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यूपी का चुनाव जीतने के लिए भाजपा इस तरह लेगी जाति का सहारा

Mon, 01 Jun 2015 12:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 01 Jun 2015 12:08 PM IST
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BJP is focusing on caste equation in Uttar Pradesh.

भाजपा महासंपर्क अभियान के जरिये संगठन का जातीय गणित दुरुस्त करने में जुट गई है। पार्टी की कोशिश है कि संगठन में पिछड़ों व अति पिछड़ों की भी पर्याप्त भागीदारी हो। इसलिए यह तय किया गया है कि जहां कहीं सूची में इन वर्गों की भागीदारी नहीं है, वहां अलग से सदस्य बनवाकर इन्हें अपेक्षित भागीदारी दी जाए।

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दलितों की भागीदारी के बारे में तो पार्टी के संविधान में पहले से ही व्यवस्था कर दी गई है लेकिन पिछड़ों के बारे में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

पार्टी नेता महासंपर्क अभियान के सहारे विधानसभा चुनाव 2017 की तैयारियों का खाका खींचना चाहते हैं। साथ ही उनकी इच्छा है कि लोकसभा चुनाव में जिस तरह पार्टी को अगड़ों व दलितों के साथ पिछड़ों का भी समर्थन मिला है, उसे संभाल कर रखा जाए।
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विरोधी दल के लोग भाजपा पर सिर्फ बनियों व ब्राह्मणों की पार्टी होने का आरोप न लगा सकें। इसकी वजह भी साफ है। सभी जानते हैं कि तमाम कोशिशों के बावजूद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण बहुत अहम होंगे।
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30 से 40 प्रतिशत भागीदारी की कोशिश

BJP is focusing on caste equation in Uttar Pradesh.

खासतौर से सपा और बसपा जैसे दलों की तरफ से चुनाव में बाजी मारने के लिए जातीय गणित को धार दी जाएगी। भाजपा नेताओं को पता है कि इससे तभी निपटा जा सकेगा जब पार्टी के पास यह कहने का आधार हो कि उसके पास भी इन वर्गों की पर्याप्त संख्या ही नहीं बल्कि कई चेहरे भी हैं।

इसीलिए पार्टी नेता महासंपर्क अभियान के जरिये अभी से इस चुनौती से निपटने का इंतजाम कर लेना चाहते हैं।

कोशिश है कि प्राथमिक सदस्यता के स्तर पर पिछड़ों और अति पिछड़ों की कम से कम 30-40 प्रतिशत भागीदारी जरूर रहे। जहां कहीं, यह आंकड़ा पूरा नहीं हो रहा होगा, वहां महासंपर्क अभियान से इसे दुरुस्त किया जाएगा।

इन लोगों पर भी होगा फोकस

BJP is focusing on caste equation in Uttar Pradesh.

वैसे तो पार्टी के संविधान में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी के लिए पहले से व्यवस्था है। पर, इस बार इनकी भी हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर है।

अभी तक मंडल (ब्लॉक) की कार्यसमिति में अनुसूचित जाति के न्यूनतम तीन और जिले की कार्यसमिति में चार सदस्य होने जरूरी हैं। पार्टी इस संख्या में बढ़ोतरी करना चाहती है।

खासतौर से प्राथमिक सदस्यों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी देने की कोशिश हो रही है।

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि भाजपा जातिवाद में भरोसा नहीं रखती लेकिन हम सभी को संगठन में समुचित प्रतिनिधित्व जरूर देना चाहते हैं। महासंपर्क अभियान से सक्रिय सदस्यता तक के काम में इस बात का ध्यान रखा जाएगा।

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