेखपाल सहित तमाम संवर्गों के कर्मियों को कई-कई वर्ष से पदोन्नति नहीं मिल सकी है। इससे इन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। इन्हें पदोन्नति का इंतजार है।
- अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की आठ पुरानी भर्तियों की लिखित परीक्षा का इंतजार है। आयोग ने द्विस्तरीय प्रणाली से नई भर्ती की कार्यवाही शुरू कर दी लेकिन पुरानी पर चुप्पी है। इन भर्तियों से जुड़े अभ्यर्थी भर्ती पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
- राजस्व परिषद के चेयरमैन का पद डेढ़ महीने से अधिक समय से खाली है। राजस्व प्रशासन से जुड़े परिषद स्तर पर होने वाले नीतिगत सारे कार्य ठप हैं। राजस्व से जुड़े कार्मिकों की समस्याओं पर भी निर्णय नहीं हो पा रहा है।