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निकाय चुनाव: भाजपा में उम्मीदवारों के चयन की कवायद शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 09 Oct 2017 01:40 PM IST
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निकाय चुनाव को लेकर भले ही अभी सीटों के आरक्षण को अंतिम रूप देने की कवायद चल रही हो लेकिन भाजपा में उम्मीदवार चयन की सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
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चुनाव संचालन समितियों के गठन के लिए पहले ही जिलों को निर्देश दिए जा चुके हैं। अब प्रदेश नेतृत्व ने जिलों और क्षेत्रों को उम्मीदवारों तथा दावेदारों के नामों का पैनल बनाने का काम शुरू करने को कह दिया है।
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यह काम स्थानीय स्तर पर होगा। साथ ही अलग-अलग निकायों के प्रभारी बनाए गए पार्टी नेता भी इस काम को कर रहे हैं। हालांकि पैनल को अंतिम रूप इस काम के लिए बनाई गई समितियां ही देंगी।
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इनमें जिला प्रभारियों के अलावा प्रत्येक जिले में स्थित निकायों के भी अलग-अलग प्रभारी शामिल होंगे।
आरक्षण की स्थिति साफ न होने से जिला प्रभारियों को सुझाव दिया गया है कि वे फिलहाल संभावित आरक्षण को आधार बनाकर दो-तीन विकल्प रखते हुए दावेदारों की सूची बनाएं।
यह भी ध्यान रखें कि आरक्षण की परिस्थिति में कौन ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ सकेगा।
इस बीच, मथुरा, आगरा, बरेली, मुरादाबाद व झांसी सहित पूर्व में इलाहाबाद व वाराणसी जैसे स्थानों से कुछ नगर निगमों व नगर पालिका परिषदों के महापौरों व अध्यक्ष पद के दावेदारों के नाम प्रदेश मुख्यालय को भेजे गए हैं।
कुछ नगर निगमों के पार्षदों के दावेदारों के नाम भी भेजे गए हैं। हालांकि प्रदेश नेतृत्व ने इन सभी को फिलहाल संबंधित जिलों को ही वापस भेज दिया है। यह कहा है कि दिवाली बाद स्थानीय स्तर पर बने फोरम में दावेदारों के सूची पर बातचीत करके नामों की छंटनी शुरू कर दी जाए ताकि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू करने में आसानी रहे।
यह दिए गए निर्देश
amit shah
- फोटो : अमर उजाला
कहा गया है कि दावेदारों के बारे में पूरी तरह स्क्रीनिंग करके प्रमुख लोगों के नामों का ही पैनल बनाया जाए। पहली प्राथमिकता जिताऊ लेकिन साफ-सुथरी छवि वाले दावेदार को दी जाए। उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि तथा भाजपा में उनकी सक्रियता का भी ध्यान रखा जाए। अगर दावेदारों में कोई भाजपा का पुराना, मजबूत और निष्ठावान कार्यकर्ता हो तो उसे शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। सांसदों व विधायकों सहित स्थानीय स्तर पर पार्टी के पुराने लोगों से सलाह-मशविरा कर लिया जाए। पर, अंतिम फैसला पार्टी की तरफ से तय फोरम ही करेंगे।
दावेदारों की भीड़ बनी मुसीबत
भाजपा अध्यक्षता महेंद्रनाथ पांडेय बैठक में
- फोटो : amar ujala
भाजपा में निकाय चुनाव के टिकटों को लेकर मारामारी रहती है। पर, राज्य और केंद्र दोनों जगह भारी बहुमत से सत्ता में होने के कारण टिकटों के लिए खींचतान ज्यादा है। राजधानी सहित सभी स्थानों पर निकायों के अध्यक्ष से लेकर पार्षद तक इस बार भाजपा के टिकट पर चुनावी वैतरणी पार करने को लालायित हैं। इसके लिए ये तरह-तरह की कोशिशें कर रहे हैं। कोई किसी नेता के सहारे टिकट का समीकरण बैठाने में जुटा है तो पुराने कार्यकर्ता वनवास के दौरान संघर्ष का वास्ता देने के साथ निष्ठा तथा समर्पण की दुहाई देते हुए घूम रहे हैं।
यह है चयन की व्यवस्था
BJP
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश मुख्यालय पर दबाव कम करने के लिए उम्मीदवारों के चयन की व्यवस्था का विकेंद्रीकरण करने का फैसला किया है। इसके तहत नगर पंचायतों के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर होगी। इसमें क्षेत्रीय समिति की सहमति जरूरी होगी। नगर पालिका परिषद के सदस्यों के टिकट संबंधित स्थान की जिले की कमेटी की संस्तुति पर तय होंगे। इसमें प्रदेश की समिति से सहमति लेनी होगी। कोई विवाद होने पर अंतिम फैसला प्रदेश से होगा। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का पैनल तो क्षेत्र स्तर पर बनी समिति से बनेगा। पर, घोषणा प्रदेश स्तर पर गठित समिति करेगी। महापौर और पार्षदों के टिकटों का फैसला प्रदेश मुख्यालय पर बनी समिति करेगी।
दिल है कि मानता नहीं
RSS-BJP
इसके बावजूद भाजपा से टिकट चाहने वालों के पैर प्रदेश मुख्यालय की तरफ बढ़ रहे हैं। चुनाव तैयारियों से जुड़े एक प्रमुख पदाधिकारी बताते हैं, नगर पालिका परिषद ही नहीं कई जगह से तो नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर लड़ने के इच्छुक लोग प्रदेश नेताओं के यहां टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। यह समझाने के बावजूद कि उन्हें अपनी बात क्षेत्रीय कमेटी के सामने रखनी चाहिए, वे प्रदेश मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।